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राजस्थान सरकार वो बिल ले आई है जिसके बाद जवाबदेही बचेगी नहीं

ये नियम जजों और नौकरशाहों पर लागू होंगे.

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वसुंधरा सरकार के इस बिल पर काफी विवाद हो रहा है
गज़ब की हिम्मत है राजस्थान सरकार में. इतने दिनों से सुन रहे थे कि राजस्थान सरकार ऐसा कानून लाने वाली है जिसके बाद सरकार की मर्ज़ी के बिना नौकरशाहों और जजों के खिलाफ जांच नहीं हो पाएगी. एक बार को यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसे किसी कानून के बारे में सोचा भी जा सकता है. लेकिन सोचा क्या गया, 23 अक्टूबर 2017 को उस कानून के लिए राजस्थान विधानसभा में एक बिल भी पेश कर दिया गया.
राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने विधानसभा में क्रिमिनल लॉज़ (राजस्थान अमेंडमेंट) बिल पेश कर दिया है. इसके पास हो जाने पर राजस्थान में किसी भी सेवारत या रिटायर्ड जज के खिलाफ कोई जांच तब तक नहीं होगी, जब तक राजस्थान सरकार इसकी इजाज़त न देदे. यही छूट मैजिस्ट्रेट सहित सभी नौकरशाहों को भी मिलेगी. सरकार 180 दिन के अंदर फैसला करेगी. अगर सरकार इतने वक्त में जांच के बारे में फैसला न कर पाए, तो मान लिया जाएगा कि जांच की इजाज़त मिल गई है. ये छूट किसी नौकरशाह या जज के काम से जुड़े मामलों में ही लागू होगी.
 
प्रस्तावित बिल जो विवाद के केंद्र में है (फोटो ट्विटर)
प्रस्तावित बिल जो विवाद के केंद्र में है (फोटो ट्विटर)

पहले ऑर्डिनेंस लाए थे, अब बिल आया है
राजस्थान सरकार ने पिछले महीने इन्हीं प्रावधानों के साथ एक ऑर्डिनेंस पास किया था. अब ये कानून बनने जा रहा है. इस बिल की सबसे बचकानी बात ये है कि इन 180 दिनों के भीतर मीडिया भी संबधित मामले पर खबर नहीं कर पाएगा.
खूब विरोध हो रहा है इस बिल का
राजस्थान के कानून राज्यमंत्री कह रहे हैं कि ये एक संतुलित बिल है जिसकी बड़ी ज़रूरत महसूस हो रही थी और मीडिया के हकों का ध्यान रखा जाएगा. लेकिन इस बिल का खूब विरोध हो रहा है. राजस्थान कांग्रेस ने आज सदन से वॉकआउट किया. वरिष्ठ वकील एके जैन ने राजस्थान हाईकोर्ट में बिल के खिलाफ जनहित याचिका दायर कर दी है. भाजपा नेता एन राजवी ने भी समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि वो इस बिल के खिलाफ अपनी बात पार्टी की बैठक में रखेंगे.
सचिन पायलट. राजस्थान कांग्रेस के विधायकों ने बिल के विरोध में सदन से वॉकआउट किया
सचिन पायलट. राजस्थान कांग्रेस के विधायकों ने बिल के विरोध में सदन से वॉकआउट किया

क्या खतरा है बिल से?
जितनी जानकारी फिलहाल उपलब्ध है, उस से राजस्थान में एक नए तरह के 'रूलिंग इलीट' के पैदा हो जाने का खतरा पैदा हो जाएगा. ऐसे लोग, जो शासन करेंगे, लेकिन उन्हें जवाबदेही के लिए मजबूर करना मुश्किल होगा. चूंकि इन मामलों में फंसाने या बचाने की ताकत चुनी हुई सरकार के पास होगी, तो अधिकारी और न्यायपालिका का रिश्ता राजनैतिक पार्टियों के साथ बदलने लगेगा. उन्हें पेशेवर तरीके से काम करने में व्यावहारिक दिक्कतें आएंगी. ऐसे में संविधान में सरकार के अलग-अलग अंगो के बीच ताकत का विभाजन चरमरा जाएगा. न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के बीच 'सिस्टम ऑफ चेक्स एंड बैलेंसेस' खत्म होने लगेगा.
फिलहाल इस बिल को कानून बनने में कुछ वक्त है. लेकिन तब तक का इंतज़ार न ही किया जाए तो बेहतर है.


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