1977 में क्या कोई सोच सकता था कि इमरजेंसी का दंश झेल चुका देश इंदिरा गांधी को दोबारा मौका देगा? उस दौर में क्या किसी काॅलेज गोइंग स्टूडेंट के घरवाले और नाते-रिश्तेदार इंदिरा गांधी को दोबारा प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखने के लिए तैयार होंगे, जिनके बच्चों ने लाठियां खाने से लेकर सलाखों के पीछे जाने तक की ज्यादतियों को सहा था? देखिए वीडियो.
क्या शंकराचार्य के कहने पर इंदिरा ने चुना था हाथ का साथ?
नए चुनाव चिन्ह के साथ इंदिरा गांधी ने 1980 में बड़ी जीत हासिल की थी.
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