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हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी कास्ट सर्टिफिकेट से 'चमार' शब्द क्यों हटाना चाहते हैं?

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 'चमार' समुदाय के लिए कास्ट सर्टिफिकेट पर 'मेघवाल' शब्द का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की घोषणा की है. कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे 'फूट डालो, राज करो' की नीति करार दिया है.

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नायब सिंह सैनी ने मेघवाल समुदाय के एक कार्यक्रम में ये घोषणा की. (एक्स)

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  • हरियाणा सरकार ने कास्ट सर्टिफिकेट में चमार शब्द को मेघवाल से बदलने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजने का निर्णय लिया है, ताकि समुदाय के लोग यह नाम अपना सकें।
  • मेघवाल उत्थान समिति की मांग पर यह कदम उठाया गया है क्योंकि मेघवाल ने बताया कि चमार शब्द से सामाजिक कलंक जुड़ा हुआ है और वे कास्ट सर्टिफिकेट में अपना नाम बदलना चाहते हैं।
  • इस बदलाव से आरक्षण की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा क्योंकि मेघवाल और चमार समूह के लिए आरक्षण के अलग-अलग कोटे पहले से निर्धारित हैं और यह केंद्र सरकार पर निर्भर है।

हरियाणा में चमार समुदाय अनुसूचित जाति (SC) समूह में आते हैं. बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार कागजों (कास्ट सर्टिफिकेट) में इस समुदाय का नाम बदलने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि उनकी सरकार कास्ट सर्टिफिकेट पर ‘चमार’ शब्द को ‘मेघवाल’ से बदलने के लिए केंद्र को सिफारिश करने जा रही है.

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की घोषणा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 23 अगस्त को रेवाड़ी के बावल में मेघवाल समुदाय के एक कार्यक्रम में ये घोषणा की. हरियाणा के चमार समुदाय के एक हिस्से ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. चमार समुदाय राज्य में अनुसूचित जाति (SC) कैटेगरी में लिस्टेड है. पांच बार की कांग्रेस विधायक और दलित नेता गीता भुक्कल ने इस घोषणा को बांटो और राज करो कि कोशिश बताया है. उन्होंने कहा कि इससे चमार समुदाय के लोगों के बीच असंतोष पैदा हुआ है. 

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मेघवाल उत्थान समिति की ओर से बावल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, 

जैसा कि आपकी ओर से डिमांड की गई है, 'चमार' समुदाय के सदस्य 'मेघवाल' शब्द अपनाना चाहते हैं, ताकि अनुसूचित जाति का कोई सदस्य 'चमार' की जगह 'मेघवाल' शब्द का इस्तेमाल कर सके. इस तरह का कास्ट सर्टिफिकेट जारी करने की सुविधा देने के लिए मैं केंद्र सरकार को एक सिफारिश भेजूंगा.

दरअसल केंद्र सरकार ही इस पर अंतिम मुहर लगा सकती है, क्योंकि अनुसूचित जातियों का नाम संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 और इससे जुड़े सेंट्रल नोटिफिकेशन के तहत तय होता है. 

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मेघवाल उत्थान समिति ने की थी मांग

दरअसल मेघवाल उत्थान समिति ने ये मांग मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने रखी थी. उनका कहना था कि ‘चमार’ शब्द से सामाजिक कलंक जुड़ा हुआ है. समिति के सचिव भूपेंद्र मेघवाल ने दावा किया कि राज्य सरकार ने पहले ही लगभग 60 हजार कास्ट सर्टिफिकेट जारी कर दिए हैं. इन पर मेघवाल लिखा हुआ है. उन्होंने बताया, 

हम चाहते हैं कि चमार समुदाय के दूसरे सदस्यों को भी अपने सर्टिफिकेट्स पर जाति के कॉलम में 'मेघवाल' लिखवाने की इजाजत दी जाए. इस समुदाय के कुछ लोग (खासकर राजस्थान में) पहले से ही इस नाम का इस्तेमाल करते हैं.

आरक्षण की स्थिति में बदलाव नहीं होगा

समिति के अध्यक्ष और बिजली डिपार्टमेंट के रिटायर SDO वेद प्रकाश बावलिया ने बताया कि सैनी सरकार ने अक्टूबर 2024 में अनुसूचित जाति के आरक्षण में सब कैटेगराइजेशन किया था. इससे पहले मेघवाल और चमार दोनों ही अनुसूचित जाति कैटेगरी में आते थे. 

उन्होंने बताया कि सब कैटेगराइजेशन से पहले कोई भी शख्स अपने कास्ट सर्टिफिकेट पर चमार या मेघवाल लिख सकता था, क्योंकि दोनों के लिए आरक्षण की एक जैसी व्यवस्था थी. लेकिन सब कैटेगराइजेशन के बाद हरियाणा में चमार और मेघवाल को अनुसूचित जातियों के अलग-अलग ग्रुप्स में रखा गया है. 

बावलिया ने बताया कि मेघवाल समुदाय फिलहाल वंचित अनुसूचित जाति समूह (DSC) में शामिल है. वहीं चमार समुदाय अन्य अनुसूचित जाति समूह (OSC) में आते हैं. हरियाणा में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लिए इन दोनों समूहों का अलग-अलग कोटा निर्धारित है. इसलिए एक उप-जाति के लोग इस आधार पर दूसरी उप-जाति में शिफ्ट नहीं कर सकते कि दोनों अनुसूचित जाति से हैं.

बावलिया समझाना चाहते हैं कि अगर ये बदलाव होता भी है, फिर भी दोनों समुदायों के आरक्षण की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा. यानी चमार समुदाय के लोग कास्ट सर्टिफिकेट में मेघवाल नाम लिखवा सकते हैं. लेकिन उनको वंचित अनुसूचित जाति समूह (DSC) के कोटे के आरक्षण का फायदा नहीं मिलेगा. 

कांग्रेस नेता ने किया विरोध

कांग्रेस नेता गीता भुककल ने अनुसूचित जाति के सब कैटेगराइजेशन के प्रस्ताव का विरोध किया. उन्होंने कास्ट सर्टिफिकेट पर चमार की जगह मेघवाल लिखने के सैनी के प्रस्ताव पर निशाना साधते हुए कहा, 

मुख्यमंत्री का बयान गलत है. यह हमारे समुदाय को स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने पहले ही हमारे समुदाय को बांटने की कोशिश की है. संविधान के हिसाब से हमारी जाति पहले से ही अनुसूचित जाति है, फिर उन्होंने ऐसा बयान क्यों दिया?

रिटायर्ड IAS अधिकारी ने उठाए सवाल

अनुसूचित जाति से आने वाले पूर्व IAS अधिकारी धनपत सिंह ने भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि चमार को मेघवाल कहने से क्या बदल जाएगा. उन्होंने कहा,

 गांधीजी ने अनुसूचित जाति के लिए हरिजन शब्द दिया था. उसके पीछे भी अच्छी नीयत थी. लेकिन लोगों की मानसिकता का हम क्या कर सकते हैं? 'हरिजन' भी अब एक गाली की तरह लगने लगा है. जैसे 'अछूत'. दलित शब्द को भी अब उसी नजरिए से देखा जाता है. जब तक लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी, बदलाव नहीं होगा.

मेघवाल समुदाय अनुसूचित जाति समूह में आती है. ये लोग अधिकतर हरियाणा के उन हिस्सों में रहते हैं जो राजस्थान के बॉर्डर से लगता है. यहां इस समुदाय को राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली माना जाता है. हरियाणा में अनुसूचित जाति समूह की हिस्सेदारी 20 फीसदी है. इसमें चमार सबसे बड़ा समुदाय है.

अनुसूचित जाति समूह में सब कैटेगराइजेशन

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 1 अगस्त, 2024 को एक ऐतिहासिक फैसला दिया. पीठ ने राज्यों को अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों को सब कैटगराइज करने की इजाजत दी, ताकि इन समूहों में सबसे ज्यादा पीछे रही जातियों को कोटा दिया जा सके.

अक्टूबर 2024 में लगातार तीसरी बार बीजेपी की हरियाणा की सत्ता में वापसी हुई. सरकार ने पहली कैबिनेट में ही सुप्रीम कोर्ट के सब कैटेगराइजेशन से जुड़े फैसले को नोटिफाई कर दिया. कैबिनेट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने कहा था, ‘हमारी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान किया है.’

हालांकि सैनी सरकार की कैबिनेट ने नोटिफिकेशन तो जारी किया, लेकिन अब तक विधानसभा में इसको लेकर कोई एक्ट नहीं बना है. नोटिफिकेशन के मुताबिक 20 फीसदी आरक्षण को दो हिस्से में बांटा गया है. वंचित अनुसूचित जाति समूह (DSC) के लिए 10 प्रतिशत और अनुसूचित जाति समूह (OSC) के लिए भी 10 प्रतिशत.

हरियाणा में कुल 36 जातियां वंचित अनुसूचित जाति समूह (DSC) की लिस्ट में हैं. ये जातियां हैं : वाल्मीकि, बंगाली, बरार, बटवाल, बोरिया, अद धर्मी, बाजीगर, बंजारा, चनल, दागी, दरेन, देहा, धानक, धोगरी, डुमना, गगरा, गंधीला, जुलाहा, खटीक, कोरी, मरीजा, मजहबी, मेघवाल, नट, ओड, पासी, पेरना, फरेरा, संहाई, संहाल, सांसी, संसोई, सपेला, सरेरा, सिक्लीगर और सिरकीबंद.

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में सभी जातियां एक समान नहीं हैं. कुछ जातियां बाकी से ज्यादा पिछड़ी हुई हैं. हरियाणा सरकार ने इसी आधार पर अनुसूचित जाति समूह (DSC) की लिस्ट बनाई थी. ताकि इन जातियों को आरक्षण का फायदा मिल सके. मेघवाल समुदाय इस लिस्ट में शामिल है, वहीं चमार अन्य अनुसूचित जाति समूह में आते हैं. 

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