इंडिया की महिला टीम ने पाकिस्तान को वर्ल्ड कप में फिर हराया है. स्कोर हो गया है 10 - 0. पाकिस्तान अब भी, लड़कों की टीम की तरह, खाता खोलने में नाकाम रहा है. इंडिया ने पिछले 21 मैचों में 20 मैच जीते हैं. पिछले 10 मैच लगातार जीते हैं. वर्ल्ड कप में अब वो ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के लिए और भी सीरियस खतरा बन गई हैं.
वेस्ट इंडीज़ के मैच के बाद अपनी स्टम्पिंग के दम पर महिला टीम इंडिया की धोनी बन चुकीं सुषमा वर्मा और पूनम राउत की बदौलत 169 रन बनाये. एक समय पर ये रन काफी कम लग रहे थे लेकिन जिस तरह से इंडिया ने पाकिस्तान की इनिंग्स में बॉलिंग की, हॉस्टल की कम्बल कुटाई याद आ गई. लड़का कमरे में घुसता था और तुरंत ही उसके ऊपर एक कम्बल गिर जाता था. वो उठ ही नहीं पाता था और उस पर वार पर वार होते रहते थे. पाकिस्तान की टीम के साथ वही हुआ.

पूनम राउत
इंडिया की रीढ़ - उसकी स्पिन. पिछले 1 साल में दुनिया भर में इंडिया की 3 स्पिनर्स ने सबसे कम इकॉनमी के साथ बॉलिंग करने वाली लिस्ट में पहले 5 स्थानों में कब्जा जमाया हुआ है. और आज इंडिया की बॉलिंग में सबसे आगे रहीं एकता बिष्ट. एकता ने पहले ओवर से ही लगाम तान के रही और मैच 10-2-18-5 के फिगर्स के साथ खतम किया. मैन ऑफ़ द मैच भी एकता ही रहीं. असल में एकता ही वो थीं जिन्होंने कमरे में घुसते ही शिकार के ऊपर कम्बल डाला था.
एकता बिष्ट. लेफ़्ट आर्म स्पिनर. टोपी लगाकर गेंद फेंकने वाली लड़की. उत्तराखंड से आने वाली पहली महिला इंडियन क्रिकेट प्लेयर. झूलन गोस्वामी के साथ बॉलिंग ओपन करने आईं. मैच के बाद संजय मांजरेकर ने उनसे जब पूछा कि नई गेंद के साथ कैसा अनुभव रहा तो एकता का जवाब था कि वो नई बॉल के साथ बॉलिंग करना पसंद करती हैं. और यहां एक बहुत बड़ा पॉइंट मिलता है. ये टीम कोई पुराने ढर्रे पर चलने वाली टीम नहीं है. आप भले ही इसका मैच न देखते हों लेकिन ये टीम सब कुछ वैसे ही कर रही है जैसे क्रिकेट नया होता जा रहा है. नई गेंद से एक स्पिनर बॉलिंग कर रही है और ये उसका पसंदीदा फन है. और फिर जब उनसे पूछा गया कि विकेट ने कितना रोल प्ले किया तो उसने दिल जीतने वाली बात कही. "जैसी भी विकेट चले, हमें बॉलिंग करनी है. विकेट्स लेने हैं." यहां एकता ने क्लियर कर दिया कि आखिर क्यूं उसने सॉलिड बॉलिंग की है. वो मेंटली स्ट्रांग है. वो विकेट्स लेने के लिए उतरती है. अटैक ही उसका डिफ़ेंस है.

एकता बिष्ट
सोशल मीडिया मैच को लेकर हरा-भरा था. जितने दर्शक इंडिया और पकिस्तान की लड़कियों के मैच को मिले, उतने तो इंडिया और वेस्ट इंडीज़ के लड़कों के मैच की पूरी सीरीज़ को नहीं मिले होंगे. और ये देखना सुखद था. पाकिस्तान के खिलाफ़ इस मैच के साथ ही वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ कोहली की टीम खेल रही थी. लेकिन उसकी ओर आज किसी का ध्यान नहीं था. आज रोल उल्टा हुआ था. और महिला टीम ने इसके साथ पूरा न्याय किया. 9-0 के स्कोर को 10-0 किया.
इंडिया का अगला मैच श्री लंका से है. 5 जुलाई. चमारी अटापट्टू हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ़ हुए मैच में 1 ही रन बना पाईं लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ उनके 170 के ऊपर रन उन्हें काफी ताकत देंगे. लेकिन इन सबके बावजूद मैच की फेवरिट इंडिया की टीम ही होगी. वो इस वक़्त एक टीम के तौर पर बहुत स्ट्रांग हैं. उन्हें मालूम है कि एक से गड़बड़ होगा तो दूसरा संभाल लेगा. और सही मायने में टीम यही होती है.
इसी के साथ सबसे ज़्यादा मज़ेदार बात हुई. इस मैच को लोगों ने इंडिया को चैम्पियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के हाथों मिली हार का बदला लेने वाला मैच बना रहा था. ये वाकई में मज़ेदार था कि लड़कों को मिली हार का बदला लेने का ज़िम्मा लड़कियों को सौंपा गया था. उस दौर में जहां दोनों देशों की लड़कियों को गेम में सर्वाइव करने के लिए उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है जितनी एक चने को भाड़ फोड़ने में. इंडिया वो देश है जिसके एक क्रिकेट बोर्ड के एक अहंकारी चेयरमैन ने देश की पूर्व महिला क्रिकेट कैप्टन से कहा था कि अगर उसका बस चलता तो वो लड़कियों की टीम को बंद कर देता क्यूंकि उनसे उसे कोई फ़ायदा नहीं मिलता. आज उसी मुनाफ़ा कमा कर न देने वाले झुण्ड ने उनका बदला लिया है जो अरबों कमा कर लाते हैं. मज़ेदार है. सबके दिन फिरते हैं. और कर्मा तो एक कुतिया है ही.
अच्छा खेला लड़कियों!
डटे रहने के लिए शाबाश और शुक्रिया!
:)
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