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रूस-यूक्रेन युद्ध का होगा अंत! पुतिन की जिनपिंग और ट्रंप के साथ बैठक में निकलेगा रास्ता?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका और चीन के आगे एक प्रस्ताव रखा है. पुतिन चाहते हैं कि तीनों मिलकर 'यूक्रेन युद्ध' का निपटारा करें और इसे अंजाम तक ले आएं. ध्यान देने वाली बात ये है कि इस बैठक में यूक्रेन को शामिल नहीं किया गया है.

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व्लादिमीर पुतिन (बीच) ने डॉनल्ड ट्रंप (राइट) और शी-जिनपिंग (लेफ्ट) को बैठक के लिए प्रस्ताव भेजा है. (courtesy: ITG)

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  • रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अगले महीने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए त्रिपक्षीय वार्ता का प्रस्ताव रखा है।
  • यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध चार वर्षों से चल रहा है और रूस चाहता है कि बातचीत से उसे लाभ हो, जबकि ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंधों को लागू करने से रोक दिया है।
  • अगर यह बैठक होती है तो इससे यूरोप और यूक्रेन की चिंताएं बढ़ेंगी, क्योंकि वार्ता में यूक्रेन को शामिल नहीं किया गया है और चीन के लिए क्षेत्रीय भू-राजनीति में संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रस्ताव रखा है कि अगले महीने वो, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ एक टेबल पर आएंगे. बातचीत का मुद्दा होगा यूक्रेन के साथ जारी जंग का अंत. प्रस्ताव रखा कि चार साल से चल रहे इस युद्ध का अंत ऐसा हो, जिसमें रूस का फायदा हो. द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है. 

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रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले एक पूर्व रूसी खुफिया अधिकारी ने बताया कि पुतिन ने 9 अक्टूबर को ट्रंप के साथ फोन पर बात की थी. इसी फोन कॉल के दौरान ये प्रस्ताव रखा गया. दावा है कि इस बातचीत के दौरान एक समझौता भी हुआ है. इसके तहत अमेरिका रूस से डीजल खरीदेगा और उसे वैश्विक बाजार में बेचने में मदद करेगा.

अमेरिका और चीन को भेजा प्रस्ताव

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने ये कन्फर्म किया है कि एक संभावित मुलाकात को लेकर बातचीत चल रही है. हालांकि उन्होंने WSJ को बताया कि तीनों पक्षों ने अभी तक इसपर मंजूरी नहीं दी है. क्रेमलिन ने आगामी एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित करने का सुझाव दिया है. ये समिट 18 और 19 नवंबर को शेन्जेन (दक्षिणी चीन के टेक हब) में होगा. 

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रूसी अधिकारियों ने डिप्लोमैटिक चैनल के ज़रिए ये प्रस्ताव चीन को भेजा है. बीजिंग ने हामी नहीं भरी है लेकिन संकेत दिया है कि अगर डॉनल्ड ट्रंप मान जाते हैं, तो चीन को वार्ता में शामिल होने से आपत्ति नहीं होगी. 

ध्यान देने वाली बात ये है कि इस बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को शामिल नहीं किया गया है. यानी ‘यूक्रेन युद्ध’ पर बातचीत में यूक्रेन का पक्ष शामिल ही नहीं होगा. अगर ये बैठक हुई तो यूक्रेन और यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ जाएगी. 

रूस और यूक्रेन में किसे चुनेंगे ट्रंप?

ये बात तब सामने आई है जब डॉनल्ड ट्रंप का रूस के प्रति रुख बदला है. 16 अक्टूबर को ट्रंप ने रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लागू करने से रोक दिया. पिछले महीने अमेरिकी संसद में एक बिल पास किया गया, जिसके तहत ये प्रतिबंध लगाए गए थे. इस फैसले पर कुछ अमेरिकी सांसदों ने आपत्ति जताई, जिनमें उनके कुछ सहयोगी भी शामिल हैं. 

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वहीं दूसरी ओर, ट्रंप ने वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के प्रति फिर से निराशा जताई है. उन्होंने कहा कि यूक्रेनी नेता को रूसी रिफाइनरियों पर हमले बंद कर देने चाहिए. ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया कि देश को एक नए राष्ट्रपति की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि वो प्रतिबंध लगाने से अभी रुक रहे हैं, क्योंकि वो रूस को बातचीत से दूर नहीं करना चाहते. उन्होंने लिखा, ‘मैं चाहता हूं, कि यह युद्ध खत्म हो!’

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चीन के लिए मुश्किल फैसला?

शी जिनपिंग के लिए इस शिखर सम्मेलन में कुछ जोखिम भी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी अधिकारियों को इस बात की चिंता है कि APEC के ज़रिए क्षेत्र में चीन की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं. कोई ऐसा जियो-पॉलिटिकल मुद्दा सामने आता है, तो बीजिंग की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

अधिकारियों ने बताया कि शी-जिनपिंग एक तरफ पुतिन को अपना समर्थन देना जारी रखना चाहते हैं. साथ ही, यूरोप के साथ चीन के आर्थिक संबंधों को भी बनाए रखना चाहते हैं. इन दोनों के बीच वे एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, इस त्रिपक्षीय बैठक में शामिल होने से वो यूक्रेन युद्ध में और ज्यादा उलझ जाएंगे. इससे यूरोपीय राजधानियों की नाराजगी भी बढ़ सकती है. यूरोप पहले से ही बीजिंग के मॉस्को के प्रति झुकाव को लेकर सतर्क है. 

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