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'ऐ मेरे वतन के लोगों' को लेकर विशाल ददलानी ने तगड़ा ब्लंडर कर दिया और तगड़े ही ट्रोल हुए

#DadlaniFacts हैशटैग चलाकर विशाल ददलानी को इतिहास पढ़ा रहे हैं लोग.

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विशाल ददलानी ने कहा था कि 'ऐ मेरे वतन के लोगों' लता मंगेशकर ने 1947 में गाया था. फोटो - ट्विटर
विशाल ददलानी को ट्विटर पर ट्रोल किया जा रहा है. और इसकी वजह है उनसे हुआ एक ब्लंडर. दरअसल, विशाल इंडियन आइडल के जज हैं. शो में 26 जनवरी को डेडिकेट करते हुए एक स्पेशल एपिसोड बनाया गया. जहां एक कंटेस्टेंट ने लता मंगेशकर का गाना ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाया. विशाल ने परफॉरमेंस खत्म होने के बाद कहा कि ये गाना लता जी ने 1947 में गाया था. बस फिर क्या था! एपिसोड की ये क्लिप हर जगह घूमने लगी. विशाल इसमें कह रहे हैं,
लता जी ने खुद ये गाना हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के लिए 73-74 साल पहले गाया था. 1947 में गाया था. जब देश आज़ाद हुआ था.
इस पर लोगों ने उन्हें घेर लिया. एक यूज़र ने लिखा,
आपिया विशाल ददलानी दावा कर रहा है कि ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गीत को लता जी ने 1947 में नेहरू के लिए गाया था. इस लेहरु भक्त को बताओ ये गीत पहली बार 27 जनवरी 1963 में भारतीय सैनिकों की याद में गाया था जो 1962 में चीन के खिलाफ युद्ध में मारे गए थे.
दरअसल, 1962 में चीन से हुए युद्ध में भारत को भारी क्षति हुई थी. जिस कारण पूरे देश में एक गुस्सा था. इस गाने के रचयिता प्रदीप भी इससे आहत हुए थे. एक दिन वॉक करते हुए उन्हें कुछ बोल सूझे. “ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आंखों में भर लो पानी, जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी.” फ़ौरन ये बोल उन्होंने अपने सिगरेट पैकेट की फॉइल पर लिख लिए. इसके कुछ हफ्तों बाद प्रोड्यूसर महमूद ने उन्हें बुलाया. दिल्ली के नैशनल स्टेडियम में होने वाले ईवेंट के लिए गाना लिखना था. प्रदीप ने उस ईवेंट के लिए गाना पूरा किया, म्यूज़िक डायरेक्टर सी. रामचन्द्र और लता मंगेशकर को अप्रोच किया. और इसके बाद जो हुआ, वो इतिहास है. लता मंगेशकर ने ये गाना 27 जनवरी, 1963 को हुए इवेंट में गाया. बताया जाता है कि लता जी का गाना सुनकर प्रधानमंत्री नेहरू भी बुरी तरह रोने लग गए थे. यहां विशाल को अपनी भूल सुधारने का मौका ही नहीं मिला. क्यूंकि ट्विटर पर जमकर #DadlaniFacts ट्रेंड होने लगा. कुछ लोगों ने विशाल को उनसे हुई गलती से अवगत भी करवाया. जिसके बाद विशाल ने ट्वीट कर माफी भी मांगी. बावजूद इसके मामला नहीं थमा. विशाल ददलानी को आप और काँग्रेस का समर्थक कहा जाने लगा. विशाल भी चुप नहीं रहे. लगातार ट्वीट करते रहे. कहा,
यार बीजेपी के फ़ोकटिया 2 रुपए वाले ट्रोल्स, ये #DadlaniFacts ट्रेंड करवा लो. अगर करवा सकते हो तो. लव दी हैशटैग. कुछ फनी ट्वीट्स को मैं खुद रिट्वीट करूंगा.
एक यूज़र ने इसपर विशाल से पूछा कि क्या ट्रोल्स के पास बस यही काम है. जिस पर विशाल ने जवाब दिया,
सबसे फनी बात है कि इन लोगों को लगता है कि इससे कुछ फ़र्क पड़ेगा. मेरे लिए ये कुछ घंटों का मनोरंजन है, कुछ रेंडम वेबसाइट्स के लिए आर्टिकल्स और ट्रोल्स को उनके 2 रुपए मिल जाएंगे. इस इकॉनमी में इसकी सख्त जरूरत है.
विशाल ने कुछ और ट्रोल्स को जवाब दिया. जिसके बाद उन्होंने 2 घंटे पहले एक ट्वीट किया. जिससे शायद ये बवाल खत्म हो जाए. लिखा,
मैं देख रहा हूं कि मेरे ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ की गलत डेट बताए जाने पर कुछ राइट विंगर नाराज़ हो गए हैं. मैं अपनी गलती के लिए माफी मांगता हूं. इन वफ़ादार राष्ट्रवादियों ने तब कुछ नहीं कहा, जब चोरनब पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 भारतीय सैनिकों की मौत को टीआरपी विन की तरह सेलिब्रेट कर रहा था. अज़ीब बात है.
देखते हैं कि मामला कब ख़त्म होता है.

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