आपने पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का बयान सुना? पप्पू यादव महिला आरक्षण बिल पर बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में 90% महिलाओं को किसी नेता के रूम से होकर गुज़रना पड़ता है. इसी के साथ सांसद ने यौन शोषण के आरोप भी लगाए. उन्होंने कहा कि सिर्फ पॉलिटिक्स ही नहीं कई ऐसी जगहें हैं, जहां महिलाओं का हरैसमेंट होता है और उन्हें पूछने वाला कोई नहीं है.
'90% औरतों को नेता के रूम से... ', महिला आरक्षण पर पप्पू यादव के बयान को लेकर बवाल
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव महिला आरक्षण बिल पर बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में 90% महिलाओं को किसी नेता के रूम से होकर गुज़रना पड़ता है. उन्होंने दलित महिलाओं के पार्टिसिपेशन पर भी बात की है.


इसके बाद पप्पू यादव ने दलित महिलाओं के पार्टिसिपेशन पर भी बात की. सांसद ने कहा कि किसी भी बड़े पद पर कोई दलित महिला नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि अगर सरकार देश में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो पहले जातिगत जनगणना कराए. सुनिए पप्पू यादव का पूरा बयान.
अब आपको उस बिल के बारे में बता देते हैं जिसकी चर्चा सांसद पप्पू यादव कर रहे थे. तीन साल पहले यानी साल 2023 में महिला आरक्षण बिल भारी बहुमत से पास हुआ. तब इस बिल के समर्थन में पड़े थे 454 वोट. केवल 2 वोट विरोध में पड़े. लेकिन कानून बन जाने और लागू होने में एक शर्त रखी गई है. शर्त है डिलिमिटेशन यानी परिसीमन की. और परिसीमन के लिए जरूरी थी जनगणना. सरकार इसे जल्दी लागू करने के लिए नया संविधान संशोधन बिल लेकर आई.
बीते दिनों संसद का विशेष सत्र बुलाया गया. इसमें 131वां कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट बिल पेश किया गया. इस बिल में लोकसभा की सीटें 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव था. इसके साथ ही 2011 की जनगणना पर डिलिमिटेशन को तुरंत लागू करना था. जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जा सके. इसके लिए जरूरत थी संविधान में संशोधन की.
इस संविधान संशोधन के लिए सदन में मौजूद दो तिहाई सदस्यों का वोट चाहिए था. सदन में 528 सांसद मौजूद थे. 528 का दो तिहाई होता है 352. लेकिन पक्ष में पड़े सिर्फ 298 वोट. विपक्ष में 230 वोट. बिल 54 वोटों से गिर गया. ये 12 साल के इतिहास में पहला मौका था. जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास ना करा पाई हो. कुल जमा बात फिर वही कि बिना परिसीमन के महिला आरक्षण लागू नहीं होगा. यानी 2029 के लोकसभा चुनाव में इसका फायदा नहीं मिलेगा.
ये भी पढ़ें: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 3 बिल पेश, परिसीमन पर संग्राम, पूरा मामला समझ लें यहां
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि अगर ये प्रस्ताव लागू हो जाता तो हिंदी भाषी राज्यों की लोकसभा सीटें बढ़ जातीं. लेकिन साउथ के राज्यों की हिस्सेदारी घट जाती. इसलिए इस बिल को लेकर विवाद है. मोदी सरकार में ये पहली बार है जब सरकार कोई बिल पास ना करा पाई हो.
वीडियो: पप्पू यादव ने मंच पर पीएम मोदी के कान में क्या कहा?





















