2023 के मॉनसून सत्र में ऐसा ही एक उदाहरण आज देखने को मिला. दिल्ली में अधिकारियों की पोस्टिंग और नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने सूबे की सरकार के हित में फैसला दिया, तो उसे पलटने के लिए केंद्र ने एक बिल ले आई. ये लोकसभा से पास हो ही गया था. और आज राज्यसभा में पेश हुआ. यहां पास हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी हो जाएगा. इस घटना को कैसे देखा जाए? checks and balances में परिष्कार की तरह. या फिर सरकार द्वारा संघीय ढांचे और सुप्रीम कोर्ट के क्षेत्राधिकार में दखल की तरह?
दी लल्लनटॉप शो: दिल्ली बिल राज्यसभा से पास, सुप्रीम कोर्ट के बनाए कानून को मोदी सरकार ने क्यों पलटा?
दिल्ली बिल के पास होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी हो जाएगा
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