ओमान की खाड़ी में अमेरिका ने एक ईरानी झंडे वाले जहाज को पकड़ा था. जहाज का नाम है तोस्का. ये कंटेनर शिप 19 अप्रैल को अपने रास्ते पर था, लेकिन चाबहार पोर्ट के पास पहुंचते ही कहानी बदल गई. अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (US Central Command) ने इस जहाज को रोक लिया. सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने ईरानी जहाज को एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे 6 घंटे तक लगातार चेतावनी दी. लेकिन जहाज के क्रू ने कोई जवाब नहीं दिया.
ईरान के तोस्का जहाज में क्या था ऐसा, जिसे अमेरिका ने लिया अपने कब्जे में
America Seized Irani Vessel: अमेरिका ने ईरानी जहाज पकड़ा, तो ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये हमला गैरकानूनी है और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. उसने मांग की कि जहाज, उसके क्रू और उनके परिवार वालों को तुरंत छोड़ा जाए.


20 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट डाली थी. उन्होंने दावा किया था कि इस जहाज ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पास अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी से गुजरने की कोशिश की थी. इसलिए अमेरिका सेना ने इस जहाज को अपने कब्जे में ले लिया.
अब सवाल ये है कि आखिर उस जहाज में था क्या? समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सिक्योरिटी से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि शुरुआती जांच से मालूम होता है कि इस जहाज में 'डुअल-यूज' सामान हो सकता है. यानी ऐसा सामान जो फैक्ट्री के साथ-साथ सेना के भी काम आ सकता है.
जैसे मेटल, पाइप या इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स. अमेरिका का कहना है कि ऐसे सामान ईरान के मिसाइल प्रोग्राम में इस्तेमाल हो सकते हैं. रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि ये जहाज पहले भी ऐसे सामान ले जा चुका है.
अब एक दफा डुअल-यूज गुड्स (Dual use goods) को आसान भाषा में समझते हैं. डुअल-यूज गुड्स ऐसे सामान होते हैं, जिनका इस्तेमाल दो तरह से किया जा सकता है. एक सामान्य और रोजमर्रा की जरूरतों में और दूसरा सैन्य या युद्ध से जुड़े कामों के लिए.
जैसे कोई टेक्नोलॉजी या चीज रोजमर्रा की जिंदगी में मदद कर सकती है, लेकिन उसी का इस्तेमाल हथियार बनाने या जासूसी करने में भी हो सकता है. मसलन, माइक्रोचिप मोबाइल और कंप्यूटर में भी लगती है, और हथियारों में भी इस्तेमाल हो सकती है. एक और उदाहरण से इसे समझते हैं. कुछ केमिकल से दवाइयां या खेती में काम आने वाले रसायन बनाए जा सकते हैं और उनका इस्तेमाल खतरनाक हथियारों के लिए भी हो सकता है.
चलिए वापस तोस्का जहाज और ट्रंप पर आते हैं. इस जहाज का सफर भी कम दिलचस्प नहीं है. डेटा एनालिटिक्स स्पेशलिस्ट्स SynMax के मुताबिक, 25 मार्च को यह जहाज चीन के ताइचांग पोर्ट से चला. फिर 29-30 मार्च को दक्षिण चीन के गाओलान पोर्ट पहुंचा, जहां इसने कंटेनर लोड किए. इसके बाद 11-12 अप्रैल को मलेशिया के पोर्ट क्लांग पर भी रुका और वहां से भी सामान लिया. फिर ये लंबा सफर तय करता हुआ 19 अप्रैल को ओमान की खाड़ी तक पहुंचा, जहां अमेरिका ने इसे रोक लिया.
ईरान इस पूरी घटना से बुरी तरह नाराज है. 21 अप्रैल को विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये हमला गैरकानूनी है और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. तेहरान की मांग है कि जहाज, उसके क्रू और उनके परिवार वालों को तुरंत छोड़ा जाए. ईरान की सेना ने इसे आर्म्ड पायरेसी (Armed Piracy) यानी हथियारों के दम पर की जाने वाली लूट बताया है. ईरान ने कहा है कि जवाब देने में सक्षम हैं. जहाज पर मौजूद लोगों के परिवार को देखते हुए फिलहाल संभलकर कदम उठा रहा है. हालात कितने तनावपूर्ण हैं, इसका अंदाजा लग जाता है.
उधर अमेरिका अपने फैसले पर कायम है. उसका कहना है कि तोस्का पर पहले से ही प्रतिबंध लागू हैं और ये ईरान की शिपिंग कंपनी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन ग्रुप (IRISL) का हिस्सा है. इस पर 2019 से आरोप लगते रहे हैं कि वो मिसाइल प्रोग्राम से जुड़े सामान ढोती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी कहा कि इस जहाज का पहले से गैर-कानूनी गतिविधियों का इतिहास रहा है, इसलिए इसकी जांच जरूरी है. इस बीच चीन ने भी इस मामले पर चिंता जताई है. उसने कहा कि इस तरह जबरन जहाज को रोकना ठीक नहीं है और सभी देशों को हाल ही में हुए सीजफायर का सम्मान करना चाहिए.
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कुल जमा बात ये है कि, ये घटना अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा सकती है. एक तरफ अमेरिका है, जो सुरक्षा का हवाला दे रहा है. दूसरी तरफ ईरान है, जो इसे सीधी लूट बता रहा है.
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