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'Bikanervala' का स्वाद हम तक पहुंचाने वाले केदारनाथ अग्रवाल नहीं रहे

'बीकानेरवाला' की शुरुआत से पहले केदारनाथ अग्रवाल पुरानी दिल्ली की सड़कों पर बाल्टी लिए भुजिया और रसगुल्ले बेचते थे. लेकिन उनकी मेहनत से आज 'बीकानेरवाला' के 60 से ज़्यादा आउटलेट हैं.

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काकाजी बीकानेरवाला की स्थापना से पहले पुरानी दिल्ली की सड़कों पर बाल्टी में भुजिया और रसगुल्ले बेचते थे.(फ़ोटो/Bikarnevala Facebook)

लाला केदारनाथ अग्रवाल (Lala Kedarnath Aggarwal). मिठाई और स्नैक्स ब्रांड ‘बीकानेरवाला’ चेन के फाउंडर  (Bikarnervala Founder Death). 13 नवंबर को उनका निधन हो गया. केदारनाथ अग्रवाल 86 वर्ष के थे. ‘बीकानेरवाला’ की स्थापना से पहले वो पुरानी दिल्ली की सड़कों पर बाल्टी में भुजिया और रसगुल्ले बेचते थे. लेकिन उनकी मेहनत से आज 'बीकानेरवाला' के 60 से ज़्यादा आउटलेट हैं.

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पहली दुकान बीकानेर में थी

केदारनाथ अग्रवाल को लोग 'काकाजी' के नाम से भी बुलाते थे. वो बीकानेर के रहने वाले थे. उनके परिवार के पास एक मिठाई की दुकान थी. उस दुकान का नाम ‘बीकानेर नमकीन भंडार’ था. दुकान में मिठाइयां और स्नैक्स बेचे जाते थे. ये दुकान बीकानेर में साल 1905 से थी. लेकिन 'काकाजी' के सपने बड़े थे, इसलिए 1950 के दशक की शुरुआत में वो अपने भाई सत्यनारायण अग्रवाल के साथ दिल्ली चले आए.

दोनों ने यहां अपने परिवार की रेसिपीज़ के हिसाब से नमकीन और रसगुल्ले बनाए. और उनको पुरानी दिल्ली की सड़कों पर बेचना शुरू किया. दोनों ने बहुत मेहनत की और दिल्ली के चांदनी चौक में एक दुकान खोल ली. दुकान में नमकीन और रसगुल्लों के अलावा मूंग दाल हलवा, बीकानेरी भुजिया और काजू कतली जैसी चीज़ें बनने लगीं. ये सभी मिठाइयां लोगों को बहुत पसंद आईं. जल्दी ही दोनों भाइयों की दुकान 'बीकानेरवाला' के नाम से फेमस हो गई.

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काकाजी एक कस्टमर को गिफ्ट देते हुए. (फ़ोटो/Bikarnevala Facebook)
सड़क से इंटरनेशनल आउटलेट तक का सफर

'काकाजी' ने अपने भाई के साथ 1956 में सड़क पर बाल्टियों में रसगुल्ले और नमकीन बेचना शुरू किया था. उसी समय 'काकाजी' के दूसरे भाई जुगल किशोर अग्रवाल भी दिल्ली आए. उन्होनें केदारनाथ से कहा कि उन्हें बीकानेर का नाम रोशन करने के लिए भेजा गया था, और ये क्या नाम (बीकानेर भुजिया भंडार) रख दिया है. उसके बाद से दुकान का नाम ‘बीकानेरवाला’ नाम रख दिया. 

साल 1962 में काकाजी ने दिल्ली के मोती बाजार में पहली दुकान खरीदी. यहां शुद्ध देसी घी की मिठाइयां मिलती थीं. ये दुकान बहुत जल्दी फेमस हो गई. साल 1972-73 में करोल बाग में एक और दुकान ली गई. यहां स्टाफ भी बीकानेर से बुलाया गया. आज की तारीख़ में ये दुकान 'बीकानेरवाला' की सबसे पुरानी दुकान जानी जाती है. साल 1988 में 'बीकानेरवाला' को बढ़ाने के लिए ‘बिकानो’ लॉन्च किया गया और इसे विश्व स्तर पर ले जाया गया. साल 2003 में बिकानो चैट कैफे भी खोले गए. ये एक टाइप के फास्ट फूड सर्विस रेस्टोरेंट हैं. आज 'बीकानेरवाला' के भारत में 60 से  ज़्यादा आउटलेट हैं. अमेरिका, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों में 'बीकानेरवाला' मिल जाएंगे.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए 'बीकानेरवाला' ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर श्याम सुंदर अग्रवाल ने ‘काकाजी’ के निधन पर कहा,

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“काकाजी का जाना सिर्फ बीकानेरवाला के लिए नुकसान नहीं है, बल्कि यह पाककला की दुनिया का ऐसा नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है. उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व हमेशा हमारी पाक यात्रा का मार्गदर्शन करेगा.”

वहीं बीकानेरवाला ग्रुप के डायरेक्टर और काकाजी के सबसे बड़े बेटे राधे मोहन अग्रवाल ने कहा, 

“बीकानेरवाला काकाजी को विदाई देता है और हम जिम्मेदारी से उनकी विरासत को आगे बढ़ाएंगे. बीकानेरवाला एक ऐसी जगह है, जहां हर डिश एक कहानी कहता है और हर कस्टमर हमारे बढ़ते परिवार का हिस्सा है.”

लाला केदारनाथ अग्रवाल के तीन बेटे हैं- राधेमोहन अग्रवाल, नवरत्न अग्रवाल और रमेश अग्रवाल. वे परिवार के साथ मिलकर बिज़नेस को आगे बढ़ा रहे हैं. 

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