इस शहर में फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों का एक कैंप है, ऐन अल-हिलवाह. शाब्दिक अर्थ निकलता है, सुंदर और प्यारा बसंत. लेकिन इतिहास उठाकर देखें तो इसमें बसंत का ब तक नहीं दिखता. 01 लाख से अधिक की आबादी वाला ये कैंप हिंसा, आतंक और बर्बादी का गढ़ बन गया है. 29 जुलाई को कैंप के अंदर दो गुटों में लड़ाई शुरू हुई. अलजज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 जुलाई की रात तक फ़ायरिंग होती रही. 11 लोग मारे जा चुके हैं. 40 से अधिक घायल हुए हैं. यूएन ने संघर्षविराम का दावा तो किया है, लेकिन हालात इतने ख़राब हैं कि इस पर भरोसा करना मुश्किल है.
दुनियादारी: क्या इजरायल ने फिलिस्तीन शरणार्थी कैंप में जंग कराई, क्या बवाल मचने वाला है?
लेबनन का शहर सिडॉन या साएदा इस समय एक बड़े बवाल का केंद्र बना हुआ है.
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