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ईरान-अमेरिका में अच्छे से बात चल रही थी, तभी आया नेतन्याहू का फोन और तस्वीर बदल गई

Iran-US Islamabad Talks: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक फोन कॉल ने बातचीत को पटरी से उतार दिया और बिना किसी समझौते के ही दोनों टीमें अपने-अपने देश वापस लौट गईं.

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नेतन्याहू (बाएं) के फोन कॉल के बाद बातचीत पटरी से उतर गई. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका की बातचीत फेल हो गई. अब ईरान ने दावा किया है कि मीटिंग के बीच में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को फोन कॉल किया था. इस एक फोन कॉल ने बातचीत को पटरी से उतार दिया और बिना किसी समझौते के ही दोनों टीमें अपने-अपने देश वापस लौट गईं.

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NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया,

"मीटिंग के दौरान नेतन्याहू ने वेंस को फोन कॉल किया. इस कॉल से अमेरिका-ईरान बातचीत से ध्यान हट गया और इजरायल के हितों पर केंद्रित हो गया. अमेरिका ने बातचीत की टेबल पर वह हासिल करने की कोशिश की जो वह युद्ध से हासिल नहीं कर सकता था."

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सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने पाकिस्तान में हो रही बातचीत में अच्छी नियत से हिस्सा लिया था. यह भी कहा कि उनके जाने से पहले जेडी वेंस की प्रेस कॉन्फ्रेंस ‘गैर-जरूरी’ थी. अराघची ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्र के हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध और तैयार है. हालांकि, वॉशिंगटन ने नेतन्याहू के कॉल की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है.

शनिवार, 11 अप्रैल को अमेरिका और ईरानी डेलीगेशन के बीच बातचीत शुरू हुई. वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने नेगोशिएशन में अमेरिका की तरफ से लीड किया, जबकि ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने ईरानी तरफ से लीड किया. कई राउंड की बातचीत के बाद जेडी वेंस ने रविवार, 12 अप्रैल की सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पत्रकारों से बात करते हुए जेडी वेंस ने कहा,

"हम पिछले 21 घंटे से इस बातचीत में लगे हुए हैं और हमने ईरानियों के साथ कई अहम बातें की हैं. यह अच्छी खबर है. बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं. मुझे लगता है कि यह ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है, न कि अमेरिका के लिए. इसलिए, हम किसी समझौते पर पहुंचे बिना अमेरिका वापस जा रहे हैं... उन्होंने हमारी शर्तें मानने से मना कर दिया है."

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वहीं, ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त थीं. इस वजह से समझौते का रास्ता नहीं निकला. ईरान ने बताया कि अमेरिकियों का इरादा उन लक्ष्यों को हासिल करना था जिन्हें वे ईरान के खिलाफ युद्ध से हासिल नहीं कर पाए थे. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के कंट्रोल का मुद्दा और देश से न्यूक्लियर मटीरियल हटाना शामिल था, लेकिन ईरानी डेलीगेशन ने उस कोशिश को नाकाम कर दिया.

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परमाणु हथियार को लेकर ‘फंसी’ बातचीत

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका के लिए सबसे बड़ा मुद्दा ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकना है. उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका को अपना न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम रोकने या परमाणु हथियार न बनाने को लेकर कोई ठोस कमिटमेंट नहीं दिया. यही बातचीत के पटरी से उतरने का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है. 

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