इससे पहले इंडिया ने एडिलेड टेस्ट जीता. पर्थ वाला मैच हारे. मेलबर्न में तीसरा टेस्ट हुआ. दोनों ही मैचों में एक दिक्कत जो टीम इंडिया पर सबसे ज्यादा भारी पड़ी वो थी सलामी जोड़ी का फ्लॉप शो. दोनों ही मैचों मे ओपनिंग करने आए केएल राहुल और मुरली विजय अच्छी शुरुआत नहीं दे सके थे. फिर तीसरे मैच से पहले टीम की घोषणा हुई तो दोनों ओपनरों की छुट्टी हो गई. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में छाए हुए मयंक अग्रवाल के साथ हनुमा विहारी के ओपनिंग करने की बात कही गई. और ये फैसला एकदम सही साबित हुआ. दोनों के बीच पहले विकेट के लिए भले 40 रनों की पार्टनरशिप हुई. मगर पहला विकेट गिरा 19वें ओवर में. माने नई गेंद का डर खत्म होने के बाद. यहां हनुमा विहारी ने ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों के खूब छकाया. 66 बॉलों पर 8 रन बनाए.
और अब बात करते हैं हीरो ऑफ द डे की. मयंक अग्रवाल की. बंदा आते ही छा गया है. बड़े दिनों से ओपनिंग में पड़े सूखे को मिटा दिया है. टेस्ट क्रिकेट में भारत की तरफ से खेले पहले ही मैच में मयंक ने पचासा जड़ दिया है. बता दिया है कि फर्स्ट क्लास में उनका 49.98 का एवरेज ऐसे ही नहीं है. यू ही नहीं उनको फर्स्ट क्लास का वीरेंद्र सहवाग कहा जाता है. मयंक इस इनिंग में अब तक 65 रन बना चुके हैं. 141 गेंदें खेलकर. टीम इंडिया का स्कोर भी 100 प्लस माने 112 रन हो गया है. एक विकेट खोकर. इसके लिए मयंक बाबा की जय हो कहना चाहिए. वरना तो अब तक 2 विकेट कंपलसरी से लगने लगे थे.

मयंक सहवाग को प्रेरणा का स्रोत बताते हैं. वैसे वो कई खिलाड़ियां के मुरीद हैं.
करारा जवाब दिया है
अब मयंक के बारे में आगे कुछ बताने से पहले आपको मैच शुरू होने के वक्त का एक वाकया बताते हैं. मयंक जब सुबह बैटिंग करने आए तो टीवी पर ऑस्ट्रेलिया के कमेंटेटर उनकी मौज ले रहे थे. कह रहे थे कि मयंक ने अपनी ट्रिपल सेंचुरी रेलवे किचन स्टाफ के खिलाफ मारी थी. रणजी ट्रॉफी का भी मजाक उड़ा रहे थे. और अब मौज ली है मयंक ने. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले ही मैच में पचासा जड़के. बता दिया कि रेलवे का किचन स्टाफ हो या ऑस्ट्रेलिया की इंटरनैशनल टीम. बंदा सबको एक ही तराजू से तौलता है. कोई भेदभाव नहीं.
और क्या कमाल किए मयंक ने
# मयंक अग्रवाल इस पचासे के साथ दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं जिसने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टेस्ट डेब्यू करते हुए पचासा मारा है. पहले भारतीय बल्लेबाज थे दत्तू फाड़कर जिन्होंने एससीजी के मैदान में दिसंबर 1947 में 51 रन बनाए थे.

मयंक फर्स्ट क्लास के सहवाग माने जाते हैं.
# मयंक इस हाफ सेंचुरी के साथ ही ऑस्ट्रेलिया में डेब्यू करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए हैं. सबके मन में अब यही आ रहा होगा कि लड़का सेंचुरी और मार दे तो बस दिन बन जाए. पैसा वसूल हो जाए...
मयंक की हिस्ट्री भी जान लीजिए
मयंक बचपन से ही क्रिकेट खेल रहे हैं. बेंगलुरु के बिशप कॉटन बॉयज़ स्कूल में पढ़ाई करते वक्त ही वे अंडर-13 टीम में आ गए थे. जब मयंक 15 साल के हुए तो उनको मॉडर्न क्रिकेट क्लब ने एक लीग गेम के लिए सेलेक्ट किया. इससे वो इतना जुशिया गए कि दौड़ते वक्त एक बिजली के खंभे से भिड़ गए. आंख में चोट आ गई. इसके बावजूद वो अगले दिन खेले और 150 रन ठोक दिए. सबको पता चल गया कि लड़का स्पेशल है.मयंक शुरुआत से ही विस्फोटक किस्म के बैट्समैन रहे हैं. वही सहवाग स्टाइल. इसीलिए उन्हें थोड़ा शांत बनाने के लिए उनके पिता अनुराग अग्रवाल ने उनको विपश्यना यानि मेडिटेशन की क्लास भी जॉइन करवाई थी. और ये अग्रवाल के बहुत काम आई.इसके बाद मयंक अंडर-19 खेले और यहां भी चले. 2008-09 की अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी में भी तगड़ा खेले. फिर 2010 में ICC अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम में उनका सेलेक्शन हुआ. उस वर्ल्ड कप में मयंक ने इंडिया की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाए और सबकी नजरों में आ गए. फिर वो कर्नाटक की टीम से रणजी और फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलते रहे. मयंक इंडिया-ए का भी हिस्सा बने, जिसे राहुल द्रविड़ कोचिंग देते हैं. राहुल ने मयंंक के खेल को और बेहतर बनाने में काफी मदद की.

RCB के दिनों की मयंक की एक तस्वीर
फिर IPL में तो लड़का छाया ही रहता है. 2011 से 2013 के बीच रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेले. 2014 से 2016 तक दिल्ली डेयरडेविल्स में रहे और 2017 में राइज़िंग पुणे सुपरजाइंट्स में थे. 2015 में इस तरह की खबरें थीं कि मयंक को इंडिया की टी-20 टीम में जगह मिल सकती है. हालांकि, ऐसा खुलकर किसी ने नहीं कहा था. फिर मयंक को तो नहीं, लेकिन मनीष पांडेय को ज़रूर टी-20 टीम में जगह मिल गई. फिर 2017-18 के रणजी सीजन में कर्नाटक की तरफ से खेलते हुए मयंक ने सबसे ज्यादा 1160 रन बनाए. आठ मैचों में. पांच शतक और 2 फिफ्टी मारी थी. एक बार फिर चला कि अब तो मयंक की जगह टीम में पक्की. मगर मयंक को एक बार फिर निराशा मिली. कुछ महीने पहले मयंक ने ये तक कह दिया था - जो भी होना है, वो होगा ही...
और तीसरे टेस्ट में जो हुआ, उससे अच्छा क्या हो सकता है...
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