उत्तराखंड के धारचूला में मुस्लिम व्यापारियों के खिलाफ माहौल बना हुआ है. पिछले कई दिनों से उनके खिलाफ एक तरह का आंदोलन चल रहा है. धारचूला के व्यापार संघ ने पहले बाहर से आए व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया, जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम व्यापारी हैं. व्यापार संघ की मांग है कि बाहर से आए व्यापारी अपनी दुकानें बंद कर वापस चले जाएं. इसी के तहत मार्केट में इस मांग के साथ व्यापार संघ ने मार्च निकाला. बीते दो-तीन दिनों से मुस्लिम व्यापारी अपनी दुकानें नहीं खोल पाए. उत्तराखंड पुलिस ने इस संदर्भ में व्यापार संघ के सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद बंद कराई गई दुकानें 18 मार्च को फिर से खुलीं.
उत्तराखंड के धारचूला में क्यों बंद रहीं मुसलमानों की दुकानें? किसे कहा जा रहा 'बाहरी'?
धारचूला के स्थानीय व्यापार संघ ने 91 व्यापारियों की सदस्यता रद्द कर दी, जिनमें अधिकतर मुस्लिम हैं. इन व्यापारियों को अपनी दुकानें बंद करके चले जाने का अल्टीमेटम दिया गया. दो-तीन दिन मुस्लिम व्यापारियों की दुकानें बंद भी रहीं. फिर प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद 18 मार्च से उनकी दुकानें खुलीं.

इसकी शुरुआत इस साल 1 फरवरी को सामने आई एक घटना से हुई. धारचूला की दो नाबालिग लड़कियों को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर यूपी के बरेली ले जाने का मामला सामने आया था. स्थानीय लोग सड़कों पर उतर गए. नाबालिग लड़कियों को बचाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई. पुलिस ने 4 फरवरी को बरेली से दोनों लड़कियों को रेस्क्यू किया. मामले में धारचूला आकर व्यापार करने वाले बरेली के दो मुस्लिम व्यापारियों को गिरफ्तार किया गया.
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धारचूला के थाना प्रभारी परवेज अली के मुताबिक दोनों आरोपी व्यापारियों को फरवरी में गिरफ्तार किया गया था. इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 (अपहरण) और 376 (यौन उत्पीड़न) सहित संबंधित धाराओं और POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ.
न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद पुलिस ने व्यापार या दूसरे काम के लिए पिथौरागढ़ में रहने वाले सभी ‘बाहरी’ लोगों का वेरिफिकेशन फिर से शुरू करने का फैसला किया. वहीं धारचूला व्यापार संघ ने अपने सभी व्यापारियों का मेंबरशिप रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया था.
धारचूला व्यापार संघ के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह थापा ने कहा था,
"हमने व्यापार संघ धारचूला में रजिस्टर्ड सभी 630 व्यापारियों की सदस्यता रद्द कर दी है. व्यापारियों का नया रजिस्ट्रेशन पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही किया जाएगा."
थापा ने ये भी कहा था कि इसके बाद केवल उन्हीं व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, जो साल 2000 से धारचूला में व्यापार कर रहे हैं.
फिर व्यापार संघ ने क्षेत्र के बाहर के 91 व्यापारियों की पहचान की, उनका रजिस्ट्रेश रद्द किया और उन्हें दुकानें बंद करके चले जाने का अल्टीमेटम दे दिया. मार्केट में मार्च निकालकर घोषणा की गई कि ‘बाहरी’ व्यापारी धारचूला से चले जाएं. साथ ही, दुकान मालिकों से 'बाहरी लोगों' को किराये पर दी गई दुकानों को खाली कराने की अपील की.
बाहरी व्यापारियों के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर केसइसके बाद प्रशासन हरकत में आया. व्यापार संघ के कई सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक पिथौरागढ़ की DM रीना जोशी ने कहा,
"हमने उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिन्होंने दुकानदारों को दुकानें बंद करने के लिए मजबूर किया. किसी भी गैरकानूनी गतिविधि की इजाजत नहीं दी जाएगी. शहर में कारोबार करने वाले बाहर के व्यापारियों को पूरी सुरक्षा दी जाएगी."
धारचूला के SDM मंजीत सिंह ने बताया कि जिन व्यापारियों की सदस्यता रद्द की गई है, उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराई गई है. उन्होंने कहा,
"धारचूला से बाहर के व्यापारियों ने पिछले तीन दिनों से अपनी दुकानें बंद रखीं, लेकिन उनमें से किसी ने भी जगह नहीं छोड़ी है."
मंजीत सिंह के मुताबिक इस पूरे मामले में शांति स्थापित करने के लिए बैठकें कराई गई हैं. सभी पक्षों को समझाने की कोशिश की गई है. उन्होंने कहा कि दुकानें 18 मार्च से खुली हैं और स्थिति सामान्य है.
बता दें कि पिछले साल उत्तरकाशी जिले के पुरोला में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया था. यहां दो युवकों पर एक स्थानीय दुकानदार की नाबालिग बेटी के अपहरण का आरोप लगा था. स्थानीय लोगों ने आरोपियों को नाबालिग सहित पकड़ लिया था. आरोपियों में एक युवक मुस्लिम और दूसरा हिन्दू था. इस घटना के बाद पुरोला में तनाव बढ़ गया था. इलाके में CrPC की धारा 144 लागू की गई थी.
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