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हेट स्पीच, BJP से जुड़ी रहीं... कौन हैं विक्टोरिया गौरी, जिनके हाईकोर्ट जज बनने पर विरोध हो रहा है?

गौरी के लिए सरकार की 'हां' के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया

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एडवोकेट एल विक्टोरिया गौरी (फोटो- vvla.org)

मद्रास हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनीं एल विक्टोरिया गौरी के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई मंगलवार, 7 फरवरी को करेगा. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई कोर्ट की उचित बेंच करेगी.

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दरअसल, एडवोकेट एल विक्टोरिया गौरी को मद्रास हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाए जाने का कुछ वकीलों ने विरोध किया था. इसके खिलाफ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की. एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने तत्काल सुनवाई की मांग की. जिस पर CJI चंद्रचूड़ ने शुक्रवार, 3 फरवरी को सुनवाई का भरोसा दिया था.

सरकार ने गौरी का नाम मंजूर किया

सोमवार, 6 फरवरी को केंद्र सरकार ने कॉलेजियम के सुझाए नामों पर हामी भर दी. केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी जानकारी देते हुए एक ट्वीट किया.

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उन्होंने लिखा,

“भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुसार, निम्नलिखित वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट, कर्नाटक हाईकोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट के एडिशनल जज के रूप में नियुक्त किया जाता है. मैं उन सभी को अपनी शुभकामनाएं देता हूं."

कौन हैं एल विक्टोरिया गौरी?

1995 में तमिलनाडु बार एसोसिएशन में एडवोकेट के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने वाली एल विक्टोरिया गौरी ने मदुरई लॉ यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई पूरी की थी. गौरी को वकालत में 21 साल से ज्यादा का अनुभव है. वी विक्ट्री लीगल एसोसिएट्स की वेबसाइट के मुताबिक गौरी पहली महिला वकील हैं जिन्होंने कन्याकुमारी जिले में अपना कार्यालय बनाया था. उन्हें साल 2020 में मद्रास हाईकोर्ट का असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था. गौरी ने ‘जननी जननम’ सहित कई किताबें भी लिखी हैं.

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क्यों हो रहा है एल विक्टोरिया गौरी का विरोध?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एडवोकेट एल विक्टोरिया गौरी का नाम कॉलेजियम की तरफ से 17 जनवरी को सरकार को भेजा गया था. इसके बाद से ही गौरी की नियुक्ति का विरोध हो रहा था. विरोध कर रहे वकीलों का आरोप है कि गौरी ने कई बार नफरत फैलाने वाले भाषण दिए हैं. गौरी पर ये भी आरोप है कि वो भाजपा महिला मोर्चा का हिस्सा रह चुकी हैं. जो कि कोर्ट की स्वतंत्रता के खिलाफ है.

वकीलों की तरफ से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भी एक पत्र भेजा गया था. पत्र में वकीलों ने कहा था कि गौरी की नियुक्ति कोर्ट की स्वतंत्रता को कम करेगी. वकीलों ने गौरी के दो इंटरव्यू सबूत के तौर पर सामने रखे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक वकीलों ने आरोप लगाया है कि इन दोनों इंटरव्यू में गौरी के बयान नफरत फैलाने वाले थे.

गौरी ने बचाव में क्या कहा?

वकीलों द्वारा लगाए गए आरोपों पर एल विक्टोरिया गौरी का बयान भी सामने आया था. 22 जनवरी को इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में गौरी ने कहा कि वो भाजपा के सभी पदों से जून 2020 में ही इस्तीफा दे चुकी हैं. उनके मुताबिक सितंबर 2020 में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए जाने से पहले ही उन्होंने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.   

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