यूनेस्को वाले बहुत खलिहर बैठे हैं, हमारे यहां पीएम बने, राष्ट्रगान गाया जाए कुछ भी हो ये उसे बेस्ट घोषित कर देते हैं. अब लोग कहते हैं तो होता ही होगा, यूनेस्को वाले हमारा फोन नहीं उठाते तो हम फेसबुक युनिवर्सिटी के ज्ञान को सच मान लेते हैं. वैसे आपको वजह न समझ आ रही हो तो जानिए वजह ये है कि यूनेस्को के नाम पर झूठ फैलाया जाता है. अफवाह..गप्प..स्पैम...होक्स... यूनेस्को वालों के पास और भी काम हैं वो बिनाका गीत माला जैसे टॉप 10 का चार्ट बनाते नहीं बैठते. तो बिलकुल नई ही बकर ये है कि यूनेस्को ने 2000 के नोट को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ करेंसी घोषित कर दिया है. वाह बहुत अच्छी बात है, जिस नोट में
रक्षामंत्री एंकर के बताए अनुसार 120 मीटर नीचे से लुपलुपी मारने की क्षमता हो, जीपीएस हो, नेलकटर हो, वाटर प्यूरीफायर भी हो, पोर्टेबल फैन घुसा हो, कैलकुलेटर समाहित हो, फोल्डेबल चेयर धरी हो, हवा भर कर तकिया बनाने की सुविधा भी दी गई हो, पैराशूट के साथ इन्वर्टर और VLC मीडिया प्लेयर लगा हो. साथ में LED लाइट और सैटेलाइट फोन जैसी सुविधा हो. वो काहे न दुनिया की बेस्ट करेंसी बने.
नमूने देखिए
नमूना नंबर दो
नमूना नंबर तीन
नमूना नंबर चार
वैसे कोई बड़ी बात नहीं है कि यूनेस्को इस करेंसी को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ करेंसी घोषित कर दे. इस नोट में कई ऐसी चीजें हैं जो इसे दूसरी किसी भी नोट से अलग बनाती हैं. बस यूनेस्को को इतनी फुर्सत मिल जाए कि शिक्षा, प्रकृति और समाज विज्ञान, कल्चर और कम्युनिकेशन वगैरह के माध्यम से जो वो विश्व शांति जैसे टुच्चे काम कर रही है उससे समय निकाल कर ऐसे महान काम करने लगे. वैसे तो यूनेस्को के काम में शिक्षा एवं संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना है. लेकिन उसे चाहिए कि वो बीच-बीच में मोदी जी को बेस्ट पीएम घोषित करने जैसे जरुरी काम भी करे.
तो वो क्या कारण हैं जिनके कारण ये दुनिया की सर्वश्रेष्ठ करेंसी है. ये इकलौती ऐसी नोट है, जो असली होकर भी नकली नजर आती है. आप सोचिये नकली नोट बनाने वालों को इसका कितना नुकसान होगा. जिस नोट को वो नकली बनाने जाएंगे वो पहले से ही नकली नजर आ रही है. ये दरअसल मोदी सरकार की सोची-समझी रणनीति है. नकली नोट छपने वालों का कांफिडेंस हिलाने की. साथ ही आप इस नोट की फोटोकॉपी से भी काम चला सकते हैं. आप बैंक से एक नोट निकालिए उसकी कई कॉपी कराइए, ध्यान रहे कलर्ड कॉपी. और उसे सब्जी वाले को दे आइए किराने का सामान भर लाइए. कौन पहचान पायेगा, असली नकली सब एक सा दिखता है. ये नोट रंग छोड़ता है, मानिए कि आप नई सफेद कमीज लेते हैं. और गलती से उसमें दो हजार का नया नोट भूल जाते हैं, आप जब उसे बाहर निकालेंगे तो आपको एक नई कमीज मिलेगी. आप इससे छूटे हुए रंग से होली खेल सकते हैं, घर पुतवा सकते हैं, महाउर/आलता लगा सकते हैं. इसको सुखा लीजिए फिर रंग की नई फैक्ट्री डाल सकते हैं. ये सिर्फ नोट नहीं है, टाइम मशीन है. आपको बचपन में ले जाती है. देखने में बिलकुल चूरन वाले नोट जैसा दिखता है, इसे देख हम बचपन में लौट जाते हैं. ये हमें
भारतीय चिल्ड्रेन बैंक वाले नोट की याद दिलाते हैं. आदमी किसी नोट को देख नोस्टैल्जिक हो जाए, अब और क्या सबूत चाहिए उसे दुनिया का बेस्ट नोट घोषित करने के लिए.

साथ ही ये इकलौता नोट है जो अधूरा छपा है. स्याही कम थी क्या जी? पहले किसी नोट में गए-बीते ही गलतियां निकलती थीं, लेकिन इसमें तो गलतियों का पुलिंदा है. इंसान गलतियों का पुतला है तो ये नोट गलतियों का पुतलाघर है. इतनी गलतियां एक ही नोट के साथ होना अपने आप में अनूठा है. अब क्या बाकी है? क्यों न इसे यूनेस्को इसे बेस्ट करेंसी घोषित करे वो न घोषित करे तो क्या होता है. हम तो माने ही बैठे हैं.
बेस्ट पीएम मोदी और यूनेस्को के नाम पर आप बुद्धू बन गए हो