शुद्धिकरण आंदोलन खत्म होने के बाद माओ ‘संकल्प-पत्र’ लेकर आया. इसने पहले पार्टी और बाद में चीन पर माओ के एकाधिकार की बुनियाद रखी. इसकी गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाइए कि सौ सालों के इतिहास में चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी सिर्फ़ दो संकल्प-पत्र लेकर आई है. पहली बार 1945 में, जबकि दूसरी बार 1981 में. इन दोनों संकल्प-पत्रों में क्या था? इनका महत्व क्या है? और, आज हम ये सब क्यों बता रहे हैं? देखें वीडियो.
दुनियादारी: चाइना में शी जिनपिंग की अंतिम चुनौती खत्म होने वाली है?
चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी अपने इतिहास का तीसरा संकल्प-पत्र लेकर आ रही है.
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