आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी हुई है. एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर में कथित भ्रष्टाचार को लेकर उनकी गिरफ्तारी की है. लेकिन इस गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक घमासान होता दिख रहा है. सत्येंद्र जैन ने अपनी गिरफ्तारी को पंजाब चुनाव से जोड़ा है. वहीं अरविंद केजरीवाल का दावा है कि जैन की गिरफ्तारी गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर हुआ है. दूसरी तरफ बीजेपी का दावा है कि कैग रिपोर्ट के आधार पर एक्शन हो रहा है.
सत्येंद्र जैन पंजाब चुनाव के चलते गिरफ्तार हुए? बीजेपी और AAP आमने सामने
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में कथित भ्रष्टाचार को लेकर AAP नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी हुई है. इस गिरफ्तारी को लेकर बीजेपी और आप के नेता आमने सामने आ गई है. AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल का आरोप है कि जैन की गिरफ्तारी अमित शाह के इशारे पर हुई है, वहीं सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि कानून के हिसाब से कार्रवाई हो रही है.

‘पंजाब चुनाव के चलते हुए गिरफ्तारी’
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट में पेशी के दौरान ACB ने सत्येंद्र जैन की न्यायिक हिरासत की मांग की, जबकि जैन के वकील एन हरिहरन ने गिरफ्तारी को गैर-कानूनी बताते हुए रेगुलर जमानत अर्जी दाखिल की है. सत्येंद्र जैन ने कोर्ट में पेशी के दौरान आरोप लगाया कि पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए उनकी गिरफ्तारी हुई है. पंजाब में AAP की सरकार है. जैन को पार्टी ने पंजाब में सह-प्रभारी बनाया है. यहां साल 2027 की शुरुआत में चुनाव होने की उम्मीद है. जैन ने कोर्ट में एंट्री लेते हुए कहा,
यह पंजाब चुनावों के चलते किया जा रहा है.
वकील ने कहा, टेंडर में कोई रोल नहीं
सत्येंद्र जैन के वकील ने कोर्ट को बताया कि टेंडर प्रोसेस में जैन की कोई भूमिका नहीं थी, उनकी गिरफ्तारी बिल्कुल गलत है. उन्होंने कहा, “ACB का आरोप है कि जैन ने मनमाने ढंग से एक STP की स्थिति बदल दी, जबकि फाइलों की नोटिंग और फैक्ट्स दिखाते हैं कि ऐसा कोई बदलाव कभी लागू ही नहीं हुआ था.”
जैन के वकील ने आरोप लगाया कि जिस नोटिंग की बात कर विभाग को 20 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया जा रहा है, वह नोटिंग कभी हुई ही नहीं थी.
केजरीवाल ने साधा अमित शाह पर निशाना
AAP के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को लेकर अमित शाह पर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि गृह मंत्री अमित शाह ने एसीबी को जैन की गिरफ्तारी के निर्देश दिए. उन्होंने लिखा,
एसीबी के एक अधिकारी ने बताया, सुबह तक ACB का सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार करने का कोई प्लान नहीं था. फिर दोपहर में अमित शाह का सीधे फ़ोन आया कि गिरफ़्तार कर लो. तब गिरफ़्तार किया. ज़ाहिर है कि अब गिरफ्तारी इस बात से नहीं होती कि किसी ने कोई गुनाह किया है या नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वे दोनों किसे गिरफ़्तार करना चाहते हैं.

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा,
एक तरफ बीजेपी है, जो दिल्ली में एक के बाद एक घोटाले कर रही है, फिर भी उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं हो रहा है. दूसरी तरफ सत्येंद्र जैन को एक बार फिर से झूठे मामले में फंसाया जा रहा है. पहले भी उनको एक मनगढ़ंत मामले में फंसाया गया था. दो साल तक जेल में रखा गया, बाद में पता चला कि कोई सबूत नहीं था और उनकी गिरफ्तारी गलत थी.
आतिशी ने भी सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को आने वाले पंजाब चुनाव से जोड़ा. उन्होंने कहा कि पंजाब में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले है, बीजेपी उसको लेकर फिर से AAP नेताओं के खिलाफ साजिश रचने में जुट गई है.
बीजेपी ने गिरफ्तारी का बचाव किया
बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के आरोपों को खारिज किया है. उनका दावा है कि सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी दिल्ली जल बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार को लेकर हुई है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा,
सारी कार्रवाई कैग रिपोर्ट के आधार पर चल रही है. एजेंसी अपना काम कर रही है. जो बीज बोया है, वह सामने तो आएंगे ही. सत्येंद्र जैन ने जल बोर्ड में स्कैम किया था. इसीलिए जेल गए हैं.
दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने भी साजिश के आरोपों को खारिज किया है. उनका दावा है कि एसीबी ने अपनी जांच में जैन की भूमिका साबित होने के बाद ही कार्रवाई की है. उन्होंने कहा,
जो बुरे काम करता है, उसे उसका नतीजा भुगतना पड़ता है. जैन की गिरफ्तारी जल बोर्ड में घोटाला करने के चलते ही हुई है. थोड़ा समय लगेगा, लेकिन उनको पक्के तौर पर सजा मिलेगी.
क्या है DJB टेंडर में हेरफेर का मामला?
एसीबी के जॉइंट पुलिस कमिश्नर विक्रमजीत सिंह के मुताबिक, जांच में पता चला है कि टेंडर में यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने के लिए तकनीकी शर्तों में हेरफेर की गई. उनके मुताबिक, टेंडर की पायलट स्टडी नहीं कराई गई और जरूरी पैरामीटर हटा दिए गए. फाइनेंशियल जांच में पता चला कि यूरोटेक से जुड़ी यूनिट्स ने मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज (नागेंद्र यादव) और मेसर्स सृजनहार (पंकज वर्मा) के जरिए कमीशन का पैसा घुमाया. दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन सीईओ उदित प्रकाश राय को 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली. ये पैसे उनके और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों से मिली है. इस पैसे से अचल संपत्ति खरीदी गई.
टेंडर की टाइमलाइन
इस टेंडर की पूरी प्रक्रिया साल 2021 में शुरू हुई. तब सत्येंद्र जैन जल मंत्री के पद पर थे. 7 अक्तूबर 2021 को IFAS तकनीक का प्रस्ताव आया, जिसे 14 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन ने सैद्धांतिक मंजूरी दी. 21 और 23 दिसंबर, 2021 को जैन, सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और सीईओ उदित प्रकाश राय की बैठक में टीओआर तय हुआ. 28 दिसंबर 2021 के प्रस्ताव से 1,546.32 करोड़ रुपये का नया एस्टीमेट बना. 17 मई 2022 को टेक्निकल बिड खुली और 30 मई 2022 को अप्रूव हुई थी. एसीबी का आरोप है कि टेंडर जारी होने से पहले ही गोपनीय शर्तें आरोपियों के फोन पर शेयर की जा रही थी.
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