जोशीमठ त्रासदी के बीच उत्तराखंड (Uttarakhand) के तीर्थस्थलों के पास बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर एक रिपोर्ट आई है. ये रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (NGT) द्वारा गठित एक ज्वाइंट कमेटी ने पेश की है. इसमें कहा गया है कि तीर्थस्थलों पर जितनी बेसिक सुविधाएं हैं, उससे कहीं ज्यादा तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं. इसके अलावा इन इलाकों में कूड़ों के प्रबंधन की व्यवस्था भी नहीं है. यह रिपोर्ट चारधाम यात्रा में आने वाली प्रमुख जगहों पर सर्वे के बाद तैयार की गई है. चारधाम यानी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री. इस यात्रा के बीच में जोशीमठ शहर भी आता है. जहां पिछले कई महीनों से जमीन धंसने और मकानों में दरार की घटनाएं सामने आई हैं. जोशीमठ को बद्रीनाथ का ‘प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है.
'सुविधा कम, श्रद्धालु ज्यादा, बिगड़ सकती है हालत', चारधाम यात्रा पर आंखें खोल देने वाली रिपोर्ट
NGT द्वारा गठित कमेटी की ये रिपोर्ट जोशीमठ त्रासदी के बीच आई है.


अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल से नवंबर के बीच चार धाम यात्रा में 23 लाख से ज्यादा यात्रियों ने हिस्सा लिया. कमेटी ने NGT को ये रिपोर्ट 8 दिसंबर को सौंपी थी. कमेटी इसलिए बनाई गई थी ताकि इन तीर्थस्थलों के आसपास हो रहे पर्यावरणीय नुकसान का आकलन हो सके. ये सभी तीर्थस्थलों को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से संवेदनशील माना जाता है. NGT ने 12 अगस्त को एक आदेश दिया था. जिसके बाद कमेटी ने केदारनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री और हेमकुंड साहिब में सर्वे किया.
नुकसान पर कोई रिसर्च उपलब्ध नहींकमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वहां बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्यादा तीर्थयात्री थे. साथ ही यात्रियों के प्रबंधन, सूखे कूड़े, प्लास्टिक कचरे और घोड़े/खच्चरों के मल का सही प्रबंधन नहीं था. ट्रेक रूट में घोड़ों की एंट्री रेगुलेटेड नहीं थी. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में जानवरों के होने से उन संवेदनशील इलाकों को पर्यावरणीय नुकसान पहुंच सकता है. पहाड़ों या ऊंचे तीर्थ स्थलों में कई यात्री ट्रेकिंग के लिए घोड़ों या खच्चरों का इस्तेमाल करते हैं.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि उन इलाकों में पानी और मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर कोई डेटा उपलब्ध नहीं है. साथ ही टूरिज्म का पर्यावरण पर क्या असर हो सकता है, इसके बारे में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भी जानकारी नहीं है. कमेटी ने कहा कि अब तक ऐसी कोई रिपोर्ट या रिसर्च नहीं है जिससे पर्यटकों के बढ़ने से पर्यावरण पर होने वाले नुकसान का आकलन हुआ हो.
टूरिज्म सेक्टर को हुआ नुकसानइंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक चारधाम यात्रा उत्तराखंड में सबसे ज्यादा रोजगार पैदा करता है. साल 2019 में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री घूमने करीब 36 लाख यात्री आए थे. इससे 1100 करोड़ रुपये का राजस्व पैदा हुआ था. हालांकि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोविड महामारी के कारण काफी नुकसान हुआ. चारधाम यात्रा के बस ऑपरेटर्स को मई और जून के महीने में 22 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. वहीं टैक्सी, टेम्पो चलाने वालों को भी 30 करोड़ का नुकसान हुआ.
इस यात्रा से कई लोगों का रोजगार चलता है. मसलन, पालकी ढोने वाले, घोड़ा रखने वाले, पिट्ठू सहित कई छोटे-छोटे व्यापारी हैं जो अपनी आजीविका के लिए इसी यात्रा पर भी निर्भर हैं. उत्तराखंड सरकार की रिपोर्ट बताती है कि कोविड के कारण राज्य में टूरिज्म सेक्टर को 200 से 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. और ये राज्य की जीडीपी का करीब 30 फीसदी है.
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