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क्या है जयपुर दंगे के इस वायरल वीडियो की असलियत?

इस वीडियो को 30 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.

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इन तस्वीरों को जयपुर का बताकर लोगों को बरगलाया जा रहा है
सोशल मीडिया मॉडर्न नारद है. कुछ भी हो, सबसे पहले सोशल मीडिया पर पर्चा छपता है. न भी हो, तब भी छपता है. कहीं का मामला कहीं और का बताकर चलता है. पिछले दो दिनों से जयपुर चर्चा में है. फेसबुक पर कुछ अतिसक्रिय महानुभाव हैं. उनकी मानें, तो जयपुर में दंगा छिड़ गया है. हालात काबू से बाहर चले गए हैं. जयपुर के कश्मीर बनने की नौबत आ गई है.

एक शख्स हैं. जनाब दिनेश भाटी सियाणा. जिनकी ये फेसबुक पोस्ट है, जिसमें दो वीडियो लग हैं. खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं. वकील भी हैं. इस स्टोरी के लिखे जाने तक सियाणा जी की इस पोस्ट को लगभग 43 हज़ार लोग शेयर कर चुके हैं. दोनों वीडियो अगल-अलग इस से भी ज़्यादा शेयर हुए हैं. ये वीडियो उन्होंने 10 सितंबर, 2017 को सुबह पोस्ट किया था. तकरीबन 24 घंटे के अंदर इसे लगभग 30 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है. दिनेश कह रहे हैं कि ये वीडियो 9 सितंबर, 2017 को जयपुर में हुए 'दंगे' का है. तुलना कश्मीर से की है.

दिनेश की चिंता जायज़ है. कश्मीर की अस्थिरता जयपुर में नहीं होनी चाहिए. लेकिन भाई ने जो वीडियो लगाए हैं, वो फर्ज़ी हैं. दिनेश जिस वीडियो को जयपुर का बताया है, वो 1,037 किलोमीटर दूर अनंतनाग का है. वो भी अभी का नहीं. पुराना. हम सियाणा जी की वॉल की सैर करके आए. पूरी टाइमलाइन सांप्रदायिकता में रंगी पड़ी है.
दिनेश भाटी सियाणा की टाइमलाइन पर भाईचारे का कत्ल करती कई पोस्ट्स हैं...
दिनेश भाटी सियाणा की टाइमलाइन पर भाईचारे का कत्ल करती कई पोस्ट्स हैं.

सियाणा की पोस्ट पर 500 से ज्यादा लोगों ने कमेंट किया है. ज़्यादातर कमेंट भड़काऊ हैं. ज़हर बुझे. मुसलमानों से बदला लो टाइप. कुछ समझदार लोगों ने भी अपनी बात रखी है. लोगों को समझाया है. कई लोगों ने लिखा है कि वीडियो जयपुर का नहीं है. हम आपको इसी वीडियो के कुछ ऐसे हिस्से दिखाएंगे जिनसे साबित होता है कि ये वीडियो जयपुर का नहीं, बल्कि अनंतनाग का है.
वीडियो में एक कार खड़ी दिख रही है. इसका नंबर JK से शुरू होता है. वैसे किसी और राज्य में रजिस्टर्ड गाड़ी का किसी और राज्य में मौजूद होना सामान्य बात है. लेकिन इस विडियो में एक और कार है, जिस पर जम्मू-कश्मीर का नंबर प्लेट लगा है. एक कार ऐसी है, जिसका नंबर कोशिश करने पर JK 03 से शुरू दिखाई पड़ता है. गूगल आपको बताएगा कि JK 03 गाड़ियां की रजिस्ट्री सिर्फ अनंतनाग के RTO दफ्तर में होती है.
ये तस्वीर इसी विडियो से लिया गया है. इसमें जम्मू-कश्मीर के नंबर प्लेट की एक कार पार्क दिख रही है...
ये तस्वीर इसी विडियो से लिया गया है. इसमें जम्मू-कश्मीर के नंबर प्लेट की एक कार पार्क दिख रही है...

वीडियो में कई लोग सदरी पहने नजर आ रहे हैं. जयपुर में काफी गर्मी पड़ रही है. 11 सितंबर को वहां का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस है. हवा में करीब 45 फीसद आद्रता है. ऐसे मौसम में लोग सदरी क्यों पहनेंगे? पत्थर चलाने में वैसे भी कितना पसीना आता है!
इस वीडियो में ज्यादातर इमारतों की छत पहाड़ी इलाकों की तरह ढलवा है...
इस वीडियो में ज्यादातर इमारतों की छत पहाड़ी इलाकों की तरह ढलवा है, कुछ लोगों ने जैकेट भी पहन रखी है

वीडियो में एक मार्केट नज़र आ रहा है. उसमें मकान और दुकान दिख रहे हैं. उसे गौर से देखिए. मैदानी इलाकों और पहाड़ी इलाकों की इमारतों के डिजाइन में अंतर होता है. पहाड़ी इलाकों में जहां बर्फ गिरती है, वहां की छतें ढलान लिए हुए होती हैं. ताकि बर्क के भार से छत न गिरे. नीचे फिसल जाए. वीडियो में ज़्यादातर इमारतों की छतें इसी तरह की हैं. फिसलननुमा. इसके अलावा कश्मीर में इमारतों के अंदर लकड़ी का भी खूब इस्तेमाल होता है.
वेस्टर्न हॉज़री और सत्थू फर्निशिंग, ये दोनों दुकानें अनंतनाग में हैं
वेस्टर्न हॉज़री और सत्थू फर्निशिंग, ये दोनों दुकानें अनंतनाग में हैं

मार्केट में कई दुकानें नजर आ रही हैं. दो दुकानों के बोर्ड साफ-साफ दिख रहे हैं. वेस्टर्न हॉज़री और सत्थू फर्निशिंग. हमने चेक किया. दोनों दुकानें अनंतनाग के लाल चौक में हैं. अब ये महज संयोग तो नहीं हो सकता. हम पर यकीन नहीं तो गूगल से पूछ लीजिएगा.
एक आसान गूगल सर्च बता देता है कि वेस्टर्न हॉज़री कहां है
एक आसान गूगल सर्च बता देता है कि वेस्टर्न हॉज़री कहां है

तो जयपुर वाली घटना क्या है ?
8 सितंबर को जयपुर के रामगंज पुलिस थाने में स्थानीय लोगों की पुलिस के साथ जमकर झड़प हुई. लोगों ने थाने पर पत्थर फेंके. लोगों का कहना है कि एक मुस्लिम शख्स अपनी पत्नी के साथ बाइक पर कहीं जा रहा था. पुलिसवाले ने पूछताछ के नाम पर एक उससे बदतमीजी की. वो पुलिस थाने शिकायत दर्ज कराने पहुंचा. तब तक बाहर अच्छी-खासी भीड़ जमा हो गई. पुलिस ने भीड़ हटाने के लिए कार्रवाई की. इसी दौरान 24 साल के एक मुसलमान युवक मुहम्मद रईस को चोट लगी. उसकी मौत हो गई.
इसके बाद लोगों ने बवाल काट दिया. भीड़ ने कई गाड़ियों को आग लगा दी. बिजली के सब-स्टेशन को भी फूंक दिया. 6 पुलिसवाले भी घायल हुए. मामला बढ़ा और पुलिस ने रामगंज और आस-पास के इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया. मोबाइल इंटरनेट भी बंद कर दिया गया. ताकि अफवाहें न फैलें. शनिवार को पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों में बातचीत हुई. बहुत मनाने के बाद रईस का परिवार शव का अंतिम संस्कार करने को राजी हुआ. कुल मिलाकर स्थिति अब नियंत्रण में है.
 
9 सितंबर को जयपुर में छुट-पुट हिंसा और आगजनी हुई थी.
9 सितंबर को जयपुर में छुट-पुट हिंसा और आगजनी हुई थी.

 
अफवाहें फैलाने वाला गैंग 'कच्चा माल' सूंघता रहता है अफवाहें फैलाने वालों को मौके की तलाश रहती है. लोग ताक में रहते हैं. हिंदू-मुस्लिम का एजेंडा फिक्स है. एजेंडा वायरल करने के लिए दो और दो जोड़कर 74 बना देते हैं. लोग भी महान. बिना समझे, सच जाने, डर को हाथोंहाथ लपक लेते हैं. औरों में फैलाते हैं. लाल चौक के वीडियो को राजस्थान का बताकर लोगों को खोटा सिक्का पकड़ाते हैं. झांसे में फंसने वाले डर खाते हैं, शक उगलते हैं. खुद झूठ के शिकार हुए लोग किसी और को शिकार बनाते हैं.
सोशल मीडिया के ऐसे धुरंधरों के लिए हमारी मैथिली में एक विशेषण है- लबरा. लबरा लबर-लबर बोलता है. उसके बोलने पर कोई कान नहीं देता. कोई उसे कौड़ी के भाव भी नहीं लेता. हम में से हर कोई कभी न कभी सोशल मीडिया पर ठगा जा चुका है. कभी पॉजीटिव तो कभी नेगेटिव न्यूज के हाथों. कई लोग एक बार ठोकर लगने पर संभल जाते हैं. कई को ये ही झूठ भाता है. अगर आप दूसरी किस्म के इंसान नहीं हैं, तो ऐसे लबरों के झांसे में आने से बचिएगा. कहीं कोई ऐसी पोस्ट दिखे, जो सही नहीं है और भाईचारे का कत्ल करने के लिए शेयर की गई है, तो उसे रिपोर्ट भी कीजिएगा.



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