
प्रणय
'दी लल्लनटॉप' का पाठक. गंजाता, धीर-गंभीर बंदा. फास्ट बोलर बनना चाहता था. अब हर्षा भोगले बनना चाहता है. लघुकथाओं में हाथ आज़माया हुआ है. फिल्में, किताबें, कैमरा और बातों के सहारे जीता है. नाम है प्रणय पाठक. इशांत शर्मा पर हमें इस्स सा लिख भेजा है. सोचा आपको भी पढ़वा दें.
शर्माजी का दूसरा लड़का.क्रिकेट अच्छे से देखा हुआ है, तो रिकी पॉन्टिंग को जानते होंगे. ये भी जानते होंगे कि भारत के ख़िलाफ 2003 के विश्व कप के फाइनल में उन्होंने हमारी बॉलिंग को तहस-नहस कर दिया था. यही नहीं, उन्हें भारत की गेंदबाजी कुछ ज़्यादा ही भाती थी. 2007-08 के दौरे पर पहली बार उन्हें नाकामी का मुंह देखना पड़ा, जब लंबे बालों वाले एक तेज़ गेंदबाज़ ने उन्हें बुरी तरह छकाया. यह गेंदबाज़ था इशांत शर्मा.
दिल्ली का किशोर. शरीर से स्काइस्क्रेपर और गेंद को दोनों तरफ नचाने का हुनर. ये किस्से-कहानियों की सी बात लगती है भाईसाहब. जैसे मानो लगान का ही एक काटा हुआ सीन हो. टेस्ट सीरीज ख़त्म हुई. इशांत का आग उगलना बंद नहीं हुआ था.
17 फरवरी 2008 को वनडे सीरीज का एक अहम मैच
तोड़-फोड़ के लिए मशहूर ऑस्ट्रेलियाई ओपनिंग बैट्समैन एडम गिलक्रिस्ट को इशांत ने एक बेहद खतरनाक गेंद पर चलता किया. गेंद पड़ी बाहर और कांटा बदल कर किल्लियों में जा घुसी. गिलक्रिस्ट कोई घोंघे नहीं थे. दरअसल ये गेंद 152.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी गई थी.
यह कहानी शुरू हुई साल 2007 में. यानी आज से नौ साल पहले. मुनाफ पटेल, लंबे कद के 'तेज़' गेंदबाज़, जिन्होंने अफवाहों में रणजी में 157 किमी प्रति घंटे की गेंद फेंकी थी, चोटिल हुए थे. इसके बाद इशांत शर्मा नाम के 19 साल के गेंदबाज़ को भारतीय टीम में मौका मिला.
क़द: 6 फुट 4 इंच.
कंधे: चौड़े
मसूड़े: स्पष्ट
बाल चेहरे की चर्बी की कमी को पूरा करने के हिसाब से पूरे कन्धों तक. भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी के इतिहास के हिसाब से बिलकुल विपरीत डील-डौल. क्रिकेट की दुनिया में भारत को पहले सनी गावस्कर, फिर सचिन तेंदुलकर और अब विराट कोहली के नाम से जाना गया है.
इन चोटी के नामों के बीच अगर आप रखना चाहें तो राहुल द्रविड़, एमएस धोनी और कुछेक वेंगसरकर, सहवाग, और गांगुली आ जाएंगे. नहीं, ये भी हो सकता है आप कपिल देव और ज़हीर खान या बिशन सिंह बेदी और अनिल कुंबले, या यहां तक कि मनोज प्रभाकर और अजित अगरकर को भी उतने अच्छे से ही जानते हों.

लेकिन एक बात मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं. वो ये कि इशांत शर्मा का नाम सुनते ही सबसे पहले हमें गुस्सा आता है.
'वही ना, लंबे बालों वाला, यार वो पिटता बहुत है. याद है कैसे फॉकनर ने पूरे 30 रन जड़े थे एक ही ओवर में उसके?' और फिर चिढ़ से ठहाके मार के हम भारत की तेज़ गेंदबाज़ी पर हंसना शुरू हो जाते हैं. "यार बॉलिंग करता है तो उसके बाल ही पहले नहीं संभलते उससे. ऊपर से बात-बात पर पिच पर गिर जाता है. अगर आप ज़्यादा शेख़ी आंकड़ो की बघारते हैं, तो इशांत की 37 की औसत पर कनखियों से टिपण्णी करते हैं. मानो स्वयं संजय मांजरेकर या चारु शर्मा हों.
मैं इशांत का कोई नहीं लगता हूं. मगर मुझे उसकी तरक्की पर गर्व है. उसका दूसरा जन्म लगभग तब हुआ, जब ज़हीर ख़ान ढलने लगे. 2011 में भारत का वेस्ट इंडीज़ का दौर हुआ. ब्रिजटाउन में हुए दूसरे टेस्ट में इशांत ने तेज़ी और उछाल के दम पर 6/55 के आंकड़े दर्ज किए. दूसरी पारी में इशांत ने 53 रन देकर फिर 4 विकेट लिए. 3 टेस्ट में 22 विकेट लेकर इशांत ने अपनी साख से बढ़कर काम किया. कुछ महीनों बाद भारत इंग्लैंड में बुरी तरह हारा. 4-0 से. इयन बेल, केविन पीटरसन और कप्तान एलिस्टेयर कुक रन बनाने शुरू होते थे, तो आउट होने का नाम नहीं लेते थे. मगर इशांत ने यहां भी मेहनत की. संघर्ष अभी शुरू ही हुआ था, मगर इशांत टेस्ट मैच की गेंदबाज़ी के बारे में कुछ सीख रहा था. इशांत, शर्मा जी का दूसरा लड़का था, जिसकी महानता और ही थी.
इशांत दुनिया और इतिहास के और गेंदबाजों से बिलकुल अलग है. वो लंबा ज़रूर है, पर जवागल श्रीनाथ नहीं है. लंबे बाल वाला है, पर गिलिस्पी नहीं है. कभी वो ब्रॉड लगता है और माफ़ करें, मगर जब इनस्विन्गर मारने लगता है तो मुझे तो इमरान खान भी लगता है. उसका एक्शन टेस्ट मैच की शास्त्रीय गेंदबाज़ी के लिहाज़ से बेहद सुन्दर है. आज के स्टार्कों, जॉनसनों और स्टेनों के मुकाबले वो लंबे स्पेल डालता है. वो उछाल तो निकालता है, मगर उसे कर्टनी वाल्श कहना गुस्ताख़ी से कम न होगा. मरी हुई पिचों पर, बेग़रज़ साथी गेंदबाजों के साथ, वो लगातार अनिश्चितता के गलियारे में गेंद करता रहता है.
मुझे याद है. पिछले साल, एक टेस्ट में बहुत देर से दीवार बनकर खड़े श्रीलंका के कप्तान एंजेलो मैथ्यूज़ को नई गेंद मिलते ही इशांत ने चलता कर दिया था. मुझे याद है जब क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स पर इशांत ने आखिरी दिन के पहले सेशन की आखिरी गेंद पर मोईन अली को एक बर्बर बॉउंसर मारकर आउट किया था. लंच के बाद के सेशन में इशांत ने वो कहर ढाया कि इंग्लैंड ने घुटने टेक दिए. बोर्ड पर इंशात के सामने लिखा गया- 7-74.
मैच ख़त्म होने तक वो चोटिल ज़रूर हो गया था, मगर यह भारतीय तेज़ गेंदबाजों की नियति है. सफ़ेद गेंद के साथ उसकी बदहवासी एक सर्वव्यापी चित्र है. मगर नेट्स में लाल गेंद के साथ चेहरा पसीने से लथपथ, बाल पीछे बंधे हुए उसकी काबिलियत देखते ही बनती है.
वो मारक मिसाइल नहीं है, बल्कि कारगर कुल्हाड़ी है. वो असली मायनों में बैक को बेंड करता है. 27 साल की उम्र में, जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी टीम में अपने पहले कदम लेते हैं, इशांत टीम के अनुभवी, सीनियर खिलाड़ी हैं. ऑस्ट्रेलिया के ही रायन हैरिस, जो मेरे पसंदीदा गेंदबाजों में शुमार हैं. उनने अपना पहला मैच 30 साल में खेला था और वे अभी पिछले ही साल रिटायर हुए हैं.
अगर यही हाल रहा, तो कम से कम करियर की लम्बाई के मामले में इशांत कॉर्टनी वाल्श और वसीम अकरम को ज़रूर पीछे छोड़ देगा.