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LAC पर चीन ने तैनात किए J-20 'माइटी ड्रैगन', क्या S-400 और राफेल दे पाएंगे करारा जवाब?

China Deploys J-20 Near LAC: चीन ने एलएसी के पास तिब्बत में अपने सबसे एडवांस J-20 स्टेल्थ फाइटर जेट की तैनाती बढ़ा दी है. जानिए J-20 कितना खतरनाक है, इसकी स्टेल्थ तकनीक कैसे काम करती है और भारत के पास इसे रोकने के लिए कौन से फाइटर जेट, S-400 और एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं.

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LAC के पास चीन की बड़ी एयर पावर (सेटेलाइट फोटो)

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  • चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट शिनजियांग के हॉटन और तिब्बत के दमशुंग एयरबेस पर पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट J-20 की संख्या बढ़ा कर तैनाती की है।
  • भारत-चीन सीमा तनाव और रणनीतिक संभावना के कारण जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में चीनी सैन्य तैयारियों के तहत J-20 विमान लदाख एवं अरुणाचल प्रदेश के समीप एयरबेस पर तैनात किए गए।
  • इस तैनाती के बाद भारत को अपनी एयर डिफेंस क्षमताओं एवं काउंटर स्टेल्थ तकनीक को मजबूत करना आवश्यक हो गया है ताकि उत्तरी सीमा पर नए खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

चीन ने भारत से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब अपने सबसे आधुनिक और खतरनाक पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट J-20 'माइटी ड्रैगन' की तैनाती बढ़ा दी है. सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के सामने मौजूद चीनी एयरबेस पर अब J-20 की नियमित मौजूदगी दिखने लगी है. स्टेल्थ तकनीक, लंबी मारक क्षमता और एडवांस्ड सेंसर से लैस ये लड़ाकू विमान चीन की वायु शक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या LAC के पास J-20 की बढ़ती तैनाती भारत की सुरक्षा के लिए नई चुनौती है. अगर तनाव बढ़ता है तो भारतीय वायुसेना के पास इसका जवाब क्या होगा. और क्या भारत के मौजूदा फाइटर जेट और एयर डिफेंस सिस्टम इस स्टेल्थ खतरे से निपटने में सक्षम हैं.

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NDTV की एक रिपोर्ट में सामने आई हालिया सैटेलाइट इमेज के मुताबिक, जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में चीन ने शिनजियांग के हॉटन एयरबेस पर 7 और तिब्बत के दमशुंग एयरबेस पर 4 J-20 फाइटर जेट तैनात किए थे. हॉटन एयरबेस दौलत बेग ओल्डी के काफी करीब है, जबकि दमशुंग एयरबेस अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के सामने स्थित है. 

लल्लनटॉप से बात करते हुए पूर्व नौसेना अधिकारी कोमोडोर श्रीनिवास सिंह कहते हैं,

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ये तैनाती किसी सैन्य ड्रिल का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत के उत्तरी मोर्चे पर चीन की नई ऑपरेशनल रणनीति का संकेत है. ऐसे में भारत को अच्छी तरह से समझना होगा कि आखिर J-20 'माइटी ड्रैगन' कितना खतरनाक है और भारत के सामने इससे किस तरह की चुनौती खड़ी हो सकती है.

आखिर सैटेलाइट तस्वीरों में ऐसा क्या दिखा?

पूरा मामला हाल ही में सामने आई उन सैटेलाइट तस्वीरों से जुड़ा है, जिन्होंने भारत के उत्तरी मोर्चे पर चीन की सैन्य तैयारियों की नई तस्वीर पेश की है. वेंटर (Vantor) से मिली हाई रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेज में दावा किया गया है कि जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में चीन ने भारत के सामने मौजूद दो रणनीतिक एयरबेस पर अपने सबसे आधुनिक J-20 'माइटी ड्रैगन' स्टेल्थ फाइटर जेट तैनात किए. इससे साफ संकेत मिलता है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) अब सीमावर्ती इलाकों में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की नियमित ऑपरेशनल मौजूदगी बनाए हुए है.

इन तस्वीरों के मुताबिक, शिनजियांग के हॉटन एयरबेस पर 7 J-20 फाइटर जेट एक साथ दिखाई दिए. ये एयरबेस लेह से करीब 389 किलोमीटर और भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी एयरफील्ड से सिर्फ 245 किलोमीटर दूर है. एनडीटीवी की कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार, भारत के सामने किसी चीनी एयरबेस पर एक साथ दिखाई देने वाले J-20 फाइटर जेट्स की ये अब तक की सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है.

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दौलतबेग ओल्डी के करीब तैनात जे-20 (सेटेलाइट इमेज)

वहीं, तिब्बत के ल्हासा प्रान्त में स्थित दमशुंग एयरबेस पर भी फ्लाइटलाइन पर 4 J-20 फाइटर जेट देखे गए. ये एयरबेस अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर से करीब 344 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में है. 

रणनीतिक थिंक टैंक ‘इंडिया मैटर्स’ के रोहित शर्मा के मुताबिक हॉटन और दमशुंग पर J-20 की मौजूदगी बताती है कि भारत के सामने ऊंचाई वाले एयरबेस से पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स का संचालन अब किसी सैन्य अभ्यास का हिस्सा नहीं, बल्कि चीन की नियमित रणनीति बन चुका है. लल्लनटॉप से बात करते हुए रोहित कहते हैं,

भारतीय वायुसेना के लिए उत्तरी मोर्चे पर लो ऑब्जर्वेबल स्टेल्थ खतरा अब नई हकीकत है, जिससे काउंटर स्टेल्थ सेंसर, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और लंबी दूरी तक सटीक जवाबी हमला करने की क्षमता को और मजबूत करना जरूरी हो गया है.

क्यों इतना खतरनाक माना जाता है J-20 और कैसे रडार को देता है चकमा?

J-20 'माइटी ड्रैगन' को चीन का सबसे एडवांस पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लो ऑब्जर्वेबल यानी स्टेल्थ डिजाइन है, जिसकी वजह से इसे पारंपरिक रडार से पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है. विमान की बॉडी, एयर इनटेक, किनारों का आकार और रडार तरंगों को बिखेरने वाली खास डिजाइन इसे बहुत कम रडार सिग्नेचर वाला फाइटर बनाती है. यही वजह है कि दुश्मन के एयरस्पेस में घुसकर मिशन पूरा करने और मुकाबले के दौरान पहले हमला करने की क्षमता इसे दूसरे गैर स्टेल्थ फाइटर जेट्स पर बढ़त दिलाती है.

रक्षा विशेषज्ञ और भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन डॉ डी.के.पाण्डेय के मुताबिक, J-20 की असली ताकत सिर्फ इसकी स्टेल्थ तकनीक नहीं, बल्कि इसके एडवांस AESA रडार, सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और लंबी दूरी तक मार करने वाली बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलों का मेल है. लल्लनटॉप से बात करते हुए डॉ पाण्डेय कहते हैं,

ऑफिशियली J-20 की फेरी रेंज (एक बार में उड़ने की अधिकतम सीमा), कॉम्बैट रेंज (जिस दूरी तक जाकर कोई फाइटर जेट अटैक और एयर टू एयर कॉम्बैट कर सकता है) और सभी हथियारों की पूरी जानकारी चीन ने सार्वजनिक नहीं की है. लेकिन ओपन सोर्स पर जो भी जानकारी मौजूद है, उसके मुताबिक इसकी इंटरनल वेपन बे में PL-15 जैसी लंबी दूरी की एयर टू एयर मिसाइलें और कम दूरी की मिसाइलें रखी जा सकती हैं, जिससे हथियार भी विमान के अंदर रहते हैं और इसका स्टेल्थ प्रोफाइल बरकरार रहता है.

ये विमान लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने और दुश्मन को उसकी नजर में आए बिना निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. J-20 की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उसकी तकनीक नहीं, बल्कि उसे बड़ी संख्या में तैयार करने की चीन की क्षमता भी है. 'द वॉर जोन' की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में जहां चीन के पास करीब 50 J-20 थे, वहीं 2022 के आखिर तक इनकी संख्या लगभग 200 हो गई. इसके बाद उत्पादन की रफ्तार और तेज हुई और 2025 तक सालाना करीब 120 विमान बनने लगे. 

‘डिफेंस सिक्योरिटी एशिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के मध्य तक चीन के पास 300 से 500 J-20 का बेड़ा हो सकता है, जबकि ब्रिटेन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) का अनुमान है कि 2030 तक ये संख्या करीब 1,000 तक पहुंच सकती है. पूर्व वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने एनडीटीवी से कहा कि हर साल 125 लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता बताती है कि चीन ने अपनी सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को मिशन मोड में खड़ा किया है. उनके मुताबिक, पहली खाड़ी युद्ध के बाद चीन ने एयर पावर की अहमियत समझी और लगातार निवेश कर आज दुनिया की सबसे तेज लड़ाकू विमान निर्माण क्षमता विकसित कर ली.

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जे-20 की खूबियां एक नजर में (ग्राफिक्स-AI)

अगर J-20 से हमला हुआ, तो भारत के पास क्या हैं जवाबी विकल्प?

ये सही है कि भारत के पास फिलहाल कोई ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट नहीं है. भारत का पहला स्वदेशी स्टेल्थ लड़ाकू विमान एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) अभी विकास के चरण में है और इसके स्क्वाड्रन सेवा में आने में अभी कई साल लग सकते हैं. लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि J-20 के सामने भारतीय वायुसेना के पास जवाब नहीं है. किसी भी हवाई युद्ध का नतीजा सिर्फ स्टेल्थ तकनीक से तय नहीं होता, बल्कि पायलट की ट्रेनिंग, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हथियारों के तालमेल पर भी निर्भर करता है. यही वो क्षेत्र हैं, जहां भारत लगातार अपनी क्षमता मजबूत कर रहा है.

भारतीय वायुसेना के बेड़े में इस समय 36 राफेल फाइटर जेट शामिल हैं, जो अंबाला और हासिमारा एयरबेस से ऑपरेट करते हैं. इसके अलावा 260 से ज्यादा सुखोई 30MKI, मिराज 2000 और मिग 29 जैसे अनुभवी लड़ाकू विमान भी देश की हवाई सुरक्षा की रीढ़ हैं. राफेल में लगा Meteor बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल सिस्टम, SCALP क्रूज मिसाइल, एडवांस AESA रडार और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम इसे दुनिया के सबसे सक्षम 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में शामिल करते हैं. इसी बीच भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमान खरीदे जा रहे हैं, जबकि भारतीय वायुसेना के लिए 114 मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है.

सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस प्रणाली भी किसी संभावित हवाई हमले का अहम जवाब है. भारतीय वायुसेना और सेना के पास S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, आकाश मिसाइल सिस्टम, MRSAM, स्वदेशी रडार नेटवर्क, AWACS और AEW&C जैसे कई प्लेटफॉर्म हैं, जो दुश्मन के विमानों और मिसाइलों का लंबी दूरी से पता लगाने, उनकी ट्रैकिंग करने और उन्हें इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखते हैं. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य की चुनौती सिर्फ स्टेल्थ फाइटर जेट नहीं, बल्कि उन्हें समय रहते पहचानने की है. यही वजह है कि भारत काउंटर स्टेल्थ सेंसर, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क और लंबी दूरी तक सटीक जवाबी हमला करने वाली क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है, ताकि उत्तरी मोर्चे पर किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब दिया जा सके.

जे-20 का मुकाबला कैसे करेगा इंडिया (ग्राफिक्स- AI)
j-20 का मुकाबला कैसे करेगा इंडिया (ग्राफिक्स- AI)

रक्षा मंत्रालय और वायुसेना की प्रतिक्रिया

‘द लल्लनटॉप’ की टीम ने इस खबर की पुष्टि के लिए रक्षा मंत्रालय के साथ-साथ भारतीय वायुसेना के जनसंपर्क विभाग से संपर्क साधने की कोशिश की. जब फोन नहीं उठा तो मैसेज करके हमने पूछा कि 

क्या भारत को इस तरह की किसी तैनाती का पता है? 

अगर हां तो क्या भारत ने चीन से किसी तरह का आधिकारिक विरोध जताया है? 

और अगर ये खबर सच है तो इस चुनौती से निपटने के लिए हमारी तैयारी कैसी है?

 मगर खबर लिखे जाने दोनों में से किसी भी विभाग ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी थी. 

कहां जाकर थमेगी होड़?

आने वाले सालों में भारत और चीन के बीच हवाई ताकत की ये होड़ और तेज होने की उम्मीद है. एक तरफ चीन तेजी से J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ भारत अपने फाइटर बेड़े के आधुनिकीकरण, एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करने और AMCA जैसे स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. फिलहाल, LAC के पास J-20 की बढ़ती तैनाती साफ संकेत देती है कि चीन अपनी वायु शक्ति का दबाव बनाए रखना चाहता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ सैन्य तैयारी है या फिर भारत को रणनीतिक संदेश देने की कोशिश. इस पूरे घटनाक्रम पर भारत के रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है. जैसे ही इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने आएगा, इस रिपोर्ट को उसी के मुताबिक अपडेट किया जाएगा.

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