"ये कुछ महीने पहले की बात है. प्रेजिडेंट ट्रंप UFC इवेंट में शामिल होने मियामी आए हुए थे. हम सब बैकस्टेज बैठे थे. अचानक प्रेजिडेंट ने मुझसे कहा, ज़रा पीएम मोदी को फ़ोन लगाओ. मैंने कहा, सर, भारत में अभी सुबह के 6 बज रहे होंगे, इतनी सुबह फ़ोन करना ठीक नहीं. तो उन्होंने कहा, तुम फ़ोन लगाओ, पीएम मोदी अभी जाग रहे होंगे. वो बिल्कुल मेरी तरह हैं. कम सोते हैं."
'पीएम मोदी बिल्कुल मेरी तरह हैं, वो भी...', ट्रंप का 'सुबह 6 बजे' वाला किस्सा
सर्जियो वाशिंगटन में हो रहे यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट में बात कर रहे थे. ये एक सालाना समिट है, जिसे U.S.-India Strategic Partnership Forum आयोजित करता है. इसी इवेंट में बात करते हुए गोर ने पहले इंडिया-अमेरिका के रिश्तों पर बात की और फिर पीएम मोदी और ट्रंप के रिश्ते की.


ये कहानी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सुनाई है. सर्जियो गोर ये बताने की कोशिश कर रहे थे कि यूएस और भारत के बीच ऑल इज़ वेल है. गोर का कहना है कि आप इस पूरी कहानी से समझ सकते हैं कि ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच के रिश्ते की असलियत क्या है. उन्होंने कहा, “जब आप किसी के दोस्त होते हैं, तो हर चीज़ पहले से तय करने की ज़रूरत नहीं होती. आप कभी भी उन्हें फ़ोन कर सकते हैं. मैं आप सभी को बताना चाहूंगा कि प्रेजिडेंट ट्रंप मोदी को असल में अपना दोस्त मानते हैं.”
दरअसल, सर्जियो वाशिंगटन में हो रहे यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट में बात कर रहे थे. ये एक सालाना समिट है, जिसे U.S.-India Strategic Partnership Forum आयोजित करता है. इसी इवेंट में बात करते हुए गोर ने पहले इंडिया-अमेरिका के रिश्तों पर बात की और फिर पीएम मोदी और ट्रंप के रिश्ते की.
इवेंट में इंडो-पैसिफिक कमांड से इंडो शब्द हटाने को लेकर हुए विवाद पर भी बात हुई. बता दें कि 1947 में बनी यूएस पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे पुरानी यूनिफाइड कमांड्स में से एक है, जिसका दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है. यूएस प्रेजिडेंट डॉनल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत को देखते हुए पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया गया था. लेकिन जून की शुरुआत में, अमेरिका ने इस यूनिफाइड कमांड का पुराना नाम बहाल कर दिया.
इस पर गोर ने कहा, “मैं बस एक बात कहना चाहता हूं, क्योंकि नाम बदलने को लेकर बहुत से लोगों ने काफी हंगामा किया था. हां, नाम बदला गया, लेकिन हम अभी भी वहां मौजूद हैं. भारत आज भी किसी भी दूसरे देश की तुलना में अमेरिका के साथ कहीं ज़्यादा मिलिट्री एक्सरसाइज़ करता है. हर महीने कुछ न कुछ होता रहता है, चाहे भारतीय सैनिक यहां आएं या अमेरिकी सैनिक उस क्षेत्र में जाएं. अगले दो हफ़्तों में भारतीय नौसेना का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका का दौरा करेगा.”
गोर ने और क्या-क्या कहा?
- जो लोग कही भी बैठकर ट्वीट करते हैं और कहते हैं कि भारत-अमेरिका का रिश्ता मुश्किल में है, उन्हें असलियत देखनी चाहिए. चाहे व्यापार हो, रक्षा हो या लोगों के बीच संबंध…हर मामले में ये रिश्ता मजबूत है.
- राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देते हैं और व्यापार, तकनीक, रक्षा और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए काम करते रहते हैं.
- अमेरिकी कंपनियों का भारत पर भरोसा पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है. राष्ट्रपति ट्रंप की सरकार भारत को एक भरोसेमंद और लंबे समय का स्ट्रैटजिक पार्टनर मानती है.
- ट्रेड डील का काम लगभग पूरा हो चुका है. अब सिर्फ 1 से 2 % कानूनी औपचारिकताएं बाकी हैं.
पिछले हफ्ते अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ली ग्रीर दो दिनों के लिए नई दिल्ली आए थे. दोनों देशों ने समझौते का ढांचा तैयार कर लिया है और अब सिर्फ कुछ मुद्दों पर अंतिम सहमति बननी बाकी है.
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