रिंकू बेहद ग़रीब घर से आते हैं. उनके पिता घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचाने का काम करते थे. और पूरा परिवार उसी सिलेंडर बांटने वाली एजेंसी से सटे दो कमरों वाले मकान में रहता था. अलीगढ़ स्टेडियम के पास रहने वाले इस परिवार के पांच बच्चों में रिंकू तीसरे नंबर पर हैं. रिंकू का एक बड़ा भाई ऑटोरिक्शा चलाता है, दूसरा एक कोचिंग सेंटर में काम करता है. 2018 के ऑक्शन में बिकने के बाद रिंकू ने इंडियन एक्सप्रेस के देवेंद्र पांडेय से कहा था,
रिंकू सिंह ने आखिरी ओवर की 5 बॉल में 5 छक्के जड़कर मैच जिताया, UP के इस खिलाड़ी की पूरी कहानी
नौवीं क्लास में फेल हो चुके रिंकू पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे. इसलिए उन्हें पता था कि उनकी किस्मत क्रिकेट से ही पलट सकती है. ऐसे में उन्होंने पूरा ध्यान इसी पर लगा दिया.
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'सोचा था 20 लाख में जाऊंगा. लेकिन मुझे 80 मिल गए. पैसे मिलने के बाद सबके पहले मेरे दिमाग में ये आया कि मैं अपने भाई की शादी में योगदान दे पाऊंगा. और बहन की शादी के लिए भी पैसे बचा पाऊंगा. और एक अच्छे से घर में शिफ्ट हो जाऊंगा.'
दरअसल रिंकू ने इस दिन से पहले बहुत बुरे दिन देखे थे. इस ऑक्शन से तीन साल पहले उनके परिवार पर पांच लाख का कर्ज़ था. और इस परिवार की कमाई में ये पैसा वापस करना आसान नहीं था. नौवीं क्लास में फेल हो चुके रिंकू पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे. इसलिए उन्हें पता था कि उनकी किस्मत क्रिकेट से ही पलट सकती है. ऐसे में उन्होंने पूरा ध्यान इसी पर लगा दिया. पूरी कहानी जानने के लिए देखें वीडियो.
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