तमिलनाडु के पूर्व सीएम एमके स्टालिन के बेटे और डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन सनातन विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं. सनातन धर्म को डेंगू बताने पर उनके खिलाफ कई जगहों पर केस भी हुए थे. अब उन्होंने तमिलनाडु की विधानसभा में सनातन पर फिर ऐसी बात कह दी है कि बवाल मचना तय है. प्रदेश के नए सीएम जोसेफ विजय की मौजूदगी में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि लोगों को बांटने वाले सनातन धर्म को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहिए.
उदयनिधि ने फिर 'सनातन को जड़ से उखाड़ने' की बात की, इस बार 'कोर्ट-केस' से बच जाएंगे
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता ने सदन में एक बार फिर 'सनातन धर्म को जड़ से उखाड़ फेंकने' की बात कही है. इस पर बीजेपी ने उन पर निशाना साधा है. हालांकि, सदन में मौजूद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस पर चुप्पी साधे रखी.


ये बात मंगलवार, 12 मई की है. चुनाव के तुरंत बाद विधानसभा का पहला सत्र चल रहा था. सदन में सीएम जोसेफ विजय भी मौजूद थे. इसी दौरान उदयनिधि ने सनातन को जड़ से उखाड़ने वाली विवादित टिप्पणी की, जो इस मुद्दे पर उनके पहले के कई बयानों जैसी ही थी. इससे पहले उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी और लोगों से अपील की कि इसे जड़ से उखाड़ फेंकें. इस बयान की वजह से स्टालिन को भारी कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. उनके खिलाफ कई अदालती मामले दर्ज किए गए.
कानूनी कार्रवाई से बच जाएंगे उदयनिधिहालांकि, इस बार उदयनिधि आराम से इन कानूनी मुश्किलों से बच जाएंगे क्योंकि उन्होंने ये बयान विधानसभा की कार्यवाही में दिया है. विधानसभा के सदस्यों को सदन के अंदर दिए किसी भी भाषण पर कानूनी कार्रवाई से छूट मिलती है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 194 के अनुसार, राज्य विधानसभाओं में विधायकों के कमेंट्स पर उन्हें विशेषाधिकार मिले होते हैं. ये विशेषाधिकार विधायकों को अदालती कार्यवाही से बचाते हैं. संविधान का अनुच्छेद 194 (2) कहता है कि विधानमंडल में कही गई किसी बात या दिए गए वोट के लिए किसी भी सदस्य के खिलाफ किसी कोर्ट में कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती. यह नियम हर उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो सदन में बोलने और भाग लेने के अधिकारी होते हैं.
इस बयान के बाद उदयनिधि पर कानूनी एक्शन की छाया भले न पड़े लेकिन बीजेपी उन्हें नहीं छोड़ने वाली है. बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने उनके बयान की निंदा की है. उन्होंने याद दिलाया कि जब पिछली बार स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही थी तो कोर्ट ने इस भाषण को नफरती बताया था. तमिलनाडु की जनता ने भी इसी वजह से डीएमके को हराकर विपक्ष में भेज दिया. मालवीय ने आगे कहा कि इस बार स्टालिन विधायिका से मिली छूट का फायदा उठा रहे हैं. लाखों लोगों की आस्था का अपमान करना राजनीतिक साहस नहीं है बल्कि अहंकार है.
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