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फ़ील्डिंग टीम की मदद करने पर आउट दिए जाने का फ़ैसला नियमों के मुताबिक सही था

ये रहा वो नियम.

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गेंद उठाते हुए पिल्लै (बाएं), गेंद कीपर को देते हुए पिल्लै (बीच में) और विकेटकीपर की अपील के बाद पिल्लै (दाएं)

17 जनवरी को अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका और वेस्ट इंडीज के बीच मैच चल रहा था. अफ्रीकी टीम 77 के स्कोर पर 2 विकेट खोकर खेल रही थी. जिवेशन पिल्लै 47 के स्कोर पर खेल रहे थे. उन्हें एक गेंद फेंकी गई. पिल्लै ने खेली, लेकिन गेंद स्टंप्स के पास गिरकर वहीं घूमने लगी. पिल्लै ने पहले बल्ले से अपनी स्टंप्स बचाईं और फिर गेंद उठाकर विकेटकीपर को दे दी. विकेटकीपर इमैनुअल स्टूअर्ट ने मामूली सी अपील की. किसी को नहीं पता चला कि अंपायर अचानक क्या डिस्कस करने लगे. और फिर थर्ड अंपायर ने पिल्लै को आउट दे दिया.

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देखिए क्या हुआ था मैदान पर


फिर पता चला कि पिल्लै को फील्डिंग में बाधा पहुंचाने के लिए आउट दिया गया. लेकिन इस पूरे वाकये से अफ्रीका के सारे प्लेयर्स और यहां तक कि कमेंटेटर्स भी हैरान थे. पर क्या आपको पता है कि ICC का ये कौन सा नियम है, जिसके तहत किसी बैट्समैन को इस तरह आउट दिया जा सकता है. आइए बताते हैं.

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ICC के नियम 37.4 के मुताबिक अगर फील्डिंग टीम या/और उसका कप्तान खेल के दौरान ये शिकायत करता है कि बैट्समैन ने फील्डर की मर्ज़ी के खिलाफ बल्ले या अपने शरीर से गेंद उस फील्डर तक पहुंचाई, तो इस अपील पर बैट्समैन को आउट दे दिया जाएगा. पिल्लै के साथ यही हुआ.


स्टंप बचाने के बाद गेंद उठाते पिल्लै
स्टंप बचाने के बाद गेंद उठाते पिल्लै

उन्होंने वेस्ट इंडीज़ के किसी भी फील्डर से गेंद उठाने की इजाज़त नहीं ली थी. उन्हें आउट दिए जाने के बाद मैदान पर मौजूद अंपायर्स ने विकेटकीपर से पूछा भी कि क्या उसने बैट्समैन से बॉल उठाने या फेंकने के लिए कहा था, तो विकेटकीपर का जवाब 'न' में था. इस लिहाज़ से विंडीज़ टीम अपील करने की पूरी हकदार थी.

मैदान पर कई बार ऐसा होता है कि बैट्समैन अपने पैरों के पास पड़ी गेंद उठाकर कीपर, बॉलर या फील्डर को दे देता है. आमतौर पर टीमें इसके खिलाफ अपील नहीं करती हैं, लेकिन अगर करें, तो निश्चित तौर पर बैट्समैन को आउट दे दिया जाएगा.

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पिल्लै के आउट होने के बाद उनके और विंडीज़ खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस हुई थी
पिल्लै के आउट होने के बाद उनके और विंडीज़ खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस हुई थी

पर ये नियम इतना सख्त क्यों है? क्यों एक बल्लेबाज़ को मदद करने के एवज में सजा मिले?

जवाब ये है कि गेंद की सतह चमड़े की होती है. एक गलत खुरचन, एक गलत चोट उसकी कंडीशन बदल सकती है, जिसका असर पूरे मैच पर पड़ सकता है. मान लीजिए आपके हाथ बहुत गीले हैं. आप गीले हाथों से गेंद छूते हैं, तो इसका असर गेंद पर पड़ेगा. बैटिंग करते वक्त खिलाड़ियों के दस्ताने पसीने से भीग सकते हैं (इसीलिए बल्ला भांजते वक्त धोनी का बल्ला छूटकर दूर जा गिरता था). उन भीगे दस्तानों से बॉल उठाने पर फील्डिंग टीम का कप्तान नाराज़गी जता सकता है. इसी नाराज़गी के चलते पिल्लै को आउट दिया गया.

क्रिकेट के नियम बनाते वक्त एक बात कही गई थी- बल्लेबाज बल्लेबाजी करे, गेंदबाज गेंदबाजी और फील्डर्स को फील्डिंग करने दिया जाए. इसके बाद दो नियम और आते हैं. एक है अंपायरों के लिए, जो कहता है कि अगर फील्डिंग साइड अपील करती है, तो भावना छोड़कर नियम पर जाना ही पड़ेगा. 31.1 नियम कहता है कि कोई अंपायर किसी खिलाड़ी को तब तक आउट नहीं दे सकता, जब तक अपील न की जाए. एक आप अपील हो गई, तो तीर छूटा समझो.


क्रिकेट की गेंदें
क्रिकेट की गेंदें

दूसरा नियम 31.8 कहता है कि फील्डिंग टीम का कप्तान चाहे, तो अपनी अपील वापस भी ले सकता है. लेकिन इसके लिए उसे अंपायर को टाइम पर इत्तला करना होगा और अपनी बात समझानी होगी. अगर अंपायर को वाजिब लगा, तो अंपायर बैट्समैन को वापस बुला लेगा. लेकिन ये सब समय के अंदर हो जाना चाहिए. अगली गेंद फेंके जाने से पहले.

वैसे इन सभी बातों-नियमों के बाद भी यही कहा जाएगा कि पिल्लै ने नासमझी से काम लिया. उन्हें गेंद उठाने से पहले बस एक इशारा भर कर देना चाहिए था. फिर वो आउट होने से बच जाते. इस मामले में कई दिग्गज क्रिकेटर्स ने अपनी राय रखी है. कुछ का कहना है कि उन्होंने कई बार ऐसा किया, जबकि उन्हें आउट नहीं दिया गया. कुछ का कहना है कि ऐसे नियम को खत्म कर दिया जाना चाहिए.

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