ऐप की बात करते धन सिंह रावत. फोटो, वायरल वीडियो से ली गई है.
उत्तराखंड. अक्सर आने वाली आपदाओं के कारण चर्चा में रहता है. कभी भूस्खलन की घटनाएं होती हैं तो कभी बादल फटने के मामले सामने आते हैं. लेकिन लगता है कि उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इन सबका हल निकाल लिया है. उन्होंने एक ऐप की तलाश कर ली है. हैरान मत होइए. आप सही सुन रहे हैं. धन सिंह रावत ने दावा किया है कि एक ऐसा ऐप भी है जिसके जरिए बारिश को कम-ज्यादा या आगे-पीछे किया जा सकता है. धन सिंह रावत के पास उत्तराखंड सरकार के कई महत्वपूर्ण विभाग हैं. इनमें चिकित्सा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, सहकारिता, उच्च शिक्षा, आपदा प्रबंधन पुनर्वास, और प्रोटोकॉल जैसे विभाग शामिल हैं. सोमवार 30 अगस्त को न्यूज24 ने एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया. इसमें उत्तराखंड सरकार में मंत्री धन सिंह रावत कह रहे हैं,
"आईआईटी रुड़की को भी हमने जोड़ा है. जो हमारे अनुसंधान केंद्र हैं, उनको भी जोड़ा है. तीन-चार लोगों को जोड़ा है उसमें. और हमने कहा है कि वो ये तय करेंगे कि किस क्षेत्र में कितनी आपदा आने वाली है. ताकि हम वहां लोगों को पहले से अलर्ट कर देंगे. हम अपनी मशीनरी को अलर्ट कर देंगे. चाहे पीडब्ल्यूडी का है, चाहे सिंचाई विभाग का है, चाहे जो भी है. चाहे स्थानीय प्रशासन है."
इसके बाद उन्होंने ऐप के जरिए बारिश का जिक्र किया और कहा,
"अब तो एक ऐसा ऐप भी आ रहा है जो ये कह रहा है कि अगर कहीं बारिश होती है तो बारिश को थोड़ा कम ज्यादा या आगे पीछे भी कर सकते हैं. भारत सरकार को मैं वो प्रेजेंटेशन दिखाने वाला हूं. और भारत सरकार यदि उसमें अनुमति दे देती है तो कई राज्यों के लिए ये बहुत अच्छा हो सकता है."
अगर आपको अब भी भरोसा नहीं हो रहा है तो लीजिए वीडियो भी देखिए-
बयान सामने आने के बाद लोग कहां चुप बैठने वाले थे. वे अब धन सिंह रावत के कमेंट पर मजे ले रहे हैं. कुछ उदाहरण देखिए, विकास नाम के यूजर ने कहा,
"बहुत दिन से सन्नाटा था, चलो कोई तो आया जिंदादिल."
केशव शरण नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा.
"मुझे लगता है ये नेताजी विज्ञान को फेल करके ही मानेंगे. वजह ये है कि इन लोगों को कोई पूछता तो है नहीं. इसलिए सुर्खियों में आने के लिए सस्ती लोकप्रियता का सहारा लेते हैं.
एक और ट्विटर यूजर आशा श्री नाम लिखती हैं,
"कमाल हो गया मंत्री जी, बारीश को आगे पीछे कर सकते हो. तो ठीक है, बिहार, एमपी में बाढ़ और बारिश लोगों को बहुत परेशान करती हैं, वहां भी कृपा कर दीजिए. उत्तराखंड में बादल फटने से तबाही बहुत होती है, उससे भी राहत दे दीजिए."
वैसे बता दें कि बारिश पर कंट्रोल का तो नहीं, लेकिन वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बारिश कराने का दावा जरूर किया है. बारिश को नियंत्रित करने की बात शायद पहले कहीं नहीं सुनी गई है. हालांकि हो सकता है कि धन सिंह रावत जो कहना चाह रहे हैं, उसे ठीक तरीके से बता नहीं पाए. शायद इसी कारण उनकी बात सुनने में अजीब लग रही है. धन सिंह रावत बता रहे हैं कि भारी बारिश जैसी आपदा से निपटने के लिए आईआईटी रुड़की और सरकारी अनुसंधान केंद्रों के सहयोग से टूल बनाया जा रहा है. इस टूल के जरिए मौसम और बारिश के बारे में पता किया जा सकेगा. अच्छा ही है अगर किसी टूल से पता चल सके कि किस क्षेत्र में कितनी बारिश आने वाली है. इससे राहत और आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियां की जा सकेंगी. लेकिन पहली बार में धन सिंह रावत की बात पर भरोसा करना मुश्किल है.