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तीरंदाजी में सबसे बड़ा उलटफेर! भारत की रिकर्व तीरंदाजों ने खत्म किया कोरिया का 44 साल का वर्चस्व

Asian Games 2026 : वर्ल्ड चैंपियंस कोरिया को हराकर पहली बार रिकर्व तीरंदाजी में विमेंस टीम ने जीता गोल्ड मेडल. Ankita Bhakat, Kirti Sharma और Kumkum Mohod की जोड़ी ने रचा इतिहास. वहीं, मेंस टीम ने रजत पर निशाना लगाया.

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अंकिता, कुमकुम और कीर्ति की जोड़ी ने साउथ कोरियन टीम को हराकर गोल्ड मेडल जीता. (Courtesy : Reuters)

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  • भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने नागोया एशियन गेम्स के फाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर 44 वर्षों के बाद इस प्रतिस्पर्धा में भारत के लिए रिकर्व तीरंदाजी का पहला गोल्ड मेडल जीता।
  • दक्षिण कोरिया ने पिछले 44 वर्षों से एशियन गेम्स में रिकर्व तीरंदाजी में लगातार गोल्ड मेडल जीते थे, जिससे भारत की टीम के लिए इस पदक की चुनौती और भी कठिन हो गई थी।
  • इस जीत के बाद भारत की महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है, और अब इस क्षेत्र में भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धा का नया स्तर स्थापित हुआ है।

रिकर्व तीरंदाजी मतलब दक्ष‍िण कोरिया का गोल्ड तय. 44 साल से एशि‍यन गेम्स में साउथ कोरिया का वर्चस्व कुछ ऐसा ही रहा है. यही कारण है कि जब फाइनल में भारतीय महिला टीम के सामने कोरिया की चुनौती थी. उन्हें पहले ही सिल्वर का दावेदार माना जा रहा था. शायद ही किसी ने सोचा होगा कि अंकिता भगत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोद की ये तिकड़ी 10 बार की ओलंपिक चैंपियन कोरियन टीम को मात दे पाएगी.

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सामने वर्ल्ड चैंपियन हो तो दबाव अलग लेवल का होता है. वो भी अगर टीम में दुनिया की नंबर 3 आर्चर हो तो क्या ही कहने. साउथ कोरिया की कांग चेयोंग वर्ल्ड की नंबर 3 प्लेयर हैं. रिकर्व तीरंदाजी में कोरिया को चुनौती देना लगभग नामुमकिन माना जाता था. लेकिन, अंकिता, कुमकुम और कीर्ति को इससे फर्क नहीं पड़ा. तीनों ने न सिर्फ इन्हें टक्कर दी. कोरिया को हराकर भारत की झोली में 11वां गोल्ड मेडल भी ला दिया.

साथ ही इस तिकड़ी ने साउथ कोरिया का 44 सालों का वर्चस्व भी खत्म कर दिया. फाइनल में भारतीय तिकड़ी ने कोरियन टीम को 5-3 से मात दी. इससे पहले, सेमीफाइनल में भी इस ट्रायो ने शानदार खेल दिखाया था. उन्होंने चीन को 5-1 से हराकर फाइनल में एंट्री मारी थी.

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कैसा रहा है तीनों तीरंदाजों का यहां तक का सफर?

भारत के लिए रिकर्व तीरंदाजी में पहला गोल्ड मेडल लाने वाली इस तिकड़ी का सफर बहुत दिलचस्प रहा है. सबसे पहले कुमकुम की बात करते हैं. उन्होंने सिर्फ तीन साल पहले ही रिकर्व की ट्रेनिंग शुरू की थी. करियर की शुरुआत तो एकदम देसी अंदाज में हुई थी. बांस के धनुष के साथ.

वहीं, कीर्ति के बारे में कहा जाता था कि वो रिकर्व धनुष संभालने के लिए शरीर से बहुत कमजोर हैं. असल में रिकर्व धनुष किसी भी तीरंदाज की असली ताकत का इम्तिहान लेता है.

तीसरी तीरंदाज अंकिता इस खेल की मंझी हुई खिलाड़ी हैं और अब तक कुल 23 इंटरनेशनल मेडल जीत चुकी हैं. अंकिता उस महिला रिकर्व टीम का भी हिस्सा थीं, जिसने हांगझू एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था.

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भारत तब तक कभी फाइनल में नहीं पहुंच पाया था. लेकिन, अब सब कुछ बदलने वाला था. ये तीनों लड़कियां इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने के लिए तैयार थीं.

नागोया में अंकिता, कुमकुम और कीर्ति का जलवा

सेमीफाइनल मैच के ठीक बाद, दबाव होने के बावजूद भारतीय तिकड़ी के चेहरे पर जरा भी घबराहट नहीं दिखी. नागोया में मौसम और हालात तीरंदाजी के लिए कुछ खास अच्छे नहीं थे. इसका असर स्कोर पर भी पड़ रहा था. लेकिन पूरी आर्चरी टीम से मिल रहे हौसले के दम पर अंकिता, कीर्ति और कुमकुम यह जानती थीं कि उनके पास इतिहास रचने का मौका है.

सबसे पहले मुकाबला चीन से हुआ. सेट के दौरान कुछ निशाने 8 और 9 पर भी लगे. लेकिन अंकिता, कुमकुम और कीर्ति ने हर मोड़ पर एक-दूसरे का साथ निभाया. जब भी टीम को परफेक्ट '10' स्कोर की जरूरत पड़ी, तीनों में से किसी एक ने आगे बढ़कर वो काम पूरा किया.

सेमीफाइनल में कीर्ति ने पहले और दूसरे सेट के आखिरी तीरों पर सटीक 10 का स्कोर लगाया और भारत के लिए पॉइंट्स पक्के किए. आखिरी सेट में भारत को बस बराबरी करनी थी. तीनों ने मिलकर यह काम बखूबी किया और 5-1 से मुकाबला अपने नाम कर लिया.

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वर्ल्ड चैंपियन कोरिया को कैसे किया पस्त?

चीन को हराने के बाद अब बारी थी, दिग्गज कोरिया से भिड़ने की. शुरुआत से ही कोरियन तिकड़ी कांग, ली और येजिन ओह ने अपना दबदबा बनाने की कोशिश की. लेकिन, भारतीय टीम ने भी हार नहीं मानी.

पहले दो सेट में कोरिया ने 54 और 56 का स्कोर बनाया. जवाब में भारत ने भी उसी लेवल का खेल दिखाया और मुकाबला 2-2 की बराबरी पर ला खड़ा किया. यहीं से वर्ल्ड चैंपियन टीम दबाव में आ गई.

इस दबाव का असर तीसरे सेट में साफ दिखा. कोरियन तीरंदाजों ने अपने 6 तीरों में से 4 बार 8 का स्कोर किया. दूसरी तरफ, भारत ने अपना सधा हुआ खेल जारी रखा. उन्होंने 55 का स्कोर बनाकर मैच में बढ़त ले ली.

चौथे सेट में दक्षिण कोरिया ने 54 का स्कोर किया. अब गोल्ड जीतने के लिए भारत को यह सेट सिर्फ टाई कराना था. यानी 54 का ही स्कोर बनाना था. कीर्ति के तीर को शुरुआत में 8 पॉइंट्स दिए गए. लेकिन, रिव्यू के बाद इसे अपग्रेड करके 9 कर दिया गया. इसके साथ ही भारत का स्कोर भी 54 पहुंच गया. सेट टाई रहा और भारतीय टीम की झोली में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल आ गया.

मेंस और मिक्स्ड टीम ने जीता सिल्वर

इसके बाद, रिकर्व तीरंदाजी में भारतीय मेंस टीम ने भी कमाल का प्रदर्शन किया. फाइनल में जगह बनाकर धीरज बोम्मादेवरा, यशदीप भोगे और नीरज चौहान की भारतीय तिकड़ी ने साउथ कोरिया का कड़ी टक्कर दी. लेकिन, वो 1-5 के स्कोर से हार गए. इसके कारण मेंस टीम को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा.

शुरुआत में भारतीय तिकड़ी ने लीड बना ली थी. लेकिन, बाद में उसे कायम रखने में सफल नहीं हो सके. भारत ने इससे पहले सेमीफाइनल में ईरान को 6-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी.

वहीं, मिक्स्ड रिकर्व टीम को भी सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. कुमकुम मोहोद और धीरज बोम्मादेवरा की जोड़ी को चीन के हाथों रोमांचक फाइनल में 3-5 से हार का सामना करना पड़ा. इससे पहले, उन्होंने जापानी जोड़ी को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी. 

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