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नाबालिग आदिवासी लड़की के 'रेप-हत्या' से गुस्साए लोग, पुलिस स्टेशन को आग लगा दी

परिवार का आरोप है कि लड़की का रेप कर उसकी हत्या की गई.

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कालियागंज में चार दिनों से प्रदर्शन जारी (फोटो- आज तक)

पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर में नाबालिग लड़की की मौत मामले में अब भी विरोध प्रदर्शन जारी है. 25 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने कालियागंज पुलिस स्टेशन में आग लगा दी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस क्वार्टर को भी आग के हवाले कर दिया. पिछले हफ्ते उत्तरी दिनाजपुर के साहेबघाटा इलाके में एक नाबालिग लड़की का शव एक तालाब में मिला था. लड़की एक रात पहले से लापता थी. पीड़ित परिवार का कहना है कि लड़की का रेप कर उसकी हत्या कर दी गई. लड़की अनुसूचित जनजाति की थी.

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25 अप्रैल को आदिवासी संगठनों ने थाने का घेराव किया था. आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में सही से कार्रवाई नहीं कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों ने थाने के भीतर घुसने की कोशिश की. लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया. जब प्रदर्शनकारी नहीं माने तो उनपर लाठी चार्ज भी किया गया. इसके बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी. फिर हिंसक हुई भीड़ ने थाने और कई गाड़ियों में आग लगा दी. इस हमले में कई पुलिसवाले घायल भी हुए.

लड़की के शव को घसीटा गया

इससे पहले दिन में प्रदर्शनकारियों ने रायगंज में एसपी ऑफिस का भी घेराव किया था. इस प्रदर्शन का नेतृत्व बीजेपी ने किया था. बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है. वहीं टीएमसी ने बीजेपी पर मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है. BJP के कई नेताओं ने घटना से जुड़ा एक वीडियो शेयर करते हुए पुलिस पर मृतका के शव का अपमान करने का आरोप लगाया था.

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दरअसल, लड़की की मौत के एक दिन बाद एक वीडियो सामने आया था. इसमें कुछ पुलिसवाले लड़की डेडबॉडी को घसीटते हुए ले जा रहे थे. दो दिन बाद, रायगंज के एसपी सना अख्तर ने बताया कि शव को घसीटने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है. रिपोर्ट के आधार पर उन सभी के खिलाफ विभागीय जांच की गई थी. 

लड़की के परिवार वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. पुलिस ने परिवार की शिकायत के बाद जावेद अख्तर नाम के एक युवक और उसके पिता को गिरफ्तार किया था. लड़की की मां की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ IPC की धारा-302 (मर्डर) और POCSO कानून के तहत केस दर्ज किया था.

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इससे पहले 22 अप्रैल को पुलिस ने बताया था कि नाबालिग लड़की के पोस्टमॉर्टम में रेप की पुष्टि नहीं हुई है. सूत्रों के मुताबिक पोस्टमॉर्टम में यौन उत्पीड़न, रेप या गैंगरेप के कोई निशान नहीं मिले हैं.

NHRC ने नोटिस जारी किया

उधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है. 25 अप्रैल को NHRC ने कहा कि अगर यह घटना सही है तो यह मृतक पीड़ित लड़की के गरिमा के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा है. आयोग ने बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी से 6 हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. NHRC ने कहा कि किसी व्यक्ति का मानव अधिकार मौत के बाद खत्म नहीं होता है.

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