क्या बिहार के सिवान जिले में प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने भीड़ को कंट्रोल करने के लिए गोलियां चलाईं? अब पुलिस खुद मान रही है कि उसने हवाई फायरिंग की थी. इस दौरान तीन लोगों को गोली लगने की बात सामने आई है. इनमें एक शख्स का कहना है कि वो प्रोटेस्ट में शामिल ही नहीं था. वो तो महज़ अपने जाति, आय और आवास प्रमाण पत्र बनवाने सिवान आया था. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर उस दिन प्रोटेस्ट में क्या हुआ था?
हां हमने हवाई फायरिंग की... प्रोटेस्टर्स को गोली लगने के बाद बिहार पुलिस ने स्वीकारा
Siwan Police Firing: बिहार के सिवान जिले में 25 जुलाई को NEET पेपर लीक के चलते प्रोटेस्ट हुआ. बताया गया कि भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने गोली चलाई है. फायरिंग के कई वीडियो सोशल मीडिया पर चले. अब पुलिस ने माना है कि हवाई फायरिंग हुई थी. इस घटना में तीन लोगों को गोली लगी है.

शनिवार 25 जुलाई को बिहार के कई जिलों में प्रोटेस्ट हो रहे थे. इस बीच सिवान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. ये प्रोटेस्ट NEET पेपर लीक और दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में किया जा रहा था. सिवान में कई जगह प्रदर्शन हुए और हालात हिंसक हो गए. पत्थरबाजी हुई. पुलिस ने लाठीचार्ज किया. आंसू गैस के गोले छोड़े. कई प्रोटेस्टर, पुलिसकर्मी घायल हुए. 400 से ज्यादा लोगों को कस्टडी में लिया गया.
प्रोटेस्ट में पुलिस ने गोलियां चलाईंइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस पर गोली चलाने का आरोप भी लगा. फायरिंग के कई वीडियो सोशल मीडिया पर चले. रविवार 26 जुलाई को सिवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने माना कि पुलिस ने हवाई फायरिंग की थी. क्योंकि प्रोटेस्ट करने वालों ने डायरेक्ट पुलिस पर हमला कर दिया था. उनके मुताबिक पुलिस की तरफ से लंबी रेंज वाले हथियारों से चार राउंड और पिस्तौल से तीन राउंड फायर किए गए. कुल मिलाकर आठ से दस राउंड गोलियां चलीं. हालांकि उनका कहना है कि अभी ये जांच चल रही है कि बाकी फायरिंग कहां से हुई.
एसपी पूरन कुमार ने बताया कि जिन तीन लोगों को गोली लगी, उनमें से एक बुलेट कुमार गोंड को पुलिस की फायरिंग में पैर में गोली लगी थी. लेकिन बाकी दो लोग - आकाश और आरिफ - को गोली कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है. तीनों घायल फिलहाल खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज चल रहा है.
बुलेट कुमार प्रदर्शन में शामिल नहीं थेबुलेट कुमार गोंड गड़ौली थाना इलाके के दुमराहर बुजुर्ग गांव के रहने वाले हैं. उनका कहना है कि एक दोस्त की सलाह पर वह जाति, आय और आवास प्रमाण पत्र बनवाने सिवान आए थे. स्टेशन से उतरने के बाद उन्होंने देखा कि शहर में झड़प हो रही है. वो जिला अधिकारी के दफ्तर की तरफ जा रहे थे, तभी उनके पैर में गोली लगी. उनके मुताबिक गोली पैर को आर-पार कर गई.
उधर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सीधे पुलिस पर हमला किया. सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. पुलिस का आरोप है कि हालात इतने बिगड़ गए थे कि भीड़ को हटाने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और फिर हवाई फायरिंग करनी पड़ी.
रिपोर्ट बताती है कि एसपी पूरन कुमार झा ने पहले कहा था कि पुलिस ने सिर्फ आंसू गैस और हल्का बल इस्तेमाल किया. उनका कहना था कि गांधी मैदान में सिर्फ एक संगठन को प्रदर्शन की इजाज़त थी. बाद में दूसरे ग्रूप्स भी वहां पहुंच गए और उनके बीच झड़प शुरू हो गई. इसके बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी.
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बिहार में कई जगह झड़प हुईप्रशासन के मुताबिक प्रदर्शनकारी गांधी मैदान, जेपी चौक, सदर अस्पताल मोड़, कागजी मोहल्ला, गोपालगंज मोड़ और सिवान कचहरी रेलवे क्रॉसिंग समेत कई जगह इकट्ठा हुए थे. आरोप है कि कई जगह पत्थरबाजी हुई. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस छोड़ी और हवाई फायरिंग की. पुलिस का दावा है कि हिंसा में 19 सरकारी और एक निजी वाहन को नुकसान पहुंचा. 58 पुलिसकर्मी घायल हुए. वहीं 423 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
इस बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया और आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों पर गोली चलाई और AK-47 का इस्तेमाल किया गया. बिहार बंद के दौरान पटना, छपरा और कई दूसरे जिलों से भी हिंसा की खबरें आईं. हालांकि राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण भी रहे.
वीडियो: लल्लनटॉप के रिपोर्टर्स ने प्रदर्शन के बारे में क्या बताया?










