किसी भी चुनाव से पहले एक रस्म बड़े जोर-शोर से अदा की जाती है. मैनिफेस्टो जारी करने की रस्म. कागजों का वो पुलिंदा, जिसमें हर पार्टी देवदूत के गैंग सरीखी नजर आती है. ऐसे वादे किए जाते हैं, जो जमीन पर उतर आएं, तो अगले चुनाव में मुद्दे ढूंढे न मिलें. मगर अफसोस, वो वादे कभी पूरे नहीं होते.
नए मैनिफेस्टो की क्या जरूरत थी अखिलेश, पिछला वाला तो पूरा कर लेते
हमें पता है मैनिफेस्टो की हकीकत लेकिन, दिल बहलाने को गालिब ये ख्याल अच्छा है.

यूपी में अपनी साख बचाने के लिए लड़ रही समाजवादी पार्टी ने अपना मैनिफेस्टो जारी कर दिया है. इस बार अखिलेश यादव ने जो वादे किए हैं, उन्हें कोई पढ़ ले, तो किसी और पार्टी को वोट ही न दे. मैनिफेस्टो में अखिलेश में ऐसे 'विकास-पुरुष' नजर आ रहे हैं, जो पांच साल में ही उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल देंगे.
आइए आपको बताते हैं कि अखिलेश यादव ने क्या वादे किए हैं:
- गरीब महिलाओं को प्रेशर कुकर
- एक करोड़ लोगों को हजार रुपए की समाजवादी पेंशन
- गरीब परिवारों को मुफ्त गेहूं-चावल
- कुपोषित बच्चों को हर महीने एक किलो घी और एक डिब्बा मिल्क पाउडर
- लखनऊ एयरपोर्ट पर एयर एंबुलेंस
- कामकाजी महिलाओं को रोडवेज किराए में 50% की छूट और अलग हॉस्टल
- अनाथ-विकलांग युवतियों या पति की मौत के बाद निराश्रित महिलाओं से शादी करने पर दो लाख रुपए और नि:शुल्क आवास
- कक्षा नौ से 12 तक की छात्राओं को फ्री साइकिल
- अपना रोजगार शुरू करने की इच्छुक महिलाओं को कम ब्याज पर लोन
- उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की मदद के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट
- कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए नई स्वास्थ्य बीमा योजना, जिसमें फ्री इलाज मिलेगा
- दिल्ली की तर्ज पर यूपी में मोहल्ला क्लीनिक
- मजदूरों के सस्ते खाने के लिए मिड-डे मील योजना
- स्मार्टफोन योजना में रजिस्टर्ड 1.40 करोड़ लोगों को फोन
- झांसी-महोबा-सुल्तानपुर से कुशीनगर तक 522 किमी और बिजनौर-मुरादाबाद-फतेहगढ़ तक 303 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे
- फोर-लेन को 25 नए जिलों से जोड़ा जाएगा
- नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ, आगरा, वाराणसी में मेट्रो
- जानवरों के लिए 108 की तर्ज पर एंबुलेंस सेवा
- किसानों को सस्ता लोन और उनके लिए किसान कोष
- डेढ़ लाख रुपए की तक की आमदनी वालों को मुफ्त इलाज
- कानून व्यवस्था कड़ी रखी जाएगी
- बुंदेलखंड के किसानों को पानी मुहैया कराने का वादा, जैविक खेती योजना लागू होगी
- वाराणसी में नया हज हाउस
- सभी जिलों में वुमन हेल्पलाइन 1090 की सुविधा और महिला सुरक्षा प्रशिक्षण केंद्र
अब बताइए! अखिलेश यादव के इन वादों के बाद यूपी की जनता को क्या 'गुजरात मॉडल' की जरूरत पड़ेगी? सूबे की खुशियाली के लिए अखिलेश के वादे ही बहुत हैं. पर क्या वो पूरे होंगे?

क्या कहता है इस बार का एजेंडा
मुखिया बदलने के बाद अब समाजवादी पार्टी की छवि बदलने की कोशिश की जा रही है. एक बार फिर. यही कोशिश 2012 के चुनाव में भी हुई थी, जब अखिलेश ने लैपटॉप को चेहरा बनाया था. इस बार सबसे बड़ा मुद्दा विकास है. किसी खास वर्ग से कोई खास वादा नहीं किया गया है, लेकिन हर वर्ग के लिए कुछ खास है. 32 पन्नों के इस घोषणापत्र में यूपी की 6.44 करोड़ महिला वोटर्स को लुभाने की जाबड़ कोशिश दिखती है. अखिलेश उन 7.56 करोड़ वोटर्स को भी साधना चाहते हैं, जो 18 से 39 साल के बीच के हैं. नएपन को लेकर उत्साहित इन लोगों को अखिलेश अपनी ताकत मानते हैं.
तो दिक्कत कहां है
दिक्कत ये है कि अखिलेश के इन वादों के पूरा होने पर संदेह है. उनका अतीत ये संदेह पैदा करता है.
- पिछली बार अखिलेश यादव ने बेरोजगारी भत्ते का वादा किया था, जो सालाना 12 हजार रुपए दिया जाना था. अखिलेश ये वादा पूरा नहीं कर पाए और इस बार रोजगार का शिगूफा ले आए. भत्ते का भट्ठा तो बैठ गया, अब देखते हैं पार्टी कितनी नौकरियां देती है.
- अखिलेश का वादा था कि हर जिले में स्टेडियम बनवाया जाएगा. वो पूरा नहीं हुआ और अब समाजवादी स्पोर्ट्स स्कूल का वादा हमारे सामने है. स्टेडियम खेलने के लिए होता है. अखिलेश यादव इस पर खेल रहे हैं.
- 2012 में समाजवादी पार्टी का वादा था कि आतंकवाद के नाम पर जिन अल्पसंख्यक बेगुनाहों को फंसाया गया था, उनकी रिहाई का प्रयास किया जाएगा. पांच साल में इसकी कोई खोज-खबर नहीं मिली. इस बार उनसे एक लाख नौकरियों का वादा है.
- 2014 में अखिलेश ने वादा किया कि अल्पसंख्यकों को विकास योजनाओं में 20% की हिस्सेदारी मिलेगी. इसके लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग बनाया गया. वहां तीन साल से कोई प्रमुख सचिव है ही नहीं. इस बार ऐसा वादा नहीं है और उन्हें सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता का आश्वासन दिया गया है.
- पिछली बार समाजवादी पार्टी भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर मुखर थी. मायावती निशाने पर थीं. लेकिन, इस बार सपा इस मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं है. जाहिर है उसने पांच साल में भ्रष्टाचार पर कोई असरदार कदम नहीं उठाया. मायावती भी 15 अरब रुपए के स्मारक घोटाले के साए से बाहर आ चुकी हैं.
अखिलेश यादव, हमको मालूम है मैनिफेस्टो की हकीकत लेकिन, दिल बहलाने को गालिब ये ख्याल अच्छा है.
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