साल 2017 में ऋषभ पंत ने ये बात अजय जडेजा से बोली थी. दरअसल हुआ ये कि जडेजा दिल्ली की रणजी टीम से निकाले गए पंत को नेट सेशन के लिए आने की सलाह दे रहे थे. लेकिन पंत की सोच अलग थी. ठीक उस छोटे भाई की तरह, जिसे लगता है कि ये दुनियावाले कुछ ज्यादा ही तीन-पांच करते हैं. इनके झांसे में आने का नहीं. अपनी मर्ज़ी से चलने का और सबकुछ कुचलकर रख देने का. फिर लोग चाहे जो कहें. ऋषभ पंत ऐसे ही छोटे भाई हैं. अपनी लापरवाह बैटिंग के चलते उन्हें T20 और वनडे टीम से बाहर कर दिया गया. टेस्ट टीम में भी वह ऋद्धिमान साहा के बैकअप बनकर गए, क्योंकि टूर लंबा था. उनकी कीपिंग पर पहले से सवाल थे और अब बैटिंग की भी आलोचना होने लगी थी. लेकिन पंत ने अपना तरीका नहीं बदला. इतनी आलोचना के बाद भी पंत बैटिंग करने आए, तो पहली बॉल से उनके आउट होने तक, हर गेंद पर पूरे भारत का कलेजा मुंह तक आता-जाता रहा. सब मानते हैं कि पंत बहुत बड़े मैचविनर हैं. लेकिन वह जब तक मैच जिता ना दें, किसी को भरोसा नहीं हो पाता. लेकिन ये अनिश्चितता ही पंत के खेल की खूबी है. # कमाल के Pant सिडनी टेस्ट में उनके क्रीज़ पर आने तक किसी ने जीत के बारे में नहीं सोचा था. पंत आए, 118 गेदों पर 97 रन कूट दिए. भारत को जीत दिखने लगी. इतनी साफ दिखने लगी कि बाद में टेस्ट ड्रॉ होने पर भारत के एक Lawmaker (फैशनेबल शब्द है, सांसद जी के लिए) ने ट्वीट किया,'जब जरूरत पड़ेगी ये घर से बुलाएंगे'
'7 रन बनाने के लिए 109 गेंदें खेलना! यह बेहद नृशंस है. हनुमा बिहारी ने ना सिर्फ भारत की ऐतिहासिक जीत की संभावनाओं को खत्म किया, बल्कि उन्होंने क्रिकेट का भी मर्डर कर दिया है. अपरोक्ष रूप से भी जीतने का विकल्प ही ना रखना, आपराधिक है. PS: मैं जानता हूं कि मुझे क्रिकेट के बारे में कुछ नहीं पता.'पंत का ये जलवा ऑस्ट्रेलिया में था. टेस्ट मैच की चौथी पारी में. वही चौथी पारी जहां बड़े-बड़े दिग्गज भी टें बोल जाते हैं. उस चौथी पारी में पंत का प्रति डिस्मिसल ऐवरेज 79.50 का है. यानी चौथी पारी में आउट होने से पहले पंत लगभग 80 रन बनाते हैं. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 300 या उससे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की पूरी लिस्ट देखें तो इस मामले में पंत से बेहतर बस ब्रूस माइकल और जेफरी स्टोलमेयर हैं. और इन दोनों ने अपने आखिरी टेस्ट 1949 और 1955 में खेले थे. पहले का जाने दीजिए, इनकी रिटायरमेंट के बाद के साल जोड़ लीजिए और सोचिए इन सालों में कितने महान विकेटकीपर... सॉरी, प्रॉपर बल्लेबाज आए, खेले और रिटायर हो गए. लेकिन कोई भी टेस्ट की चौथी पारी में, जब पिच टूट रही होती है, दबाव चरम पर होता है... पंत की तरह विकेट पर टिकने का जज़्बा नहीं दिखा पाया. मजेदार बात ये है कि उनके ये स्टैट्स पंत की लापरवाह छवि से एकदम उलट है. पंत के खेलने का अविश्वनीय तरीका उन्हें सबसे अलग बनाता है. # Natural Attacker Pant पंत डिफेंड करते हैं तो लगता है कि कोई कनपटी पर कट्टा रखकर जबरदस्ती करा रहा हो. लेकिन जब वो बल्ला लेकर गेंद पर कूदते हैं तो यह एकदम नॉर्मल लगता है. और ये वाली जो चीज है वो आसानी से नहीं मिलती. पंत से पहले भारत के लिए 15 या उससे ज्यादा टेस्ट खेले विकेटकीपर्स की बात करें तो इस लिस्ट की शुरुआत नरेन तम्हाने से होती है. नरेन तम्हाने. भारत के लिए 15 या उससे ज्यादा टेस्ट खेलने वाले पहले विकेटकीपर. 21 टेस्ट खेले तम्हाने का टेस्ट ऐवरेज 10.22 का है. क्रिकेटप्रेमी इस देश के ज्यादातर लोग उन्हें उस सेलेक्शन कमिटी के मेंबर के रूप में जानते हैं, जिसने सचिन तेंडुलकर को पहली बार फर्स्ट क्लास और टेस्ट मैचों के लिए चुना. तम्हाने के बाद इस लिस्ट में बुधी कुंदरन, फारुख इंजिनियर, सैयद किरमानी, किरण मोरे, नयन मोंगिया, पार्थिव पटेल, दिनेश कार्तिक, महेंद्र सिंह धोनी, ऋद्धिमान साहा का नाम आता है. इन तमाम विकेटकीपर्स में सबसे बेहतर टेस्ट ऐवरेज महेंद्र सिंह धोनी का है. धोनी ने टेस्ट में 38 की ऐवरेज से रन बनाए थे. ऋषभ का टेस्ट ऐवरेज 48 का है. यूं तो टेस्ट में स्ट्राइक रेट का बहुत महत्व नहीं है. लेकिन जस्ट टू मेक थिंग्स क्लियर, ऋषभ का टेस्ट स्ट्राइक रेट 68.90 का है. बोले तो हर 100 गेंद पर 69 रन. मल्लब किसी का ख़ौफ नहीं. पंत इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सेंचुरी मारने वाले पहले और इकलौते भारतीय विकेटकीपर हैं. पंत की कीपिंग पर अक्सर सवाल उठते हैं. रिकी पॉन्टिंग ने हाल ही में दावा किया था कि वह अपने डेब्यू के बाद से ही सबसे घटिया विकेटकीपर हैं. ये बात सच भी थी. पंत अपने डेब्यू के बाद से सबसे ज्यादा कैच गिराने वालों की लिस्ट में टॉप पर हैं. लेकिन यहां पर आपको एक बात और जाननी चाहिए
























