"लोग भारतीय कंपनियों के बारे में कई तरह की बातें कर रहे हैं. मुझे नहीं पता दुनिया में हर कोई भारतीय कंपनियों को क्यों निशाना बनाता है. कोई ब्रिटेन के ट्रायल्स पर सवाल क्यों नहीं उठाता? क्योंकि भारतीय ट्रायल्स पर सवाल उठाना आसान है."एला ने कहा कि कोवैक्सीन किसी भी मामले में फाइजर की वैक्सीन से कम नहीं है. उन्होंने बताया कि भारत बायोटेक एकमात्र फर्म है जिसने कोविड वैक्सीन प्रक्रिया पर पांच लेख प्रकाशित किए हैं. उन्होंने ये भी बताया कि भारत के अलावा 12 से अधिक देशों में कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल किए गए हैं. पाकिस्तान, नेपाल में अभी ट्रायल चल रहे हैं. एला ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत बायोटेक एक वैश्विक कंपनी है. भारत बायोटेक का किसी राजनीतिक पार्टी से कनेक्शन नहींः एला "कई लोग कह रहे हैं कि हमने डेटा में पारदर्शिता नहीं दिखाई है. लेकिन उन लोगों में धैर्य होना चाहिए. उन्हें हमारे द्वारा प्रकशित दुनियाभर के कई जर्नल्स में छपे 70 से अधिक लेखों को पढ़ना चाहिए. हमें इस बात का गर्व है कि दुनिया में BSL-3 उत्पादन की सुविधा सिर्फ हमारे पास है. यह अमेरिका के पास भी नहीं है. हम दुनिया के किसी भी हिस्से में हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति में मदद करने को तैयार हैं."
सवालों में घिरी कोवैक्सीन पर भारत बायोटेक के चीफ बोले-हम फाइजर से कम नहीं
बताया कितने देशों में चल रहा ट्रायल और कितने जर्नल्स में कोवैक्सीन से जुड़े लेख छपे.
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भारत बायोटेक के सीएमडी कृष्णा इल्ला. (तस्वीर: एएनआई)
कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए भारत सरकार ने बायोटेक की वैक्सीन कोवैक्सीन को मंजूरी दी है. बायोटेक के फाउंडर और चेयरमैन कृष्णा एला ने 4 जनवरी को वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भारत बायोटेक की वैक्सीन को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब दिए. उन्होंने कहा,
कृष्णा ने आगे बताया कि वैक्सीन को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और मैं यह साफ़ करना चाहता हूं कि मैं और मेरे परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा हुआ है. हम वैक्सीन के मामले में अनुभवी कंपनी हैं और अभी तक 16 टीके बना चुके हैं.
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