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दिनेश कार्तिक की वो प्रेमिका, जिसने लड़कियों के हक के लिए फेडरेशन की खटिया खड़ी कर दी!

हम आपको दीपिका पल्लीकल की कहानी सुनाने जा रहे हैं. दीपिका पल्लीकल. भारत की स्टार स्क्वैश खिलाड़ी. दीपिका की मम्मी की ट्रैवल एजेंसी से टिकट बुक कराते-कराते कार्तिक उनके घर के दामाद बन गए. लेकिन कार्तिक की पत्नी बनने से पहले भी दीपिका स्टार थीं और आज भी हैं.

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दीपिका पल्लीकल. फोटो: Dipika Instagram

दिनेश कार्तिक. आजकल खूब चर्चा में हैं. RCB  के लिए लगातार मैच फिनिश कर रहे हैं. लेकिन हाल के दिनों में कार्तिक के चर्चा में रहने की वजह सिर्फ उनकी फॉर्म नहीं है. इन दिनों कार्तिक से जुड़ी एक फेसबुक पोस्ट भी वायरल है. इस तथाकथित प्रेरक पोस्ट में कई फ़ेक चीजें भी शामिल थीं. जिनका पोस्टमार्टम हमने हाल ही में किया था.

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और जैसा कि आप जानते हैं, इस पोस्ट में कार्तिक के साथ कई अन्य कैरेक्टर भी थे. और अब हम उन्हीं में से एक, दीपिका पल्लीकल की कहानी सुनाने जा रहे हैं. दीपिका पल्लीकल. भारत की स्टार स्क्वैश खिलाड़ी. दीपिका की मम्मी की ट्रैवल एजेंसी से टिकट बुक कराते-कराते कार्तिक उनके घर के दामाद बन गए. लेकिन कार्तिक की पत्नी बनने से पहले भी दीपिका स्टार थीं और आज भी हैं.

# Dipika Pallikal Story

DK को हां कहने से पहले दीपिका भारत के लिए इतिहास रच चुकीं थी. साल 2012 में वो प्रोफेशनल स्क्वैश असोसिएशन विमिंस रैंकिंग के टॉप-10 में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी थीं. 2012 में ही उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया. लेकिन दीपिका के लिए स्क्वैश स्टार बनना इतना आसान नहीं था.

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दीपिका शुरुआत से ही सही को सही कहने वाली हिम्मती लड़की थीं. और इसका खामियाज़ा उन्होंने भुगता सिर्फ 13 साल की उम्र में. एक बार टीम में ना चुने जाने पर दीपिका ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सेलेक्टर्स के फैसले पर ही सवाल उठा दिए. दीपिका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह दिया कि उनके साथ गलत हुआ. और वो टीम में जगह डिज़र्व करती थीं. दीपिका ने ऐसा दावा इसलिए किया क्यों वो 13 साल की उम्र में देश की नंबर दो या नंबर तीन खिलाड़ी थीं. लेकिन इस बयान के बाद फेडरेशन ने उन्हें अकैडमी से भी बैन कर दिया. देश में कोई भी उन्हें ट्रेन करने के लिए तैयार नहीं हुआ.

Dipika Junior

दीपिका पल्लीकल. फोटो: Instagram

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जिसके बाद 13 साल की छोटी सी उम्र में ही दीपिका ने देश छोड़ दिया. उनके पास दूसरा कोई ऑप्शन भी तो नहीं था. वह अकेले ही मिस्र चली गईं. अब दीपिका के अंदर एक ज़िद आ चुकी थी. उन्होंने तय कर लिया कि अब अपने आलोचकों को जवाब देना है और इंडिया की नंबर वन प्लेयर बनकर दिखाना है. हुआ भी बिल्कुल ऐसा भी. मिस्र जाने के दो साल के अंदर ही वो देश की नंबर एक स्क्वैश खिलाड़ी बन गईं. साथ ही पांच साल बाद वो दुनिया की टॉप-20 स्क्वैश खिलाड़ियों में भी शामिल हो गईं.

दीपिका ने बताया कि उनकी कामयाबी देख खुद भारतीय स्क्वैश फेडरेशन ने उन्हें ईमेल्स लिखे और भारत आकर खेलने के लिए कहा.

# जब लड़ गईं दीपिका

दीपिका पल्लीकल ने 2012 में नेशनल चैम्पियनशिप में खेलने से साफ इन्कार कर दिया. इसकी वजह थी पुरुष और महिला खिलाड़ियों को मिलने वाली प्राइज़ मनी का फर्क. उस वक्त पुरुष खिलाड़ियों को लगभग डेढ़ लाख रुपये मिलते थे. जबकि महिला खिलाड़ियों को 20 से 30 हज़ार रुपये दिए जाते थे. नेशनल्स में खेलने से इनकार की वजह सिर्फ प्राइज़ मनी नहीं थी, बल्कि वो सम्मान भी था जो महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम मिलता था.

क्योंकि एक महिला खिलाड़ी भी किसी मैच में या मैच की तैयारी में पुरुष खिलाड़ी जितना ही संघर्ष करती है.

दीपिका का ये संघर्ष साल 2016 तक जारी रहा. जब तक कि स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया महिलाओं की प्राइज़ मनी को पुरुषों के बराबर करने के लिए तैयार नहीं हुआ.

#Squash Star Dipika

दीपिका ने एक इंटरव्यू में कहा था,

'जब तक आपका रैकेट बोलेगा तब तक सब सही होगा.'

दीपिका को महज़ 21 साल की उम्र में अर्जुन अवार्ड से नवाज़ा गया था. 2014 में उन्हें पद्मा श्री भी मिला. उन्होंने स्क्वैश में एक नहीं कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. साल 2011 में उन्होंने अपने तीन WISPA टाइटल्स का पहला टाइटल कैलीफॉर्निया ऑरेंज कंट्री कप जीता. ये पहला मौका था जब दीपिका ने किसी बड़े स्टेज पर अपने शानदार खेल को दिखाया.

Dipika Pallikal

दीपिका पल्लीकल. फोटो: Deepika Instagram

इसके बाद साल 2014 में दीपिका को एक बार फिर हेडलाइन्स मिली. जब ग्लासगो में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने अपनी पार्टनर जोशना चिनप्पा के साथ गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. इस मेडल के साथ दीपिका और जोशना 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स में स्क्वैश में भारत के लिए पहला मेडल लाने वाली खिलाड़ी भी बनीं.

2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ में उन्होंने फिर से दो मेडल अपने नाम किए. 2018 में दीपिका ने डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में दो सिल्वर मेडल जीते.

कॉमनवेल्थ में कमाल के बाद 2016 साउथ एशियन गेम्स में एक बार फिर दीपिका ने सबको अपने खेल का लोहा मनवाया. 2016 साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने भारतीय महिला टीम को गोल्ड मेडल जिताया. जिसके बाद उनके खेल को खूब सराहना मिली और स्क्वैश के खेल में दीपिका का कद और बढ़ गया.

एशियन गेम्स में भी दीपिका के नाम चार मेडल्स हैं. उन्होंने 2010 में टीम इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता, 2014 में टीम इवेंट में सिल्वर, वहीं सिंगल्स इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता, इसके बाद 2018 में जकार्ता में सिंगल्स इवेंट में फिर से ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.

जुड़वा बच्चों के बाद रचा इतिहास:

दीपिका की मैदान पर वापसी भी कमाल है. साल 2018 के अक्टूबर महीने के बाद पहली बार दीपिका ने 2022 में मैदान पर वापसी की. ये वापसी और भी खास इसलिए हो जाती है क्योंकि उन्होंने सिर्फ छह महीने पहले अपने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था.

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दिनेश कार्तिक और दीपिका पल्लीकल. फोटो: Deepika Instagram

दीपिका ने वर्ल्ड डबल चैम्पियनशिप से मैदान पर वापसी की. इस टूर्नामेंट में उन्होंने सौरव घोषाल और जोशना चिनप्पा के साथ जोड़ी बनाई और मिक्स्ड डबल्स और विमिंस डबल्स का गोल्ड जीत इतिहास रच दिया. वर्ल्ड डबल चैम्पियनशिप में दीपिका ने दो गोल्ड के साथ कुल पांच मेडल्स जीते हैं.

इतने संघर्ष और सफलताओं के बाद भी दीपिका को ज्यादातर लोग दिनेश कार्तिक की बीवी के रूप में ही जानते हैं. और अक्सर अपनी कम अक्ल का परिचय देते हुए उनकी तमाम उपलब्धियां भुला देते हैं. लेकिन हमें उम्मीद है कि इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप ऐसा नहीं करेंगे.

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