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'IPL मैच देखने गए, स्टेडियम में घुसने नहीं दिया', पहलवानों के आरोप पर दिल्ली पुलिस ने क्या जवाब दिया?

बजरंग पूनिया ने पूछा, हम जानना चाहते हैं कि हमें क्यों रोका गया.

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एक महीने से पहलवानों का प्रदर्शन जारी (फोटो- PTI)

दिल्ली के जंतर मंतर पर करीब एक महीने से पहलवानों का धरना जारी है. देश के कई नामी-गिरामी पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. साथ ही WFI पर वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप लगाया गया. हालिया समय में पहलवानों ने धरने को लोगों तक पहुंचाने के कई प्रयास किए हैं. 7 मई को उन्होंने एक कैंडल मार्च निकाला था.

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इसके बाद महिला पहलवानों ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से सपोर्ट की मांग के लिए चिट्ठी लिखी थी. अब शनिवार, 20 मई को पहलवानों ने दिल्ली पुलिस पर एक आरोप लगाया है. पहलवानों का कहना है कि वे दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स (DC vs CSK) के बीच अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे IPL मैच देखने गए थे. लेकिन पुलिस ने उन्हें स्टेडियम के भीतर नहीं जाने दिया. इंडिया टुडे से मिली जानकारी के मुताबिक, पहलवान बजरंग पूनिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया,

“हमारे पास टिकट थे. हम लोग मैच देखने के लिये जा रहे थे. अरुण जेटली स्टेडियम में पुलिस ने हमें रोका. हमारे पास टिकट होने के बावजूद. हम जानना चाहते हैं कि हमें क्यों रोका गया.”

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पूनिया ने आगे कहा कि आजाद देश में ऐसा नहीं होना चाहिए. हम सिर्फ मैच देखने गए थे. उन्होंने कहा कि हम इन सबसे डरने वाले नहीं हैं. 

इस पर दिल्ली पुलिस का भी जवाब आया है. दिल्ली पुलिस ने ट्विटर पर एक बयान जारी कर बताया,

"कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पहलवानों को आईपीएल मैच देखने से रोके जाने संबंधित भ्रामक खबर प्रसारित कर रहे हैं. फिरोजशाह कोटला मैदान पर किसी भी वैध टिकट या पासधारी को नहीं रोका गया है. सभी को उनके नियत गेटों से प्रवेश दिया गया है.

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पहलवानों का सवालिया दावा

बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों की जांच के लिए सरकार ने मैरी कॉम की अध्यक्षता में एक ओवरसाइट कमेटी बनाई थी. हालांकि, पहलवानों का दावा है कि कमेटी बृजभूषण को बचा रही है. समिति के सामने पेश हुए पहलवानों ने फिर से कुछ आरोप लगाए हैं. उन्होंने समिति की कार्यवाही के दौरान की कुछ कथित घटनाओं का जिक्र किया है. बताया है कि उन्हें अपने उत्पीड़न का वीडियो-ऑडियो प्रूफ देने के लिए कहा गया. आरोप है कि सुनवाई के दौरान एक समिति मेंबर ने बृजभूषण को पिता जैसा बताया.

नाम न छापने की शर्त पर तीन पहलवानों ने इंडियन एक्सप्रेस को समिति की कार्यवाही से जुड़ी जानकारी दी थी.

-एक पहलवान ने बताया कि उससे समिति के एक मेंबर ने कहा कि बृजभूषण सिंह पिता की तरह हैं. खुले तौर पर कहा गया कि पहलवानों ने बृजभूषण के 'मासूम व्यवहार' को गलत समझा.

-एक पहलवान ने बताया कि सिंह के करीबी रहे WFI कर्मचारियों की भीड़ सुनवाई की जगह पर जुट गई जो कि "डराने वाला" था.

-एक दूसरे पहलवान ने बताया कि पीड़ितों ने बयान देते समय कमरे में केवल समिति की महिला सदस्यों के रहने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया.

-पहलवान ने कहा कि पहली सुनवाई से ही समिति ने उन्हें अपनी बात बताने का 'आत्मविश्वास' नहीं दिया. बताया कि पहली सुनवाई से ही कुछ लड़कियां बहुत असहज थीं क्योंकि उन्हें अकेले बुलाया जा रहा था. पहलवान ने बताया कि अगली बार से वो ग्रुप में अंदर गए.

-पहलवान ने बताया कि सुनवाई के दौरान पीड़िता से यौन उत्पीड़न की घटना के बारे में दोबारा से बताने के लिए कहा गया.

-एक पहलवान ने महसूस किया कि कई समिति सदस्य उनके प्रति असंवेदनशील थे. आरोप लगाया कि वो जल्दी-जल्दी सुनवाई निपटा रहे थे और पहलवानों की बातों को अनसुना कर रहे थे. बताया कि बयान पूरा होने से पहले ही हमें आगे बढ़ने के लिए कहा जा रहा था.

-समिति के कुछ सदस्यों ने पीड़िताओं से यौन उत्पीड़न का सबूत पेश करने को कहा. पहलवान ने कहा कि यौन उत्पीड़न होने पर कौन महिला रिकॉर्ड कर पाएगी.

-एक पहलवान ने बताया कि सुनवाई के दौरान समिति के एक सदस्य ने एक पीड़ित को ट्रेनिंग पर लौटने को कहा और कहा कि समिति के सामने पेश होने का कोई मतलब नहीं था.

-दो पहलवानों ने अपनी पुलिस शिकायत में ये भी दावा किया है कि गवाही देते समय ऐसे मौके आए जब समिति ने वीडियो रिकॉर्डिंग बंद कर दी.

रिपोर्ट के मुताबिक, समिति में शामिल राधिका श्रीमन ने तीनों पहलवानों के आरोपों पर टिप्पणी करने से मना किया है.

वीडियो: पहलवानों के प्रदर्शन में मिले ताऊ बृजभूषण पर भड़क गए, Lallantop को ये कविता सुना दी

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