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ग़ज़ब! मुंबई पुलिस ने कूदने के इरादे से छत पर चढ़ी महिला को बातों में उलझाकर बचा लिया

महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने पूरी घटना का वीडियो भी ट्वीट किया है.

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नवी मुंबई के वाशी की इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस की तारीफ हो रही है.
अनिल देशमुख. महाराष्ट्र के गृहमंत्री हैं. उन्होंने एक वीडियो ट्वीट किया है. वीडियो में एक महिला है. किसी इमारत की छत की पानी की टंकी पर खड़ी हुई. कूदने की तैयारी में. इसी वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी है, जो सीढ़ी की मदद से उस तक पहुंची है, सीढ़ी पर ही खड़ी होकर वो उस महिला से बात कर रही है. मराठी भाषा में. उसे कूदने से रोक रही है, समझा रही है. तभी पीछे से एक पुलिसकर्मी आता है और उस महिला को पकड़कर पीछे खींच लेता है. इस वीडियो के साथ देशमुख ने लिखा,
वाशी पुलिस के अधिकारियों ने फायर ब्रिगेड की मदद से एक महिला की जान बचा ली जो सुसाइड की तैयारी कर रही थी. उनके इस काम की तारीफ़ होनी चाहिए. जब भी हम तनाव में हों, हम सभी को अपने परिवार और दोस्तों से मदद लेनी चाहिए, क्योंकि कोई भी मुद्दा बातचीत से हल हो सकता है.
'आज तक' से जुड़े पत्रकार निलेश पाटिल की रिपोर्ट के मुताबिक़, मामला वाशी की जय जवान सोसाइटी का है. यहां सोसाइटी वालों ने 3 जनवरी को दोपहर 3:30 बजे के करीब 20 साल की महिला को इमारत की टंकी पर चढ़ते हुए देखा. फौरन पुलिस को इत्तला की. पुलिस ने उस ऊंचाई पर पहुंचने के लिए फायर ब्रिगेड की मदद ली. महिला धमकी दे रही थी कि वो कूद जाएगी. महिला कांस्टेबल ने उसका ध्यान बंटाने के लिए उससे बात करनी शुरू कर दी. इसी दौरान दो पुलिस कांस्टेबल पीछे से आए और महिला को पकड़ लिया.  रिपोर्ट के मुताबिक महिला की मानसिक हालत ठीक नहीं है. बाक़ी की जानकारी के लिए पुलिस तफ्तीश में जुटी है. अगर सुसाइड के ख्याल आ रहे हैं तो क्या करें? अगर आपको आत्महत्या जैसे ख्याल आ रहे हैं, या फिर आपकी जान पहचान में कोई ऐसा है जो डिप्रेशन में जा रहा है तो कुछ बातों का ध्यान रखिए. हमने इस बाबत बात की डॉक्टर एकता पुरी से. डॉक्टर पुरी अपोलो हॉस्पिटल में चीफ क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट हैं. 21 साल से प्रैक्टिस कर रही हैं.  उन्होंने बताया,
अगर आपको कोई अप्रोच कर रहा है, बता रहा है कि उसे ये तकलीफ है, तो सबसे पहले आप उसकी बात सुनिए. जजमेंटल मत होइए. उसकी क्या तकलीफ है, क्यों है, ये सब कुछ सोच-समझकर ही उससे बात करिए. उसको बोलने का मौका दीजिए. उनको ऐसी सलाह मत दीजिए जो उन्हें पहले से पता हैं- जैसे एक्सरसाइज कर लो, टाइम पे सो लो वगैरह. वो डिप्रेशन या उदासी में इसीलिए हैं क्योंकि वो ये सब नहीं कर पा रहे हैं. आपको उनके साथ कनेक्ट होना है. गलत और सही बाद की बात है, लेकिन जो उनकी मानसिक स्थिति है, पहले वो समझिए. सबसे पहले इस बात को स्वीकार करिए कि वो परेशान हैं, और उन्हें मदद की ज़रूरत है. कई बार ऐसा होता है कि सब कुछ जानते-समझते हुए भी एक ऐसा पॉइंट आता है व्यक्ति के जीवन में,जब वो हार मानने के बेहद करीब होता है. वो इतना बेचैन हो जाता है, कि उसे और कोई रास्ता समझ नहीं आता. उस मोमेंट में आप किसी भी एक व्यक्ति से बात कर लें. वो कोई भी हो सकता है. उसे बताएं कि आपको ऐसा फील हो रहा है. भले ही वो आपका बच्चा हो, डोमेस्टिक हेल्प हो, मेट्रो में मिलने वाला कोई अजनबी हो, फेसबुक का कोई फ्रेंड हो. कोई भी. कई बार हम अपने ही अंदर इन चीज़ों को दबा कर रखते हैं, अपने पूर्वाग्रह बना लेते हैं. लेकिन जैसे ही हम उन्हें किसी के साथ शेयर करते हैं, हमें लगता है कि ये इतनी बड़ी बात तो नहीं थी. दूसरा एक उपाय है. अगर आपको कोई भी नहीं मिलता अपनी बात कहने के लिए, तो एक डायरी लिखना शुरू कर दीजिए. जो भी आपके अंदर है, एक बार उसे लिखिए. उसमें अपनी बुरी से बुरी और अच्छी से अच्छी बातें लिख डालिए. लिखते-लिखते ही हमें कई बार समझ आ जाता है. कि शायद इस बात का कुछ न कुछ हल मेरे पास ज़रूर होगा.
मदद के दूसरे रास्ते अगर आप अकेले हैं, और आपके पास बात करने के लिए कोई उपलब्ध नहीं हैं, तो आप NGO और हेल्पलाइंस की मदद ले सकते हैं. कुछ नंबर्स आप यहां ट्राई कर सकते हैं: 1. नाम: आसरा नंबर:9820466276 कब कॉल कर सकते हैं? 24×7 2. नाम: सहाय हेल्पलाइन नंबर:080 – 25497777 कब कॉल कर सकते हैं? सोमवार से शनिवार सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक. 3. नाम: फोर्टिस नेशनल हेल्पलाइन नंबर:8376804102 कब कॉल कर सकते हैं? 24×7 अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो डिप्रेशन से जूझ रहा है या फिर सुसाइडल हो रहा है, तो उनसे बात करने में इन चार चीज़ों का ज़रूर ख्याल रखिए.

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