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तमिल गीत से पहले बजा वंदे मातरम, विजय की 'दोस्त पार्टियां' भी खिलाफ हो गईं, अब सफाई आई है

CM Vijay Oath Ceremony: तमिलनाडु में सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले 2 मिनट 52 सेकंड तक वंदे मातरम बजा. फिर 52 सेकेंड के लिए जन गण मन बजा. इसके बाद 65 सेकेंड तक तमिल राज्य गीत 'तमिल थाई वाल्थु' बजाया गया और इसी पर विवाद हो गया.

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तमिलनाडु में सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले 2 मिनट 52 सेकंड तक वंदे मातरम बजा. (फोटो-इंडिया टुडे)

तमिलनाडु (Tamil Nadu) के नए नवेले मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (C Joseph vijay) के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गीत, राष्ट्रगान और वंदेमातरम के गाए जाने के क्रम पर सवाल उठ रहे है. विपक्ष इसे तमिल संस्कृति का अपमान बता रहा है. वहीं सत्ता पक्ष यानी TVK की नई सरकार सारा दोष राज्यपाल पर मढ़ रही है. ये पूरा मामला क्या है? विवाद क्यों हो रहा है और नियम क्या कहता है? क्या राज्यगीत, राष्ट्रगान और वंदेमातरम के गाए जाने पर आपत्ति थी या मामला सिर्फ गाए जाने के क्रम से जुड़ा था? सब कुछ स‍िलस‍िलेवार तरीके से बताते हैं.  

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दरअसल, 10 मई को तमिलनाडु में सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले 2 मिनट 52 सेकंड तक ‘वंदे मातरम’ बजा. फिर 52 सेकेंड के लिए 'जन-गण-मन' बजा. इसके बाद 65 सेकेंड तक तमिल राज्य गीत 'तमिल थाई वाल्थु' बजाया गया. इसी बात पर विवाद हो गया कि आखिर तमिल राज्य गीत सबसे आखिर में क्यों बजाया गया. जबकि इससे पहले तक रवायत ये थी कि सबसे पहले तमिल राज्य गीत बजता था. फिर वंदे मातरम या राष्ट्रगान.

विपक्ष की ओर से डीएमके नेता टीकेएस. एलंगोवन ने कहा कि राज्य की परंपरा तमिल राज्य गीत को पहले और राष्ट्रगान को अंत में बजाने की रही है. लेकिन अब नियम बदले जा रहे हैं. विजय पर बीजेपी की विचारधारा की ओर झुकने का आरोप लगाया गया. सिर्फ DMK की ही नहीं. विजय के सहयोगी दल CPI, CPI-M और VCK ने भी इसकी आलोचना की. VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने कहा,

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हम अभी जो देख रहे हैं, वो यह है कि सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में उन्होंने 'वंदे मातरम' बजाना शुरू कर दिया है. कार्यक्रम के अंत में वे 'तमिल थाई वाल्थु' (तमिल गान) बजा रहे हैं. ऐसा मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुआ था और आज फिर से प्रोटेम स्पीकर के शपथ ग्रहण के दौरान भी ऐसा ही हुआ. यह हमारी उस पुरानी परंपरा से पूरी तरह से अलग है. मुख्यमंत्री या सरकार को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए.

आगे थिरुमावलवन ने कहा कि तमिलनाडु की जनता ने इस सरकार को इस विश्वास के साथ वोट दिया था कि यहां सांप्रदायिक या धार्मिक राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है. ऐसी किसी परंपरा को शुरू करना, जो पहले कभी अस्तित्व में नहीं थी. चौंकाने वाला और निराशाजनक दोनों है.

विजय की पार्टी ने दी सफाई

विवाद बढ़ा और सहयोगी दलों ने सवाल उठाए तो विजय की पार्टी TVK की ओर सफाई भी आई. कैब‍िनेट म‍िन‍िस्टर आधव अर्जुन ने इसके ल‍िए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को दोषी ठहराया. मंत्री ने कहा कि राष्ट्रगान राज्यपाल के निर्देशों के अनुसार ही गाए गए थे. ये उनकी पार्टी का फैसला नहीं था. आधव अर्जुन ने आगे कहा कि टीवीके सरकार इस नई व्यवस्था से सहमत नहीं है. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की ओर से बताया गया कि केंद्र सरकार के नए सर्कुलर के कारण ऐसा करना पड़ा. 

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टीवीके सरकार ने साफ किया है कि भविष्य में पुरानी परंपरा ही लागू रहेगी. यानी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत 'तमिल थाई वाल्थु' से होगी और अंत राष्ट्रगान से किया जाएगा.

‘तमिल थाई वाल्थु’ क्या है?

अब तमिलनाडु के राज्यगीत के बारे में भी जान लेते है. 'तमिल थाई वाल्थु' तमिलनाडु का राज्य गीत है. इसे 1891 में मनोन्मनीयम सुंदरम पिल्लई ने अपने नाटक 'मनोन्मनीयम' के शुरुआती भाग में तमिल देवी की स्तुति के रूप में लिखा था. यह गीत राज्य की सांस्कृतिक पहचान का एक बेहद अहम हिस्सा माना जाता है. यही कारण है कि इसे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में सबसे पहले गाने की परंपरा रही है.

18 दिसंबर 2021 को DMK की तमिलनाडु सरकार ने 'तमिल थाई वाल्थु' को आधिकारिक तौर पर स्टेट एंथम घोषित कर दिया था. इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि 'तमिल थाई वाल्थु' केवल एक प्रार्थना गीत है. न कि कोई राष्ट्रगान या राज्यगान. इसलिए, जब इसे गाया जाता है तो किसी को खड़े होने की आवश्यकता नहीं है. वहीं सरकार ने अपने निर्देश में कहा था कि इसके गायन के दौरान वहां मौजूद सभी लोगों को सम्मान में खड़ा होना होगा.

केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक वंदे मातरम के पूरे 6 छंद वाले वर्जन को शपथ से पहले बजाया गया. इसी नियम के मुताबिक तमिनलाडु में शपथ ग्रहण समारोह में पहले वंदे मातरम फिर जन गण मन और बाद तमिल राज्य गीत 'तमिल थाई वाल्थु' बजाया गया.

वैसे इस नियम की लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठ रहा है. पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी, तमिलनाडु के पूर्व सीएम स्टालिन ने भी सवाल उठाए थे. असल में ये विवाद इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं. ऐसे में इस घटनाक्रम ने राज्य के सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है. 

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