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UP में 100 करोड़ का 'स्कॉलरशिप घोटाला', हेराफेरी के लिए 3000 फर्जी अकाउंट खोले गए!

बच्चों और बुजुर्गों के नाम पर भी फर्जी अकाउंट खोल लिए गए.

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लखनऊ के हजरतगंज थाने में 30 मार्च को केस दर्ज हुआ (सांकेतिक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश में 100 करोड़ रुपये का कथित स्कॉलरशिप घोटाला (UP Scholarship Scam) सामने आया है. लखनऊ पुलिस ने एक केस दर्ज किया है. जिसका लब्बोलुआब ये है कि राज्य और केंद्र सरकार की करोड़ों रुपये की स्कॉलरशिप का कुछ लोगों ने आपस में बंदरबांट कर लिया. ये पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को मिलने थे. लेकिन पैसे कहीं और चले गए. लखनऊ के हजरतगंज थाने में 30 मार्च को केस दर्ज हुआ. FIR में 18 लोगों के नाम दर्ज हैं, जिनमें कई कॉलेज के प्रिंसिपल और फिनो पेमेंट्स बैंक के कई कर्मचारियों के नाम शामिल हैं.

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किसने किया घोटाला?

स्कॉलरशिप मामले में हजरतगंज थाने के सब-इंस्पेक्टर दयाशंकर द्विवेदी ने शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद FIR दर्ज हुई है. दी लल्लनटॉप के पास इस FIR की एक कॉपी उपलब्ध है. FIR के मुताबिक, स्कॉलरशिप की ये गड़बड़ियां 2015 से लेकर अब तक की हैं. कहा गया है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों, फर्जी बैंक अकाउंट, काल्पनिक नाम का इस्तेमाल कर ये घोटाला किया है. यह राशि 100 करोड़ से ज्यादा की है, जो लाभार्थियों को दिये जाने थे. घोटाला गंभीर किस्म का है और इसमें दर्ज नामों के अलावा भी कई लोग शामिल हैं.

FIR में लिखा गया है कि आधिकारिक सूचना मिलने के बाद मामले की जांच की गई. शुरुआती जांच में पाया गया कि 10 कॉलेजों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये स्कॉलरशिप की राशि का गबन किया. इसमें लखनऊ के हाइजिया कॉलेज ऑफ फार्मेसी, एसएस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड एजुकेशन के नाम शामिल हैं. इसके अलावा फर्रूखाबाद और हरदोई के कई कॉलेजों के नाम दर्ज हैं.

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जिन इंस्टीट्यूट ने स्कॉलरशिप के पैसे का गबन किया (फोटो- FIR की कॉपी से)
कैसे किया गया घोटाला?

FIR के मुताबिक शुरुआती जांच में जो पता चला, उसके मुताबिक धांधली के लिए 3000 फर्जी बैंक अकाउंट खोले गए. इसके अलावा पैसों की हेराफेरी के लिए 1200 फर्जी सिम कार्ड और करीब 1200 डेबिट कार्ड रखे गए. एटीएम कार्ड को इन संस्थानों ने ही अपने पास रखा था. जांच में पाया गया कि कुछ बैंक अकाउंट नाबालिग और बुजुर्ग लोगों के नाम से खोले गए, जो इस स्कॉलरशिप के दायरे में नहीं आते हैं. इनमें कई नाम ऐसे हैं, जिन्हें उनके नाम से बैंक अकाउंट खुलने की जानकारी तक नहीं है.

इस घोटाले में फिनो पेमेंट्स बैंक का नाम आया है. यह एक डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म है. 2017 में इसकी शुरुआत हुई थी. फिनो पेमेंट्स बैंक की वेबसाइट के मुताबिक, इसके प्लेटफॉर्म पर 45 लाख से ज्यादा बैंक अकाउंट हैं. FIR में स्कॉलरशिप पाने वाले जिन अपात्र लोगों के नाम लिखे हैं, उन सबके अकाउंट फिनो पेमेंट्स बैंक से जुड़े हैं. फिनो पेमेंट्स बैंक के कई एजेंट्स ने फर्जीवाड़े के लिए छात्रों के बैंक अकाउंट्स के नेट बैंकिंग यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किया.

स्कॉलरशिप वितरण के लिए कॉलेज के मैनेजमेंट जिम्मेदार होते हैं. FIR में जांच अधिकारी ने लिखा है कि कॉलेज के मैनेजमेंट ने फिनो बैंक के एजेंट के साथ मिलकर यह घोटाला किया है. जिन लोगों ने फ्रॉड तरीके से स्कॉलरशिप लिया, वे छात्र नहीं हैं. साथ ही, वे पीएम सम्मान निधि भी ले रहे थे. यह भी पता चला कि पहले से ही छात्रों से ब्लैंक चेक पर साइन करवाकर रखा गया था. और बाद में पैसे निकाले गए. 

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हजरतगंज थाने के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला सिर्फ शुरुआती जांच के बाद पता चला है. ये केस और भी बड़ा हो सकता है. अगर और लोगों के नाम सामने आएंगे तो उनके खिलाफ भी केस दर्ज होंगे.

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