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धर्मेंद्र प्रधान विरोध के बाद मोदी सरकार में इस्तीफा देने वाले दूसरे मंत्री, पहला कौन था?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफा दे दिया है, लेकिन इससे पहले भी केंद्री की Modi Government के एक मंत्री ने इस्तीफा दिया था. उस मंत्री पर महिलाओं के यौन शोषण का आरोप लगा था.

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धर्मेंद्र प्रधान (बाएं) के पहले MJ अकबर (दाएं) ने भी इस्तीफा दिया था. (फोटो- आज तक)

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  • धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया, जो कॉकरोच जनता पार्टी के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद हुआ।
  • दिल्ली के जंतर मंतर पर लगभग एक महीने से चल रहे छात्रों के संघर्ष और पेपर लीक के विवादों ने इस इस्तीफे की मांग को मजबूती दी।
  • इस घटना के बाद सरकार ने छात्रों को मुआवजा देने और कानूनी कार्रवाई से बचने की सहमति जताई, जबकि विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

तकरीबन एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन हो रहा था. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग थी. छात्रों के अलावा विपक्षी दलों ने भी सीजेपी के इस प्रोटेस्ट को खुलकर समर्थन दिया. सरकार पर ऐसा दबाव बना कि शनिवार, 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. ये घटना इसलिए अहम है कि 12 साल की मोदी सरकार में विपक्ष के दबाव में मंत्रियों के इस्तीफे न के बराबर हुए हैं. इससे जुड़ा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का एक बयान खूब चलता है कि ये यूपीए की नहीं. एनडीए की सरकार है. इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते. लेकिन, 25 जुलाई को ये ‘तिलिस्म’ भी टूट गया.

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धर्मेंद्र प्रधान नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे ऐसे मंत्री हैं, जिनके इस्तीफे की मांग विपक्ष कर रहा था और चाहे जैसे भी हो. ये मांग पूरी हुई. 

पहले मंत्री कौन थे?

धर्मेंद्र प्रधान से पहले मोदी सरकार में मंत्री रहे मोबासिर जावेद अकबर यानी MJ अकबर को भी विरोध के बाद इस्तीफा देना पड़ा था. बात 2018 की है. तब MJ अकबर मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री थे. उन पर MeToo अभियान के समय यौन उत्पीड़न का आरोप लगा. कम से कम 20 महिला पत्रकारों ने एमजे अकबर पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. 

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एमजे अकबर पेशे से पत्रकार थे. देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनकी एंट्री राजनीति में कराई थी. बाद में कांग्रेस छोड़कर वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. BJP सरकार ने उन्हें अपनी पार्टी का प्रवक्ता बनाया. बाद में 2016 में उन्हें विदेश राज्य मंत्री का पद सौंपा गया लेकिन यौन शोषण के आरोप लगने के बाद सरकार और अकबर दोनों पर ही दबाव बढ़ रहा था. विवाद काफी बढ़ने लगा तो साल 2018 में अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

ये केंद्र की मोदी सरकार में विरोध के नतीजे से निकला पहला इस्तीफा था.

अब 2018 के बाद 2026 में एक और मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को विवादों में घिरने के वजह से इस्तीफा देना पड़ा है.  लोग इसे मोदी सरकार में एक दुर्लभ घटना के तौर पर देख रहे हैं. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के लीड में हो रहे प्रदर्शन के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है. इस विरोध प्रदर्शन का केंद्र राजधानी दिल्ली का जंतर मंतर था. सीजेपी के इस प्रोटेस्ट मंच पर आए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर 28 जून से भूख हड़ताल शुरू कर दी थी. कई दिनों तक इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लोगों की नजरें ठीक से नहीं गई थीं. 

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दिल्ली पुलिस की कार्रवाई ने गुस्सा बढ़ाया

इसी बीच एक बड़ी घटना हुई. दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से ‘जबरन’ उठा लिया और सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया. इस घटना ने लोगों के मन में रोष जगाया और फिर आंदोलन ने जोर पकड़ लिया. इस दौरान CJP और सोनम की ओर से 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ का ऐलान किया गया. मार्च में छात्राओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कार्रवाई ने छात्रों के गुस्से को और बढ़ा दिया.

छात्र अपनी मांग पर डटे रहे. सरकार छात्रों के कुछ मांगों को मानने का भरोसा दिया था, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कुछ खास रिएक्शन सामने नहीं आया. सरकार पेपर लीक की वजह से आत्मघाती कदम उठाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और मार्च में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने की शर्त मान ली थी.

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर डटे रहे छात्र

बावजूद इसके प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री की मांग पर डटे रहे. शनिवार, 25 जुलाई को CJP और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच फिर बैठक होने वाली थी, लेकिन इसमें भी वही शर्त थी. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा. अब धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री हो चुके हैं. प्रधान ने अपने इस्तीफे के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. जिसमें उन्होंने कहा, 

‘मैंने NEET पेपर लीक की पूरी जिम्मेदारी ली और कभी भी स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा. लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने बाधाएं पैदा की और छात्राओं को गुमराह करने की कोशिश की.’

धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी पोस्ट में बताया कि वो अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री मोदी को सौंप चुके हैं. देश की विपक्षी पार्टियों के नेता भी लंबे समय से केंद्र की मोदी सरकार पर ‘अंहकार’ का आरोप लगाते रहे हैं. विपक्षी नेताओं का ऐसा कहना है कि विवादों के बाद भी मंत्री इस्तीफा नहीं देते. उनका ऐसा भी दावा है कि 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद से ही जारी है.  

वीडियो: राजधानी: क्या CJP प्रोटेस्ट को लेकर पुलिस पर भी कार्रवाई होगी?

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