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क्या ट्रंप का फेसबुक ब्लॉक करने से ज़करबर्ग के गुनाह धुलेंगे?

ज़करबर्ग के स्टैंडर्ड से देखिए, तो ये फ़ैसला बड़ा साहसी लगेगा. मगर क्या ये सच में साहसी है?

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6 जनवरी की दोपहर हथियारों से लैस एक भीड़ ने अमेरिकी संसद पर हमला किया. इस मामले में एक बड़ा सवाल पुलिस पर भी है. सवाल, जैसे कि पुलिस भीड़ को रोकने में नाकाम क्यों रही? ब्लैक प्रोटेस्टर्स के साथ ग़ैरज़रूरी हिंसा करने वाली पुलिस ने दंगाई भीड़ के साथ नरमी क्यों दिखाई? इन सवालों और अनुमानित कार्रवाइयों से इतर इस मामले में एक बड़ी अपडेट फ़ेसबुक से भी आई है. उसने ट्रंप को बैन कर दिया है. आमतौर पर बेहद कैलकुलेटिव और मिडियॉकर बर्ताव करने वाले ज़करबर्ग के स्टैंडर्ड से देखिए, तो ये फ़ैसला बड़ा साहसी लगेगा. मगर क्या ये सच में साहसी है? या फिर ज़करबर्ग ने बहुत जोड़-घटाव करके अपने पत्ते खेले हैं? उन्हें सच में फ़ेसबुक के दुरुपयोग से माहौल के बिगड़ने का अंदेशा है या उनकी ये नैतिकता दिखावटी है? ट्रंप पर अब बैन लगाने से पहले ज़करबर्ग का क्या रवैया था? आज के एपिसोड में विस्तार से बताते हैं आपको.

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