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'सिगरेट से जला के मुझसे बदलवाया गया इशरत केस का हलफनामा'

पूर्व अंडर सेक्रेटरी मणि का बड़ा आरोप, 'CBI और SIT के लोगों ने टॉर्चर करके बनवाया हलफनामा.' UPA सरकार पर सवाल.

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फोटो - thelallantop
पहले डेविड हेडली और अब पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि. दोनों की वजह से इशरत जहां केस में बीजेपी के कलेजे को ठंडक पड़ी और कांग्रेस का चेहरा लाल हो गया. आरवीएस मणि ने दावा किया है कि इशरत जहां मामले में यूपीए सरकार ने उनसे जबरन केस का हलफनामा बदलवाया और दूसरे हलफनामे पर दवाब बनाकर साइन करवाए. बता दें कि पहले हलफनामे में इशरत जहां को आतंकी बताया गया था. मणि ने कहा, 'SIT चीफ सतीश वर्मा ने मुझे प्रताड़ित किया. सिगरेट से मुझे जलाया. एक सीबीआई ऑफिसर हमेशा मेरा पीछा करता था. मैंने पहले हलवनामे में पूरी जानकारी दी थी कि इशरत जहां कहां-कहां गई, कहां से हथियार लिए.' अगर मणि के आरोप सही हैं तो सुप्रीम कोर्ट की सीबीआई पर तोते वाली टिप्पणी एक बार भी सही हो जाएगी. https://twitter.com/ANI_news/status/704879856912244736 https://twitter.com/ANI_news/status/704889288639512577 और क्या-क्या बोले आरवीएस मणि? मणि ने कहा, 'मैंने फाइल देखी थी. उसमें क्रॉस फायर वर्ड का जिक्र होना था, न कि एनकाउंटर. उन्होंने मेरा फोन तक छीन लिया था. मुझे किसी एकांत जगह पर रखा गया. मैंने उनसे कहा कि ये सब सही नहीं है. मेरी वाइफ चीफ जस्टिस के घर जाकर शिकायत करेगी. लेकिन वो बिलकुल नहीं माने. उन्होंने मेरी जांघों पर कई बार सिगरेट छुआकर मुझे दागा.' पहले हलफनामे में क्या था? पहले हलफनामे में इशरत समेत मारे गए मुठभेड़ में मारे गए चारों लोगों को आतंकी बताया गया था. मणि ने कहा, 'मैं पहले हलफनामे को सही मानता हूं. क्योंकि वो तथ्यों के आधार पर था. मिली सारी जानकारी को सिलसिलेवार तरीके से हलफनामे में डाला गया था. वो हलफनामा सही था. आतंकी हथियार लेकर आए थे और एनकाउंटर में मारे गए. कुछ भी गलत नहीं था. लश्कर-ए-तैयबा की साइट पर इशरत का नाम था. हालांकि बाद में इसे हटा लिया गया.' दूसरे हलफनामे में क्या था? मणि ने कहा, 'दूसरे हलफनामे के लिए मैं तैयार नहीं था. मुझे बस उसमें साइन करने के लिए कहा गया था. मैं साइन करने के लिए तैयार नहीं था. लेकिन SIT चीफ और यूपीए सरकार के आलाकमान के दबाव के चलते मुझसे जबरन साइन करवाए गए.' चौड़ में आई बीजेपी केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, 'केंद्र ने एक हलफनामा फाइल किया. इसे बाद में क्यों बदला गया. तत्कालीन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को इस बारे में जवाब देना चाहिए.' https://twitter.com/ANI_news/status/704881422054457344 नितिन गडकरी ने कहा, 'इशरत जहां केस में कांग्रेस ने जो किया, वो एंटी नेशनल है. इस मामले की जांच की जानी चाहिए.' https://twitter.com/ANI_news/status/704899053839126528 आत्मघाती हमलावर थी इशरत जहां: डेविड हेडली शिकागो की जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई में पेशी के दौरान आतंकी डेविड हेडली ने भी कई खुलासे किए. हेडली ने कहा, 'इशरत जहां आत्मघाती हमलावर थी. लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी थी.' पूर्व गृहसचिव जीके पिल्लई ने खुलासे से घिरे चिदंबरम इशरत जहां केस में पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने भी कुछ दिन पहले खुलासा किया. उन्होंने कहा, 2009 में चिदंबरम ने केंद्र सरकार का हलफनामा बदलवाया था, ताकि इशरत के लश्कर-ए-तैयबा से कनेक्शन की बात सामने ही न आए. चिदंबरम ने जॉइंट सेक्रेटरी से इशरत जहां केस की फाइल मंगवाई थी और कहा था कि हलफवनामे को बदलने की जरूरत है. कौन थी इशरत जहां? इशरत जहां 19 साल की वह लड़की थी जिस पर आतंकी होने का शक था और इस आधार पर गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 15 जून 2004 को उसका और उसके तीन साथियों का एनकाउंटर कर दिया था. इशरत के बारे में और जानने के लिए यहां क्लिक करें...

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