क्या है कंपनी की कहानी
सिंगापुर की एक तेल कंपनी है. खाने के तेल वाली नहीं बल्कि कच्चे तेल यानी पेट्रोल-डीजल वाली. नाम है हिन लियोंग ट्रेडिंग यानी HLT. कंपनी की स्थापना 1963 में चीन से सिंगापुर आए लिम उन कुइन ने की थी. यह एशिया की सबसे बड़ी तेल व्यापार कंपनियों में से एक है. ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि तेल का कारोबार जोखिम भरा था. लेकिन HLT के संस्थापक लिम ने इसे अपनी ताकत बनाया. उन्हें काफी बोल़्ड तरीके से बिजनेस किया. और अपनी कंपनी को टॉप की कंपनियों में शामिल कर लिया.
लेकिन लगातार जोखिमभरे दांवपेचों के चलते कंपनी को मोटी रकम भी चाहिए थे. ऐसे में उसने दुनियाभर के बैंकों से लोन लिए. लेकिन साल 2020 उऩके लिए बुरा रहा. कोरोना वायरस के चलते तेल की कीमतें लगातार जमीन की ओर जाती गई. HLT ने तेल में खूब पैसा लगा रखा था. और कोरोना के बाद भी लगा रही थी. यह जोखिम उसे महंगा पड़ गया. ऐसे में कंपनी की सारी नकदी खत्म हो गई. बैंकों से पहले ही कंपनी काफी पैसा ले चुकी थी. ऐसे में संकट तय था.

HLT के मालिक लिम उन कुइन. वे कॉर्पोरेट जगत में ओके लिम के नाम से जाने जाते हैं.
ऐसे में कंपनी से अप्रैल, 2020 की शुरुआत में बैंकों ने लोन चुकाने को कहा. बैंक पहले ही कंपनी को तारीख पर तारीख दे चुके थे. ऐसे में जब पैसे नहीं आए, तो उन्होंने सिंगापुर में केस कर दिया. इसके बाद कंपनी के सारे राज बाहर आ गए. कंपनी ने बताया कि उस पर करीब 3.85 बिलियन डॉलर यानी करीब 29,446 करोड़ रुपये का कर्जा है. कंपनी को कई साल से घाटा हो रहा था. लेकिन ये बात दबाकर रखी गई. कंपनी ने झूठा मुनाफा दिखाया. और तो और, बैंकों के पास गिरवी रखी संपत्ति को भी चुपके से बेच दिया गया.
लिम उन कुइन ने कंपनी में हुई सारी गड़बड़ियों को अपने ऊपर लिया है. उनकी ओर से कोर्ट में एफिडेविट दिया गया. इसमें कहा गया कि उनके कहने पर ही कंपनी ने घाटे को छुपाया. फर्जी मुनाफा दिखाया. लिम ने कंपनी से इस्तीफा भी दे दिया है.
कंपनी की ओर से कहा गया है कि तेल की कीमतें गिरने, कोरोना वायरस और पहले से चल रहे घाटे के चलते संकट बड़ा हुआ. वह अभी इतनी रकम चुकाने की स्थिति में नहीं है. 'रॉयटर्स' के अनुसार बैंक ने लोन पर छह महीने का मोरेटोरियम मांगा है. यानी कंपनी का कहना है कि छह महीने तक उसे लोन चुकाने की मोहलत दी जाए.
किन-किन बैंकों ने दे रखा है लोन
रॉयटर्स के अनुसार, करीब 23 बैंकों ने HLT कंपनी को लोन दे रखा है. इनमें बैंक ऑफ चाइना, भारत का आईसीआईसीआई, अमेरिका का जेपी मॉर्गन चेज़, ब्रिटेन का एचएसबीसी, नीदरलैंड का एबीएन एमरो, सिंगापुर का डीबीएस बैंक, फ्रांस का सोशियट जनरल जैसे बड़े बैंक शामिल हैं. सबसे ज्यादा लोन एचएसबीसी का बकाया है. उसके करीब 4620 करोड़ HLT पर उधार है. इसके बाद एबीएन एमरो आता है, जिसके 2310 करोड़ रुपये बाकी हैं.
ICICI ने क्या किया
HLT की खबर सामने आने के बाद ICICI बैंक के शेयर में 21 अप्रैल को नौ करीब सात प्रतिशत की गिरावट देखी गई. फिर ICICI ने माना कि उसने इस कंपनी को कर्ज दे रखा है. न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' के मुताबिक, ICICI बैंक ने 21 अप्रैल को बताया-
हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि कारोबार की सामान्य प्रक्रिया के तहत सवालों के घेरे में आई कर्जदार समूह कंपनी को हमने भी कर्ज दिया है. हम अपने हितों की रक्षा के लिए कदम उठा रहे हैं.ICICI बैंक ने हालांकि यह नहीं बताया कि उसने कितना कर्ज दिया है. लेकिन 'रॉयटर्स' ने बताया है कि बैंक ने HLT को करीब 770 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है. इसमें से 573 करोड़ रुपये इन्वेंटरी लोन के रूप में दिए गए हैं. यानी यह लोन टेंपररी बेसिस पर दिया गया और बैंक इतनी रकम का सामान जब्त कर सकता है.

आईसीआईसीआई बैंक ने लोन वसूली के लिए प्रयास शुरू किए हैं.
'रॉयटर्स' के अनुसार, बैंक ने HLT की साथी कंपनी ओशियन टैंकर्स के दो तेल के जहाज जब्त करने की अर्जी दे दी है.
कितना है ICICI का बैड लोन
दिसंबर, 2019 तक की तिमाही तक ICICI बैंक का बैड लोन करीब 43, 453 करोड़ रुपये के करीब है. बैड लोन यानी ऐसा लोन, जो फंस गया है और इसके वापस आने की संभावना कम है. ऐसे में HLT कंपनी ने ICICI के सामने एक और समस्या खड़ी कर दी है.
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