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बंगाल में बड़ा उलटफेर, TMC के 100 पार्षदों का इस्तीफा, सांसद ने BJP की बैठक में हिस्सा लिया

West Bengal: तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने मुश्किल दौर से गुजर रही है. बड़ी संख्या में पार्षदों का पलायन हो रहा है. सांसद बीजेपी की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं. वहीं, विधायक बीजेपी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो रहे. क्या Mamata Banerjee पार्टी को खत्म होने से बचा पाएंगी?

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने मुश्किल दौर से गुजर रही है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

पश्चिम बंगाल में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. पार्टी के सीनियर नेता खुलकर असंतोष जता रहे हैं. बड़ी संख्या में पार्षदों का पलायन हो रहा है. सांसद बीजेपी की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं और विधायक हैं कि बीजेपी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भी शामिल नहीं हो रहे. अटकलें यह भी हैं कि टीएमसी के कई सांसद और विधायक पाला बदल सकते हैं. 

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शुभेंदु की मीटिंग में 6 विधायकों संग पहुंची सांसद 

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी से लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने 25 मई को बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. ठीक एक दिन बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई एक प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया. काकोली के साथ टीएमसी के छह विधायक भी इस बैठक में शामिल हुए. बाद में विधायकों ने सफाई दी और कहा कि वे सिर्फ विकास संबंधी मुद्दों के लिए मीटिंग में पहुंचे थे. 

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बंगाल के सियासी गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं. अटकलें लगाई जा रही हैं कि काकोली घोष और कई विधायक बीजेपी का दामन थाम सकते हैं. चुनाव में मिली करारी हार के बाद से काकोली पार्टी की सबसे मुखर आलोचकों में से एक रही हैं. इस महीने की शुरुआत में, टीएमसी ने उन्हें हटाकर कल्याण बनर्जी को लोकसभा में मुख्य सचेतक बनाया था. तब उन्होंने ‘X’ पर लिखा था, “आज, मुझे चार दशकों की वफादारी का इनाम मिला है.

पार्टी के अंदर असंतोष अब साफ दिख रहा था. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस ने पिछले हफ्ते चुनाव बाद कथित हिंसा, बुलडोजर एक्शन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था. इस प्रदर्शन में टीएमसी के 80 में से सिर्फ 36 विधायक ही शामिल हुए. 

कोलकाता मेयर भी देंगे इस्तीफा?

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बीते कुछ दिनों में अलग-अलग नगर पालिकाओं के लगभग 100 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है. संकट इतना गहरा गया है कि अगले साल होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले ही कई नगर बोर्ड भंग किए जा सकते हैं. बीजेपी के लिए यह अच्छा मौका है. पार्टी अब उन नगर पालिकाओं में भी अपनी पैठ बढ़ा सकती है, जो अब भी ज्यादातर तृणमूल के ही नियंत्रण में हैं. आजतक बांग्ला के मुताबिक, ऐसी अटकलें जोरों पर हैं कि ममता के करीबी सहयोगी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की है.

तृणमूल से बड़े पैमाने पर पलायन

इस्तीफों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में बनी नई सरकार ने साफ कर दिया कि टीएमसी सरकार में हुए भ्रष्टाचार की जांच की जाएगी. कुछ नगर पालिकाओं में टीएमसी पार्षदों ने अपने दफ्तरों में जाना पूरी तरह से बंद कर दिया है. शहरी विकास और नगरपालिका मामलों (UDMA) की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि सरकार ने ऐसे निकायों में प्रशासक नियुक्त करना शुरू कर दिया है.

टीएमसी पार्षदों की भ्रष्टाचार के आरोप में लगातार हो रही गिरफ्तारियों ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है. पिछले हफ्ते वसूली और धमकाने के आरोप में तीन पार्षदों को गिरफ्तार किया गया था. 23 मई को साउथ दम दम के तृणमूल पार्षद संजय दास ने कथित तौर पर अपनी जान दे दी. संजय टीएमसी नेता देबराज चक्रवर्ती के करीबी माने जाते थे और उन पर भ्रष्टाचार और वसूली के आरोप थे. इस मामले में अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज किया गया है.

भटपारा नगर पालिका के उपाध्यक्ष देबज्योति घोष ने भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने बताया कि उनके पास पद छोड़ने के अलावा ‘कोई और विकल्प नहीं’ था. उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जा रहा था और टीएमसी नेतृत्व कोई मार्गदर्शन या समर्थन देने में नाकाम रहा. उन्होंने इस बात पर भी जोर देकर किया कि उन्होंने बिना किसी बाहरी दबाव के इस्तीफा दिया है.

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नंदीग्राम में किसे उतारेगी TMC?

तृणमूल कांग्रेस को आने वाले नंदीग्राम उपचुनाव के लिए उम्मीदवार ढूंढने में मुश्किल हो रही है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल के दो नेताओं ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. चुनाव में दो सीटों से जीतने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट खाली कर दी थी. उन्होंने कोलकाता की भवानीपुर सीट अपने पास रखी है, जहां उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था.

टीएमसी के अंदरूनी झगड़े खुलकर सामने आ गए हैं. पार्टी जमीनी स्तर के नेताओं को भी खो रही है. क्या ममता बनर्जी कमान संभालेंगी और पार्टी को खत्म होने से बचा पाएंगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

वीडियो: राजधानी: ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी का नया प्लान क्या है?

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