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'कितने अनुरोध होते हैं प्रेमिका के पास हमेशा'

पढ़िए अन्ना अख़्मातोवा की कविता.

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फोटो - thelallantop
आज पढ़िए मशहूर रूसी कवयित्री अन्ना अख़्मातोवा की तीन कविताएं. इन कविताओं के अनुवाद किए हैं वरयाम सिंह ने-   

एक ही गिलास से

एक ही गिलास से हम नहीं पिएंगे न पानी, न मीठी शराब चुंबन नहीं लेंगे सुबह-सुबह सांझ में झांका नहीं करेंगे खिड़की से.

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तुममें सूर्य प्राण भरता है और मुझमें - चंद्रमा, मात्र प्रेम के बल जिंदा हैं हम दोनों.

मेरे संग हमेशा रहता है मेरा नाजुक वफादार दोस्त, तुम्हारे साथ रहती है तुम्हारी खुशमिजाज मित्र

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पर मैं अच्छी तरह समझती हूं उसकी आंखों का भय तुम्हीं हो दोषी मेरा रुग्णता के.

बढ़ा नहीं पा रहे हम छोटी-छोटी मुलाकातों का सिलसिला विवश हैं अपना अपना अमन-चैन बचाए रखने के लिए.

मेरी कविताओं में सिर्फ तुम्हारी आवाज गाती है, और तुम्हारी कविताओं में होते हैं मेरे प्राण.

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ओ, ऐसा है एक अलाव जिसे छूने का साहस कर नहीं पाता कोई भय या विस्मरण...

काश, मालूम होता तुम्हें इस क्षण कितने प्रिय हैं मुझे तुम्हारे सूखे, गुलाबी होंठ !

कितने अनुरोध

कितने अनुरोध होते हैं प्रेमिका के पास हमेशा विरक्त के तो कोई अनुरोध होते नहीं कितनी खुश हूं यह देखकर कि रंगहीन बर्फ के नीचे जम रहा है जल.

मैं पैर रखूंगी इस सफेद पतली चादर पर ओ ईशु, मेरी कुछ मदद कर !

संभाल कर रखी जाएं सारी चिट्ठियां कि अपना निर्णय दे सकें संतानें.

और अधिक स्पष्ट और अधिक रोशन तुम दीख सको उन्हें - साहसी और प्रबुद्ध

क्या तुम्हारी महान जीवनी में रखी जा सकती हैं कहीं खाली जगहें ?

बहुत मीठी है यह इहलौकिक सुरा बहुत मजबूत हैं ये प्रेमजाल. कभी तो पढ़ेंगे बच्चे अपनी पाठ्य-पुस्तकों में मेरा नाम,

और करुणाजनक कहानी पढ़ने पर वे मुस्करा देंगे तनिक चालाकी के साथ. बिना चैन, बिना प्रेम मुझे दे अजब एक कड़वी-सी ख्याति.

सान्निध्य की सीमा

सान्निध्य की भी होती है अपनी पावन सीमाएं जिनका अतिक्रमण न प्रेम कर सकता है न वासनाएं

भले ही एक हो जाएं होठ भयानक खामोशी में और प्यार में हो जाएं हृदय के टुकड़े-टुकड़े.

अशक्त पड़ जाती है मित्रता अभिजात और अग्निमय सुखों के वर्ष जब मन हो जाता है मुक्त और पराया प्रेम की धीमी थकान के लिए.

दीवाने हैं वे जिनका लक्ष्य होता है वह पा लेने वाले हो जाते हैं पराजित अवसाद से.

अब तो तुम समझ गए होंगे क्यों नहीं धड़कता है तुम्हारे हाथों के नीचे मेरा हृदय.


कुछ और कविताएं यहां पढ़िए:

‘पूछो, मां-बहनों पर यों बदमाश झपटते क्यों हैं’

‘ठोकर दे कह युग – चलता चल, युग के सर चढ़ तू चलता चल’

मैं तुम्हारे ध्यान में हूं!'

जिस तरह हम बोलते हैं उस तरह तू लिख'

‘दबा रहूंगा किसी रजिस्टर में, अपने स्थायी पते के अक्षरों के नीचे’


वीडियो देखें-  https://www.youtube.com/watch?v=Gcv71ct_HpE&t=134s

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