20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में 'चलो संसद' मार्च के दौरान हिंसा भड़कने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि आंदोलनों के समय पुलिस को नए प्रोटेकॉल की जरूरत है. मंगलवार, 28 जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने कहा कि CJP प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने तय प्रोटेकॉल का पालन नहीं किया.
'जिम्मेदारी तय किए बिना जांच बेमतलब है,' CJP प्रोटेस्ट में हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
CJP Protest के दौरान 20 जुलाई को Delhi Police ने प्रोटेस्टर्स पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. पुलिस पर प्रदर्शनकारियों छात्रों के साथ ज्यादती करने का आरोप है. Supreme Court मामले की सुनवाई कर रहा है.

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच इस मामले को सुन रही है. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंच ने कहा,
"पूरी तरह से इंडिपेंडेंट जांच होनी चाहिए. जिसने भी ज्यादती की है, कानून अपना काम करेगा. अगर कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जाती है तो जांच का कोई मतलब नहीं है."
CJP प्रोटेस्ट के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई. दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रोटेस्टर्स पर लाठियां चलाईं और आंसू गैसे के गोले छोड़े. सुरक्षाबलों पर प्रोटेस्टर्स के खिलाफ जरूरत से ज्यादा फोर्स इस्तेमाल करने का आरोप लगा.
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