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बरगद के नीचे पौधे नहीं पनपते, फिर रजत पाटीदार कैसे निखर गए?

क्रिकेट में कहावत है कि Virat Kohli जैसे 'बरगद' के साए में युवा खिलाड़ी दब जाते हैं, लेकिन Rajat Patidar ने इस मिथक को तोड़ दिया है. जानिए RCB के इस संकटमोचक की पूरी कहानी.

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रजत पाटीदार ने गुजरात टाइटंस के ख‍िलाफ पहले क्वालिफायर में 33 बॉल्स में 93 रन बनाई. (फोटो-PTI)

बरगद के नीचे कभी पौधे नहीं पनपते. ये हिंदी की बहुत ही मशहूर कहावत है. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु में ‘वटवृक्ष’ के नीचे एक पौधा पनपा भी. 5 साल में एक पेड़ बनने की राह पर है. 2021 के मिनी ऑक्शन में RCB ने मध्य प्रदेश के एक यंग्सटर को बेस प्राइस पर उठा लिया. नाम तो आप समझ गए होंगे. टीम के वर्तमान कप्तान रजत पाटीदार (Rajat Patidar).

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IPL में करियर की शुरुआत

पहले साल 4 मैच मिले. 71 रन बल्ले से निकले. टॉप स्कोर रहा 31 रन. दिग्गजों से लैस RCB ड्रेसिंग रूम में रजत कोई खास छाप नहीं छोड़ सके. नतीजा उन्हें टीम ने रिलीज कर दिया. फिर आया साल 2022. ये मेगा ऑक्शन का साल था. 10 टीमें IPL में उतर रही थीं. लेकिन, किसी ने रजत पर ध्यान ही नहीं दिया. 2022 के मेगा ऑक्शन में ये ख‍िलाड़ी अनसोल्ड रहा.

जिंदगी भी कमाल है. रजत के लिए ये हार्टब्रेकिंग साल होता. लेकिन, समय कब करवट ले ले पता नहीं होता. RCB को एक बड़ा झटका लगा. टीम के मिडिल ऑर्डर बैटर लवनीत सिसोदिया चोटिल हो गए. रजत को टीम ने रिप्लेसमेंट ऑफर की. वो श्योर नहीं थे. फैमिली ने पुश किया तो ऑफर स्वीकार कर लिया. ये उनके लिए लाइफ चेंजिंग अवसर होने वाला था.

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2022 में भले ही वो फर्स्ट चॉइस प्लेयर नहीं थे. पिछले सीजन के मुकाबले उन्हें दोगुना मौके मिले. माने 8 मैच वो RCB के मिडिल ऑर्डर में खेले. रजत के लिए ये 8 मैच गेम चेंजर साबित हुए. 55.50 का औसत.152.75 का स्ट्राइक रेट. रजत टीम के नए हीरो बन गए. असली कमाल IPL 2022 के एलिमिनेटर मुकाबले में दिखा.

लखनऊ सुपर जायंट्स के ख‍िलाफ रजत ने महज 49 बॉल्स में सेंचुरी ठोक दी. उन्होंने नाबाद 112 रन बनाए. टीम ने मैच जीता. रजत ने फ्रेंचाइजी का भरोसा. हालांकि, जीवन इतना आसान कहां होता है. साल 2023 में सबकी नज़रें रजत पर होतीं. लेकिन, रजत के लिए ये साल इंजरी का रहा. एकिलीज़ हील्स के कारण रजत पूरा सीजन बाहर रहे. टीम का प्रदर्शन भी निराशाजनक ही रहा.

2024 रहा करियर डिफाइनिंग साल

फिर आया साल 2024. रजत पाटीदार के लिए ये करियर डिफाइनिंग साल था. शुरुआती 7 में से टीम 6 मुकाबले हार गई. लेकिन, फिर टीम ने लय पकड़ी. अगले 7 के 7 मुकाबले जीत लिए. टीम प्लेऑफ में भी पहुंच गई. इस सीजन रजत ने 30.38 के औसत से 395 रन बनाए. उनकी बैटिंग में एक बात खास दिखी. उनका स्ट्राइक रेट. 177.13 के स्ट्राइक रेट से रजत ने बॉलर्स की धुनाई की.

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वैसे आंकड़ों के मामले में साल 2025 औसत ही रहा. लेकिन, रजत ने वो कर दिखाया जो RCB के लिए विराट कोहली भी नहीं कर सके. न ही अनिल कुंबले. न राहुल द्रविड़ और न ही फाफ डुप्लेसी. 18 साल में पहली बार RCB चैंपियन बनी. कप्तान थे रजत पाटीदार. बतौर लीडर रजत का ये पहला सीजन था. इससे क्या ही फर्क पड़ता है. अगर आपके हाथ में वो चमचमाती ट्रॉफी हो.

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वटवृक्ष विराट की छांव में रजत निखर गए. बतौर कप्तान दूसरे सीजन में वो नज़र आने लगा है. उनका माइंडसेट उनके स्ट्राइक रेट में नज़र आ रहा है. 14 मुकाबलों में इस सीजन रजत 486 रन बना चुके हैं. वो भी 196.76 के स्ट्राइक रेट से. भले ही पूरी टीम दबाव में बिखर रही हो. उनका कप्तान हाथ में बल्ला लिए एक छोर पर डटा होता है. सबसे कमाल की बात तो ये कि लगातार दूसरी बार उनकी अगुवाई में टीम फाइनल में पहुंच चुकी है.

इसकी पटकथा भी खुद रजत ने पहले क्वालिफायर में अपने बल्ले से लिखी है. महज 33 गेंदों में रजत ने नाबाद 93 रन ठोक दिए. गेंदें बची होतीं तो रजत प्लेऑफ में एक और सेंचुरी से सिर्फ दो बाउंड्री ही दूर थे. धर्मशाला में पाटीदार नाम का जो तूफान उठा वो टाइटंस को हवा में उड़ा ले गया. एक पौघा जो पिछले सीजन वटवृक्ष की छांव में था. अब खुद एक पेड़ बन चुका है.

आंकड़े पूरा सच नहीं बताते

दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग में रजत की ये जर्नी भले ही सहज लगे. लेकिन, ये बहुत ज्यादा खास है. उनके आंकड़ों को देखकर यही लगेगा कि 33.98 के औसत वाला ये प्लेयर खास कैसे हो गया? लेकिन, कई बार आंकड़े पूरा सच नहीं बताते. क्रिकेट की दुनिया में कई माइलस्टोन्स सेंचुरी और हाफ सेंचुरी के तराजू पर नहीं तौले जाते. ये रजत पाटीदार के केस में भी लागू होता है.

हो सकता है आने वाले 10 साल में लोग पाटीदार को उनके आंकड़ों के लिए याद न करें. लेकिन, जो रजत ने RCB के लिए किया है वो बड़े-बड़े दिग्गज कप्तान भी नहीं कर सके. IPL इतिहास में बतौर कप्तान पहले साल में ही ट्रॉफी की लिस्ट बहुत बड़ी नहीं है. अब तक सिर्फ 4 कप्तान हुए, जिन्होंने ये कारनामा किया है.

2008 में शेन वॉर्न. 2013 में रोहित शर्मा. 2022 में हार्दिक पंड्या और 2025 में रजत पाटीदार. वैसे तो इस लिस्ट में श्रेयस अय्यर भी हैं, क्योंकि 2024 में वो पहली बार ही कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान थे. लेकिन, इससे पहले वो दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी कर चुके थे. लेकिन, इससे भी एक्सक्लूसिव उन कप्तानों की लिस्ट है, जिन्होंने लगातार दो सीजन अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाया हो.

महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा और श्रेयस अय्यर. लगातार दो ट्रॉफी जितने वालों में सिर्फ धोनी और रोहित हैं. धोनी ने 2010, 2011 में चेन्नई सुपरकिंग्स को चैंपियन बनाया था. रोहित ने 2019, 2020 में मुंबई इंडियंस के साथ ये इतिहास दर्ज किया था. इस लिस्ट में अब अपना नाम जुड़वाने से रजत सिर्फ एक जीत दूर हैं.

वीडियो: रजत पाटीदार ने क्वालिफायर में दिखाया बल्ले का दम, RCB पहुंची फाइनल में

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