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‘अब दाऊद इब्राहिम का ही बीजेपी में आना बाकी’, संजय सिंह ने दलबदलुओं को सुनाया

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कई पार्टियों के सांसदों की बगावत पर बीजेपी को घेरा है. उन्होंने तंज में कहा कि अब तो सिर्फ दाऊद इब्राहिम का ही बीजेपी में शामिल होना बचा है.

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संजय सिंह ने बीजेपी पर साधा निशान. (फोटो- India Today)

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  • संजय सिंह ने कहा कि दलबदल संसद में बड़ा मुद्दा होगा और इसके खिलाफ सदन में और बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, साथ ही दलबदल करने वाले सांसदों की सदस्यता रद्द करने का सुझाव दिया।
  • उन्होंने बताया कि बीजेपी regionale पार्टियों को खत्म करना चाहती है क्योंकि वे उसकी मुख्य चुनौती हैं, और क्षेत्रीय दलों के अंत के बाद केवल कांग्रेस ही विपक्ष में बचेगी।
  • संजय सिंह ने उल्लेख किया कि बीजेपी ने पहले भी अन्य पार्टियों में दलबदल कर राजनीतिक दलों को तोड़ा है और इस रणनीति का इस्तेमाल कई राज्यों में किया गया है।

‘दाऊद इब्राहिम का ही बीजेपी में शामिल होना बचा है.’ आम आदमी पार्टी से शुरू होकर TMC होते हुए शिवसेना (UBT) तक पहुंचे सांसदों की बगावत के सिलसिले पर संजय सिंह ने ये टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि बीजेपी चाहती है कि क्षेत्रीय पार्टियां खत्म हो जाएं क्योंकि वही उसके लिए असली चुनौती हैं. 

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AAP के राज्यसभा सांसद ने कहा कि क्षेत्रीय दल खत्म हो जाएंगे तो बीजेपी की एकमात्र प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस बचेगी. इसके बाद उसके लिए ‘एक देश-एक चुनाव’ कराने का रास्ता साफ हो जाएगा. संजय सिंह ने कहा कि हाल ही में दलबदल की अनेक घटनाओं का मुद्दा संसद में उठाया जाएगा. साथ ही सदन के अंदर और बाहर इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी होगा.

क्या-क्या बोले संजय सिंह?   

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में संजय सिंह ने कहा कि सदन में दलबदल एक बड़ा मुद्दा होगा. दलबदल कराकर राजनीतिक दलों को तोड़ना गलत है. बागियों को अपना मेसेज देते हुए संजय सिंह ने कहा, 

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जिस पार्टी से आप चुनाव लड़ते हैं, उसके नेता और चुनाव चिह्न के नाम पर ही जनता आपको वोट देती है. दो फूल और घास TMC का सिंबल है. ममता बनर्जी इसकी नेता हैं. आप नेता और पार्टी को तो धोखा दे रहे हैं. लेकिन यह सबसे बड़ा विश्वासघात जनता के साथ है, जिसने आपको वोट दिया. 

दलबदल रोकने का तरीका क्या है?

आम आदमी पार्टी के नेता ने आगे कहा कि दलबदल रोकने का तरीका ये है कि जो भी विधायक या सांसद पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाते हैं, उनकी सदस्यता रद्द कर देनी चाहिए. संविधान की 10वीं अनुसूची में यही साफ-साफ लिखा है. संजय सिंह ने सुझाव दिया कि किसी पार्टी के विलय को सही मानने के लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए. सिर्फ विधायक दल का विलय ही पार्टी का विलय न हो. बल्कि अगर विधायक दल के साथ पूरी राजनीतिक पार्टी का मर्जर हो रहा हो, तभी इसे वैध माना जाना चाहिए.

संजय सिंह ने कहा कि ऐसा कानून बनना चाहिए कि नेता जिस पार्टी से चुनाव जीतकर आया है, वह पांच साल उसी पार्टी में रहेगा. दूसरी पार्टी में नहीं जा सकेगा. अगर वो पार्टी बदलता है तो उसकी सदस्यता खत्म होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कानून पहले से तो मौजूद है और काफी साफ है, लेकिन उसकी गलत व्याख्या की जाती है.

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TMC के बागियों पर साधा निशाना

संजय सिंह ने उन TMC सांसदों की आलोचना भी की, जिन्होंने बंगाल चुनाव के तुरंत बाद ममता बनर्जी से बगावत कर दी. TMC के 20 सांसदों ने अपना अलग गुट बनाकर उसका एक ‘अनजानी-सी’ पार्टी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लिया. उन्होंने लोकसभा में सत्ताधारी एनडीए को सपोर्ट का ऐलान भी किया है. 

TMC के बागी सांसदों का सपोर्ट लेने वाली बीजेपी पर निशाना साधते हुए संजय सिंह ने कहा कि सयानी घोष ने भाजपा के लिए क्या-क्या नहीं कहा था. लेकिन बीजेपी को आज वो अच्छी लग रही हैं.

AAP नेता ने आगे कहा, 

अब तो आपको (बीजेपी को) TMC के मुस्लिम सांसद यूसुफ पठान से भी कोई दिक्कत नहीं है. सिर्फ दाऊद इब्राहिम का ही बीजेपी में शामिल होना बाकी रह गया है.

‘आप’ के बागियों पर क्या बोले संजय सिंह?

राघव चड्ढा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के बागी हुए सांसदों को लेकर संजय सिंह ने कहा कि उनका बीजेपी में जाना कोई नई बात नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे बीजेपी ने उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी में तोड़फोड़ की थी. अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस की पूरी इकाई का ही विलय कर लिया था. कर्नाटक, गोवा, मध्य प्रदेश में भी यही सब किया. 

संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी के सांसदों को तोड़ना बीजेपी के लिए कोई नया प्रयोग नहीं था. ये बीजेपी का स्वभाव है कि वो ईडी और सीबीआई का प्रयोग दूसरी पार्टी के नेताओं को तोड़ने में करती है और जब उनका काम हो जाता है तो वो बागियों को ‘चौटाला’ बना देती है.

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