चलिए, अब सीधे आपको बताते हैं कि वो चार मैच कौन-कौन से हैं. उनमें ऐसा क्या हुआ कि क्रिकेट फैंस उन्हें बदलना चाहते हैं.
1. 1996 वर्ल्डकप सेमीफाइनल
साल 1996 में पहली बार इंडिया, पाकिस्तान, श्रीलंका ने मिलकर वर्ल्डकप होस्ट किया. दो ग्रुप में टीमों को बांटा गया. होस्ट नेशन में से पाकिस्तान को छोड़कर इंडिया और श्रीलंका सेमीफाइनल तक पहुंचे. लेकिन भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए उस ऐतिहासक सेमीफाइनल का अंत उतना शानदार नहीं रहा. 13 मार्च, 1996 का वो दिन था, जब कोलकाता के ईडन गार्डन्स में पहला सेमीफाइनल मुकाबला हो रहा था.
श्रीलंका ने अरविंद डी सिल्वा के 66 और महानमा के 58 रनों के बूते 251/8 का स्कोर खड़ा कर लिया. जवाब में भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही. नवजोत सिंह सिद्धू 8 रन के स्कोर पर आउट हो गए. मगर सचिन तेंडुलकर ने संजय मांजरेकर के साथ मिलकर स्कोर को 98 तक पहुंचा दिया. तेंडुलकर ने 65 रन बनाए. स्कोर 98/2 हो गया. इसके बाद भारतीय बल्लेबाजों के विकेट ऐसे गिरे, जैसे गली क्रिकेट में गिरते हैं. 99/3 (मो. अजहरुद्दीन 0), 101/4 (संजय मांजरेकर 25), 110/5 (जवागल श्रीनाथ 6), 115/6 (अजय जडेजा 0), 120/7 (नयन मोंगिया 1), 120/8 (आशीष कपूर 0). 98/1 से लेकर 120/8 तक यकीन कर पाना बेहद मुश्किल है.

1996 ईडन गार्डेन्स.
मैदान पर टीम का ऐसा प्रदर्शन देख फैंस मैदान पर हिंसक हो गए. स्टेडियम में आग लगा दी. बोतलें, जूते-चप्पल और जो भी हाथ में आया मैदान में फेंक दिया. मैच रैफरी क्लाइव लॉयड ने तुरंत मैदान में पहुंचकर मैच रोक दिया और श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया गया. विनोद कांबली रोते हुए मैदान से बाहर जा रहे थे. वो तस्वीर भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे अझेल तस्वीरों में से एक है.
2. 1999 विश्वकप सेमीफाइनल
हाथ तो आया, पर मुंह न लगा वाला किस्सा साउथ अफ्रीकन टीम के लिए ही बना है. आईसीसी के नॉक-आउट मुकाबलों में ऐसे कितने ही मौके आए, जब साउथ अफ्रीका जीती हुई बाज़ी हार गया. साल 1999 में विश्वकप सेमीफाइनल में जीत के एकदम करीब पहुंचा साउथ अफ्रीका एक रन बनाने से चूका और टूर्नामेंट से बाहर हो गया.
मैच में ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवरों में 213 रन बनाए. जवाब में साउथ अफ्रीका की टीम 49.2 ओवर में ही 213 रन बना चुकी. स्ट्राइक पर है वो बल्लेबाज़, जिसने आखिरी ओवर की पहली दोनों गेंदों को चार रनों के लिए भेजकर ये सुनिश्चित किया है कि इस बार वो अपनी टीम पर लगे चोकर्स के दाग को धो देगा. लेकिन तीसरी गेंद से पहले सारे फील्डर आगे आ गए हैं. ऑस्ट्रेलियंस अपनी दबाव बनाने वाली रणनीति के साथ खड़े हैं. तीसरी गेंद पर क्लूज़नर ने सीधा शॉट खेला. लेकिन लीमेन ने फुर्ती से गेंद को वापस फेंक दिया. रन नहीं आया. ओवर की चौथी गेंद. क्लूज़नर इस बार शॉट खेलते ही दौड़ पड़े. लेकिन ये क्या, डोनाल्ड नहीं हिले. वो गेंद को देखते रह गए. दोनों बल्लेबाज़ों में तालमेल की कमी. अब दोनों एक ही छोर पर खड़े हैं. डोनाल्ड के हाथ से बल्ला भी छूट गया. थ्रो सीधे गिलक्रिस्ट के हाथों में और 213 रनों पर साउथ अफ्रीका ऑल-आउट.
सुपरसिक्स में बेहतर रन-रेट के आधार पर ऑस्ट्रेलिया फाइनल में पहुंच गया. एक वो दिन है, एक आज का दिन है. साउथ अफ्रीका कभी भी विश्वकप फाइनल नहीं जीत पाया है.
3. 2003 वर्ल्डकप फाइनल
2003 विश्वकप वो साल था, जब लगा कि अब 20 साल बाद फिर से विश्वकप जीत सकते हैं. सौरव गांगुली की टीम धमाकेदार अंदाज़ में फाइनल में पहुंची थी. सचिन से सौरव, ज़हीर, द्रविड़ सब शानदार खेल रहे थे. लेकिन फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने वो सपना सिर्फ तोड़ा ही नहीं, पैरों के नीचे कुचल दिया था.
ये विश्वकप फाइनल जोहान्सबर्ग में खेला गया. गांगुली ने टॉस जीतकर कुछ वैसी ही गलती की, जैसी 1996 में अज़हर ने की थी. विरोधियों को पहले खिलाने बुला लिया. वो भी ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को. बस फिर क्या था. शुरुआती 14 ओवरों में ही ज़हीर, श्रीनाथ, नेहरा को ऐसी मार पड़ी कि फिर सबकुछ हाथ से जाता दिखने लगे. पहले विकेट के लिए गिलक्रिस्ट ने गिलक्रिस्ट ने हेडन के साथ 104 रन जोड़ दिए. इसके बाद शुरू हुआ असली खेल. रिकी पोन्टिंग खेलने उतरे. उन्होंने उस दिन अपने क्रिकेटिंग करियर की सबसे बेहतरीन पारी (140 रन) खेली और टीम को 359 रनों का स्कोर दे दिया.

सचिन तेंडुलकर की फाइल फोटो: Getty Images
जवाब में इंडियन फैंस की सारी उम्मीदें सिर्फ और सिर्फ सचिन तेंडुलकर पर थी, क्योंकि हर्षा भोगले ने भी मैच से पहले एक बात कही थी कि ''वर्ल्ड कप और ऑस्ट्रेलिया के बीच में खड़े हैं सचिन.''
लेकिन भारत की पारी शुरू होते ही मैक्ग्रा ने पहले ही ओवर में उस बीच की दीवार को ढहा दिया. सचिन आउट और फिर देखते ही देखते भारत 39.2 ओवरों में 234 रन बनाकर ऑल-आउट हो गया.
4. 2019 वर्ल्डकप सेमीफाइनल
2019 विश्वकप के लिए जब टीम इंग्लैंड पहुंची, तो पहली बार वो विश्वास था कि इस वक्त इससे बेहतर टीम वर्ल्ड क्रिकेट में नहीं है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया थोड़ी कमज़ोर हुई थी. टीम इंडिया खेली भी बिल्कुल वैसा ही. नौ मैचों में सिर्फ एक मैच गंवाया और पॉइंट्स टेबल में टॉप पर पहुंच गई. लग रहा था इस बार विश्वकप फिर से अपने घर ही आएगा.
लेकिन न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पहले सेमीफाइनल में सबकुछ खत्म हो गया. न्यूज़ीलैंड की टीम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग चुनी. गेंदबाज़ों ने इस बार वो काम कर दिया, जो 2003 के फाइनल में नहीं हुआ था. किवी टीम को सिर्फ 239 रनों पर रोक दिया.
वो भारतीय टीम जो टूर्नामेंट में 300 के स्कोर को आराम से छू रही थी. उसके लिए ये स्कोर कुछ भी नहीं था. लेकिन मैच के बीच में बारिश और एक दिन में मैच नहीं खत्म हो पाना इंडिया को ले डूबा. पहले दिन का मोमेंटम दूसरे दिन टीम इंडिया के साथ नहीं दिखा. भारतीय टीम ने बल्ले से इतनी खराब शुरुआत की, जो टूर्नामेंट में पहले नहीं दिखी.
4 रन पर रोहित, 5 रन पर विराट, 5 रन पर केएल राहुल, 24 पर दिनेश कार्तिक और 71 तक ऋषभ पंत भी आउट हो गए. पांच विकेट जल्दी-जल्दी गिर गए. 92 के स्कोर तक हार्दिक पांड्या भी लौट चुके थे, लेकिन अब भी धोनी के रूप में आखिरी उम्मीद बाकी थी. उनका साथ दे रहे थे रवीन्द्र जडेजा. दोनों ने धीरे-धीरे पारी को आगे बढ़ाया और 208 रन तक स्कोर को खींचकर ले गए. अब लगने लगा था कि जीत पर हम हावी हो रहे हैं. लेकिन जडेजा (77 रन) को ट्रेंट बोल्ड ने आउट कर दिया. उनके आउट होने के बाद भी धोनी अभी बाकी थे.

World Cup Semifinal में New Zealand के खिलाफ रनआउट हो गए थे MS Dhoni
लेकिन 49वें ओवर में गुप्टिल की एक थ्रो ने सारी उम्मीदें खत्म कर दीं. लाख कोशिश के बावजूद भारतीय टीम 18 रनों से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई. वो तस्वीर भारतीय क्रिकेट की सबसे दर्दनाक तस्वीरों में से एक है.
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