कई देशों के पास इतनी मात्रा में वैक्सीन है कि पूरी आबादी को कई बार बूस्टर डोज़ दी जा सकती है. इतनी संपन्नता के बावजूद यूरोप और ऑस्ट्रेलिया तबाही के कगार पर खड़े हैं. जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री ने तो यहां तक कह दिया है कि या तो वैक्सीन लगेगी या फिर कफ़न. डॉक्टर्स और वैज्ञानिक सख़्त लॉकडाउन और कोरोना प्रोटोकॉल्स लागू करने की अपील कर रहे हैं. कुछ सरकारों ने इस अपील पर अमल किया भी है. इस बीच क़यामत की चेतावनियों के बीच एक नया वर्ग तैयार हो गया है. ये वर्ग लापरवाह तो है ही, साथ में हिंसक भी. कोरोना को लेकर लाए गए सख़्त नियमों के बीच यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में दंगे हो रहे हैं. कोरोना के बढ़ते ख़तरे को नज़रअंदाज करने वाले लोग कौन हैं? उनके तर्क क्या हैं? और, सरकारों को सख़्ती क्यों अपनानी पड़ रही है?
दुनियादारी: यूरोप में एंटी वैक्सीन प्रोटेस्ट के चलते कोरोना काबू से बाहर हुआ!
कोरोना के बढ़ते ख़तरे को नज़रअंदाज करने वाले लोगों के तर्क क्या हैं?
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