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RTI कानून से बाहर है BCCI, CIC ने कहा सरकारी संस्था भी नहीं

BCCI खुद मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप और कमर्शियल कामों से हजारों करोड़ रुपये कमाता है. टैक्स छूट जैसी सामान्य सुविधाएं फंडिंग नहीं मानी जा सकतीं. इसलिए ये ‘सब्स्टैंशियली फाइनैन्स्ड' भी नहीं है.

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BCCI तमिलनाडु सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड सोसाइटी है. (फोटो- AFP)

सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि BCCI कोई सरकारी संस्था नहीं है. इसलिए ये राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) एक्ट के तहत सूचना देने के लिए बाध्य नहीं है. ये फैसला 18 मई 2026 को सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने सुनाया. इसमें कहा गया कि BCCI एक प्राइवेट ऑर्गनाइजेशन है, जो क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए बना है. इसका अपना नियम-कानून है और सरकार इसका नियंत्रण नहीं करती.

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क्या था पूरा मामला?

ये मामला याचिकाकर्ता गीता रानी से जुड़ा है. गीता ने BCCI के कामकाज और उसके मामलों की जानकारी मांगी थी. उन्होंने RTI के जरिए ये जानकारी मांगी, लेकिन BCCI ने कहा कि वो RTI के दायरे में नहीं आता. जिसके बाद मामला CIC पहुंचा.

CIC ने 2018 में एक अलग आदेश में BCCI को RTI एक्ट के Section 2 (h) के तहत पब्लिक ऑर्गनाइजेशन माना था. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक उस समय सूचना आयुक्त एम श्रीधर आचार्युलु ने कहा था कि BCCI को RTI के तहत पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर नियुक्त करने चाहिए. लेकिन BCCI ने इस फैसले को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट ने खुद फैसला नहीं किया, बल्कि मामले को वापस CIC को भेज दिया. नए सिरे से जांच के बाद CIC ने अब फैसला बदल दिया.

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RTI एक्ट में 'पब्लिक अथॉरिटी' क्या है?

RTI एक्ट की धारा 2(h) में पब्लिक अथॉरिटी की परिभाषा दी गई है. कोई संस्था तभी पब्लिक अथॉरिटी मानी जाती है जब वो कानून द्वारा बनाई गई हो. या सरकार द्वारा स्थापित हो. या सरकार का उस पर गहरा नियंत्रण हो, या सरकार से काफी फंडिंग मिलती हो.

CIC ने जांच की और पाया कि BCCI इनमें से किसी भी कैटेगरी में नहीं आता.

BCCI पर सरकार का नियंत्रण क्यों नहीं?

BCCI तमिलनाडु सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड सोसाइटी है. ये किसी सरकारी कानून या आदेश से नहीं बनी. इसकी वर्किंग कमेटी अपने सदस्यों द्वारा ही चुनी जाती है. इसमें सरकार या किसी सरकारी संस्था का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. फाइनेंस, एडमिनिस्ट्रेशन, मैनेजमेंट सब BCCI खुद ही देखता है.

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CIC ने साफ कहा,

“सरकार का BCCI के कामों, पैसे, प्रशासन या मामलों पर कोई नियंत्रण नहीं है.”

फंडिंग का मुद्दा

कई लोग कहते हैं कि BCCI को सरकारी सुविधाएं मिलती हैं, जैसे टैक्स छूट या जमीन. लेकिन CIC ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (थलप्पलम केस और जी टीवी केस) का हवाला देते हुए कहा कि फंडिंग ‘महत्वपूर्ण और जरूरी’ होनी चाहिए. BCCI खुद मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप और कमर्शियल कामों से हजारों करोड़ रुपये कमाता है. टैक्स छूट जैसी सामान्य सुविधाएं फंडिंग नहीं मानी जा सकतीं. इसलिए ये ‘सब्स्टैंशियली फाइनैन्स्ड' भी नहीं है.

सार्वजनिक काम करने का तर्क क्यों खारिज?

BCCI भारतीय टीम चुनता है, देश का प्रतिनिधित्व करता है और क्रिकेट पर एकाधिकार रखता है. कई लोग इसे ‘पब्लिक फंक्शन’ मानते हैं. लेकिन CIC ने कहा कि RTI कानून में “पब्लिक फंक्शन” कोई कानूनी आधार नहीं है. कानून सिर्फ धारा 2(h) देखता है.

CIC ने BCCI की तारीफ भी की. कहा कि ये छोटा संगठन था, जो अब दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बन गया है. ये बाजार पर आधारित है, सरकारी मदद पर निर्भर नहीं. इसकी कमाई हजारों करोड़ में है और अच्छा रिजर्व फंड है. CIC ने ये भी चेतावनी दी कि ज्यादा सरकारी नियंत्रण से जरूरी नहीं कि पारदर्शिता बढ़े.

फैसला क्या है?

अंत में CIC ने याचिका खारिज कर दी. कहा कि BCCI को RTI के तहत सूचना देने की जरूरत नहीं है. ये फैसला BCCI के लिए बड़ी राहत है.

इस मामले में BCCI की तरफ से वकीलों की टीम में आदित्य मेहता, शिवानी गर्ग, अग्नेय गोपीनाथ और अन्य ने केस लड़ा.

वीडियो: BCCI खिलाड़ियों के लिए लागू करने वाला है सख्त नियम?

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